
CBSE कक्षा 12वीं अकाउंटेंसी बोर्ड परीक्षा 2025 और 2026 के बीच एक बड़ा वैचारिक (ideological) बदलाव देखा गया है। जहाँ 2025 का पेपर अपनी लंबी गणनाओं और पारंपरिक फॉर्मेट के कारण छात्रों के लिए चुनौतीपूर्ण और समय लेने वाला था, वहीं 2026 का पेपर अधिक संतुलित और 'योग्यता-आधारित' (Competency-based) प्रश्नों पर केंद्रित रहा। यह बदलाव दर्शाता है कि बोर्ड अब रटने की क्षमता के बजाय छात्रों की विश्लेषणात्मक सोच और बुनियादी समझ को अधिक महत्व दे रहा है।
2025 और 2026 की अकाउंटेंसी बोर्ड परीक्षाओं की तुलना से पता चलता है कि अब प्रश्नों का पैटर्न विश्लेषणात्मक (Analytical) ज्यादा हो गया है। जहाँ दोनों साल NCERT सिलेबस पर ही केंद्रित रहे, वहीं 2026 के पेपर ने कैलकुलेशन सेक्शन में नए फॉर्मेट पेश किए।
यह विश्लेषण CBSE कक्षा 12वीं अकाउंटेंसी बोर्ड परीक्षा 2025 और 2026 के बीच कठिनाई स्तर, प्रश्न पैटर्न और वैचारिक बदलावों की सटीक तुलना प्रस्तुत करता है।
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पैरामीटर (Parameter) |
2025 का पेपर |
2026 का पेपर |
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कुल कठिनाई स्तर |
मध्यम से कठिन |
मध्यम |
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MCQ सेक्शन |
उलझाने वाला और लंबा |
योग्यता-आधारित (Competency) और ट्रिकी |
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पार्ट A (Partnership) |
गणना (Calculation) में भारी |
कॉन्सेप्ट पर आधारित |
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पार्ट B (Financials) |
आसान से मध्यम |
सीधे सवाल लेकिन नए फॉर्मेट |
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समय प्रबंधन |
चुनौतीपूर्ण (बहुत लंबा पेपर) |
प्रबंधनीय लेकिन ध्यान देने योग्य |
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NCERT संरेखण |
उच्च |
बहुत उच्च |
2025 की परीक्षा को छात्रों और शिक्षकों द्वारा काफी कठिन और लंबा माना गया था। कई छात्रों को 3 घंटे में पेपर पूरा करने में बहुत मुश्किल हुई।
पार्ट A सबसे कठिन था: पार्टनरशिप और कंपनी खातों के सवालों में बहुत गहरे एडजस्टमेंट और भारी कैलकुलेशन थी।
लंबे न्यूमेरिकल सवाल: ज्यादातर 6-नंबर वाले सवालों के लिए बहुत ज्यादा 'वर्किंग नोट्स' बनाने पड़े, जिससे समय बहुत लगा।
उलझाने वाले MCQs: छोटे सवाल सीधे नहीं थे और उन्हें हल करने के लिए कई स्टेप्स करने पड़ते थे।
रटने पर जोर: पेपर ने छात्रों की जटिल फॉर्मेट और एक साथ कई एडजस्टमेंट्स याद रखने की क्षमता का परीक्षण किया।
MCQs और अभिकथन-कारण: काफी चुनौतीपूर्ण और करीबी विकल्पों वाले सवाल।
एडमिशन और रिटायरमेंट: इसमें 'Hidden Goodwill' और कैपिटल एडजस्टमेंट की जटिल गणनाएँ थीं।
कैश फ्लो स्टेटमेंट: इसमें पारंपरिक बैलेंस शीट फॉर्मेट का इस्तेमाल हुआ, लेकिन एडजस्टमेंट्स लंबे थे।
अनुपात विश्लेषण (Ratio Analysis): यह सीधे फॉर्मूला पर आधारित था लेकिन गणना मध्यम स्तर की थी।
छात्र अभ्यास के लिए नीचे दिए गए लिंक से आधिकारिक पेपर देख सकते हैं:
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प्रश्न पत्र (Question Paper) |
PDF डाउनलोड करें |
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अकाउंटेंसी क्वेश्चन पेपर 2025 सेट 1 |
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अकाउंटेंसी क्वेश्चन पेपर 2025 सेट 2 |
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अकाउंटेंसी क्वेश्चन पेपर 2025 सेट 3 |
2025 के मुकाबले 2026 का पेपर अधिक संतुलित था। विशेषज्ञों ने इसे "छात्र-अनुकूल" बताया क्योंकि इसमें रटने के बजाय तर्क (Logic) पर ज्यादा ध्यान दिया गया था।
मध्यम कठिनाई स्तर: पेपर काफी हद तक आधिकारिक सैंपल पेपर के पैटर्न पर आधारित था।
योग्यता-आधारित सवाल: करीब 50% पेपर में यह परखा गया कि छात्र अकाउंटिंग नियमों को वास्तविक स्थितियों में कैसे लागू करते हैं।
पैराग्राफ-आधारित कैश फ्लो: एक बड़ा बदलाव देखा गया जहाँ 'Cash Flow' का सवाल टेबल के बजाय एक पैराग्राफ के रूप में दिया गया था।
आसान कैलकुलेशन: हालाँकि पेपर में गणना तो थी, लेकिन नंबर 2025 के मुकाबले थोड़े आसान थे।
सेक्शन A (Partnership): इसमें केवल बड़े लेजर बनाने के बजाय जर्नल एंट्री (Journal Entries) पूछने पर अधिक ध्यान दिया गया।
सेक्शन B (Financial Analysis): यह स्कोरिंग हिस्सा रहा और इसमें अनुपात (Ratio) के सीधे सवाल आए।
MCQs: इसमें वित्तीय डेटा की समझ और तार्किक सोच की जरूरत थी।
केस स्टडी: ये सीधे NCERT के उदाहरणों पर आधारित थे।
प्रश्न पत्र बोर्ड के दिशा-निर्देशों के अनुसार तैयार किया गया था और इसका प्रारूप (Format) नीचे दिया गया है:
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प्रश्न का प्रकार |
प्रश्नों की संख्या |
प्रति प्रश्न अंक |
कुल अंक |
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बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQs) |
20 |
1 |
20 |
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लघु उत्तरीय प्रश्न I (Short Answer Type I) |
6 |
3 |
18 |
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लघु उत्तरीय प्रश्न II (Short Answer Type II) |
3 |
4 |
12 |
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दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (Long Answer Type) |
5 |
6 |
30 |
नया ट्रेंड समझने के लिए छात्र यहाँ से पेपर डाउनलोड कर सकते हैं:
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प्रश्न पत्र (Question Paper) |
PDF डाउनलोड करें |
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अकाउंटेंसी क्वेश्चन पेपर 2026 सेट 1 |
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अकाउंटेंसी क्वेश्चन पेपर 2026 सेट 2 |
[Update जल्द होगा] |
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अकाउंटेंसी क्वेश्चन पेपर 2026 सेट 3 |
[Update जल्द होगा] |
2025 का पेपर स्पीड और कैलकुलेशन का टेस्ट था, जबकि 2026 का पेपर कॉन्सेप्ट और समझ का टेस्ट था।
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विशेषता (Feature) |
2025 का विश्लेषण |
2026 का विश्लेषण |
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सवालों का तरीका |
पारंपरिक और कैलकुलेशन प्रधान |
योग्यता-आधारित और विश्लेषणात्मक |
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कैश फ्लो का फॉर्मेट |
बैलेंस शीट पर आधारित |
पैराग्राफ/कहानी के रूप में |
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पार्टनरशिप पर फोकस |
लेजर अकाउंट और बैलेंस शीट |
जर्नल एंट्री और वैचारिक MCQs |
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छात्रों की प्रतिक्रिया |
"बहुत लंबा और तनावपूर्ण" |
"संतुलित लेकिन सतर्क रहने की जरूरत" |
यह तुलना दिखाती है कि CBSE अब रटने वाली पढ़ाई के बजाय छात्रों की विषय पर गहरी समझ को ज्यादा महत्व दे रहा है।