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JEE Main 2026 गणित पाठ्यक्रम और अध्याय अनुसार हाई वेटेज की पूरी जानकारी

JEE Main 2026 गणित सिलेबस में एलजेब्रा, कैल्कुलस, कोऑर्डिनेट ज्योमेट्री, वेक्टर एलजेब्रा और त्रिकोणमिति जैसे प्रमुख भाग शामिल हैं। छात्र चैप्टर-वाइज वेटेज के आधार पर तैयारी शुरू कर सकते हैं।
authorImagePriyanka Yadav11 Jun, 2026
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JEE Main 2026 गणित पाठ्यक्रम और अध्याय अनुसार हाई वेटेज की पूरी जानकारी

 

JEE Main के गणित सिलेबस में एलजेब्रा, कैल्कुलस, कोऑर्डिनेट ज्योमेट्री, त्रिकोणमिति और वेक्टर एलजेब्रा जैसे महत्वपूर्ण टॉपिक्स शामिल होते हैं। गणित ऐसा विषय है जिसमें अच्छे अंक लाकर छात्र अपना पर्सेंटाइल काफी बेहतर कर सकते हैं। इसलिए छात्रों के लिए यह समझना जरूरी है कि सिलेबस में कौन-से चैप्टर ज्यादा महत्वपूर्ण हैं और किन टॉपिक्स से ज्यादा प्रश्न पूछे जाते हैं।

अगर छात्र शुरुआत से ही चैप्टर-वाइज वेटेज और पिछले वर्षों के ट्रेंड को समझकर पढ़ाई करते हैं, तो उनकी तैयारी ज्यादा सही दिशा में होती है और रिवीजन भी आसान हो जाता है। 

JEE Main Maths Syllabus 2026 की पूरी जानकारी 

JEE Main 2026 के गणित सिलेबस में एलजेब्रा, कैलकुलस और ज्योमेट्री के कई महत्वपूर्ण बुनियादी और उन्नत टॉपिक्स शामिल होते हैं। इस विषय के माध्यम से छात्रों की तर्क शक्ति, समझ और सवालों को सही तरीके से हल करने की क्षमता को परखा जाता है। आमतौर पर गणित का सिलेबस हर साल लगभग समान रहता है, इसलिए छात्र पिछले साल के सिलेबस को देखकर भी अपनी तैयारी सही दिशा में शुरू कर सकते हैं।

सेट, रिलेशन और फंक्शन : इस भाग में सेट (समुच्चय) की मूल अवधारणा और उन्हें दर्शाने के तरीके पढ़ाए जाते हैं। इसमें सेट का यूनियन, इंटरसेक्शन और कॉम्प्लिमेंट तथा उनके बीजीय गुण शामिल हैं। साथ ही पावर सेट, रिलेशन और उनके प्रकार, इक्विवेलेंस रिलेशन तथा फंक्शन जैसे वन-वन, इनटू, ऑनटू और फंक्शन का कंपोजिशन भी पढ़ाया जाता है।

कॉम्प्लेक्स नंबर और क्वाड्रैटिक इक्वेशन: इस भाग में कॉम्प्लेक्स नंबर की अवधारणा पढ़ाई जाती है, जिसमें उन्हें a+ib के रूप में लिखना और आर्गैंड डायग्राम में दिखाना शामिल है। साथ ही कॉम्प्लेक्स नंबर का बीजगणित, उनका मॉड्यूलस और आर्गुमेंट समझाया जाता है। इसके अलावा रियल और कॉम्प्लेक्स नंबर सिस्टम में क्वाड्रैटिक इक्वेशन, उनके हल, रूट्स और कोएफिशिएंट के बीच संबंध तथा दिए गए रूट्स से नई क्वाड्रैटिक इक्वेशन बनाना भी शामिल होता है।

मैट्रिक्स और डिटरमिनेंट्स : इस भाग में मैट्रिक्स की मूल अवधारणा, मैट्रिक्स के प्रकार और मैट्रिक्स से जुड़े बीजगणितीय ऑपरेशन पढ़ाए जाते हैं। साथ ही दो और तीन क्रम के डिटरमिनेंट, उनका मान निकालना और डिटरमिनेंट की मदद से त्रिभुज का क्षेत्रफल निकालना शामिल है। इसके अलावा स्क्वायर मैट्रिक्स का एडजॉइंट और इनवर्स तथा मैट्रिक्स की सहायता से दो या तीन चर वाले रैखिक समीकरणों का हल भी पढ़ाया जाता है।

परम्यूटेशन और कॉम्बिनेशन : इस टॉपिक में गिनती के मूल सिद्धांत, परम्यूटेशन और कॉम्बिनेशन की अवधारणा समझाई जाती है। साथ ही P(n,r) और C(n,r) का अर्थ और इनके सरल अनुप्रयोग भी शामिल होते हैं।

बाइनोमियल प्रमेय और इसके सरल अनुप्रयोग : इस भाग में धनात्मक पूर्णांक घात के लिए बाइनोमियल प्रमेय पढ़ाया जाता है। इसमें विस्तार का सामान्य पद (General Term), मध्य पद (Middle Term) और इससे जुड़े कुछ आसान सवालों के अनुप्रयोग शामिल होते हैं।

अनुक्रम और श्रेणी (Sequence and Series) : इस टॉपिक में अंकगणितीय प्रगति (AP) और ज्यामितीय प्रगति (GP) की अवधारणा समझाई जाती है। साथ ही दो संख्याओं के बीच अंकगणितीय और ज्यामितीय माध्य निकालना तथा A.M और G.M के बीच संबंध भी पढ़ाया जाता है।

लिमिट, कंटिन्यूटी और डिफरेंशिएबिलिटी : इस भाग में रियल वैल्यू वाले फंक्शन और उनका अलजेब्रा पढ़ाया जाता है, जैसे पॉलीनोमियल, रैशनल, ट्रिगोनोमेट्रिक, लॉगरिदमिक और एक्सपोनेंशियल फंक्शन। साथ ही इनवर्स फंक्शन और सरल फंक्शन के ग्राफ भी समझाए जाते हैं। इसमें लिमिट, कंटिन्यूटी और डिफरेंशिएशन की अवधारणा के साथ दो फंक्शन के जोड़, घटाव, गुणा और भाग का डिफरेंशिएशन शामिल है। इसके अलावा ट्रिगोनोमेट्रिक, लॉगरिदमिक, एक्सपोनेंशियल, कंपोजिट और इंप्लिसिट फंक्शन के डेरिवेटिव तथा उनके अनुप्रयोग जैसे परिवर्तन की दर, बढ़ते-घटते फंक्शन और मैक्सिमा-मिनिमा भी पढ़ाए जाते हैं।

इंटीग्रल कैलकुलस : इस भाग में इंटीग्रल को एंटी-डेरिवेटिव के रूप में समझाया जाता है। इसमें अलजेब्रिक, ट्रिगोनोमेट्रिक, एक्सपोनेंशियल और लॉगरिदमिक फंक्शनों से जुड़े फंडामेंटल इंटीग्रल शामिल होते हैं। साथ ही सब्स्टिट्यूशन, पार्ट्स और पार्शियल फ्रैक्शन जैसी विधियों से इंटीग्रेशन करना सिखाया जाता है। त्रिकोणमितीय आइडेंटिटी की मदद से भी कुछ विशेष प्रकार के इंटीग्रल हल किए जाते हैं, जैसे 

∫ dx / (x² + a²),

∫ dx / (x² ± a²),

∫ dx / (a² − x²),

∫ dx / √(a² − x²),

∫ dx / (ax² + bx + c),

∫ dx / √(ax² + bx + c),

∫ (px + q) dx / (ax² + bx + c),

 ∫ (px + q) dx / √(ax² + bx + c),

JEE Main 2026 Maths – अध्यायानुसार अंक वितरण तुलना

∫ √(a² ± x²) dx,

 ∫ √(x² − a²) dx 

इसके अलावा कैलकुलस का मूलभूत प्रमेय, निश्चित इंटीग्रल के गुण, निश्चित इंटीग्रल का मान निकालना और सरल कर्व्स से घिरे क्षेत्रों का क्षेत्रफल (एरिया) निकालना भी इस टॉपिक में शामिल है।

डिफरेंशियल इक्वेशन : इस भाग में साधारण डिफरेंशियल इक्वेशन की मूल अवधारणा पढ़ाई जाती है। इसमें डिफरेंशियल इक्वेशन का ऑर्डर और डिग्री समझना, वेरिएबल्स को अलग करके समीकरण हल करना और होमोजेनियस तथा लीनियर डिफरेंशियल इक्वेशन के हल निकालने के तरीके शामिल होते हैं। जैसे dy/dx + p(x)·y = q(x)

कोऑर्डिनेट ज्योमेट्री : इस भाग में कार्टेशियन कोऑर्डिनेट सिस्टम, डिस्टेंस और सेक्शन फ़ॉर्मूला, रेखा की ढाल (स्लोप) तथा पैरेलल और परपेंडिकुलर लाइनों की अवधारणा पढ़ाई जाती है। साथ ही स्ट्रेट लाइन के विभिन्न समीकरण, दो लाइनों के बीच कोण और बिंदु से रेखा की दूरी शामिल हैं। इसके अलावा सर्कल और कोनिक सेक्शन जैसे पैराबोला, एलिप्स और हाइपरबोला के मानक समीकरण भी पढ़ाए जाते हैं।

थ्री-डाइमेंशनल ज्योमेट्री : इस टॉपिक में स्पेस में किसी बिंदु के निर्देशांक, दो बिंदुओं के बीच दूरी और सेक्शन  फ़ॉर्मूला पढ़ाया जाता है। साथ ही डायरेक्शन रेश्यो, डायरेक्शन कोसाइन, दो रेखाओं के बीच कोण, रेखा का समीकरण और स्क्यू लाइनों के बीच सबसे कम दूरी जैसी अवधारणाएँ भी शामिल होती हैं।

वेक्टर अलजेब्रा : इस भाग में वेक्टर और स्केलर की मूल अवधारणा समझाई जाती है। इसमें वेक्टर का जोड़, दो और तीन आयामों में वेक्टर के घटक तथा स्केलर प्रोडक्ट और वेक्टर प्रोडक्ट जैसे महत्वपूर्ण टॉपिक्स शामिल होते हैं।

स्टैटिस्टिक्स और प्रोबेबिलिटी :  इस भाग में डेटा के फैलाव (डिस्पर्शन) को मापने के तरीके पढ़ाए जाते हैं। इसमें ग्रुप्ड और अनग्रुप्ड डेटा के लिए मीन, मीडियन, मोड, स्टैंडर्ड डेविएशन, वेरिएंस और मीन डेविएशन निकालना शामिल है। प्रोबेबिलिटी में किसी इवेंट की संभावना, एडिशन और मल्टिप्लिकेशन थ्योरम, बे के थ्योरम और रैंडम वेरिएबल का प्रोबेबिलिटी वितरण भी पढ़ाया जाता है।

ट्रिगोनोमेट्री :  इस टॉपिक में ट्रिगोनोमेट्रिक आइडेंटिटी, ट्रिगोनोमेट्रिक फंक्शन और इनवर्स ट्रिगोनोमेट्रिक फंक्शन के गुण और उनके अनुप्रयोग पढ़ाए जाते हैं।

JEE Main 2026 – गणित: हाई-वेटेज चैप्टर्स (पूर्व पेपर आधारित अनुमान)

पूर्व पेपर्स के आधार पर 3D ज्योमेट्री, मैट्रिसेस & डिटरमिनेंट्स, डिफरेंशियल इक्वेशन और बाइनोमियल प्रमेय सबसे अधिक महत्वपूर्ण हैं। इन पर ध्यान देने से लगभग आधे पेपर के सवाल हल किए जा सकते हैं। बाकी चैप्टर्स मध्यम या कम वेटेज वाले हैं, जिनका हल्का revision पर्याप्त रहेगा।

 

अध्याय

पिछली सालों में सवालों की अनुमानित संख्या

महत्व / weightage

थ्री-डाइमेंशनल ज्योमेट्री

बिंदु के निर्देशांक, दूरी, सेक्शन फ़ॉर्मूला, रेखा और स्क्यू लाइन के समीकरण, दिशा अनुपात और दिशा कोसाइन

उच्च (लगभग 18–20%)

मैट्रिसेस और डिटरमिनेंट्स

मैट्रिक्स प्रकार, ऑपरेशन, 2×2 और 3×3 डिटरमिनेंट, एडजॉइंट, इनवर्स, रैखिक समीकरण का हल

उच्च (लगभग 16–18%)

डिफरेंशियल इक्वेशन

साधारण डिफरेंशियल इक्वेशन, ऑर्डर और डिग्री, अलग करने योग्य और लीनियर/होमोजेनियस हल

उच्च (लगभग 12–14%)

बाइनोमियल प्रमेय

धनात्मक पूर्णांक घात के लिए बाइनोमियल विस्तार, सामान्य पद, मध्य पद, सरल अनुप्रयोग

मध्यम-उच्च (लगभग 10–12%)

 

JEE Main 2026: गणित के हाई-वेटेज चैप्टर्स की तैयारी कैसे करें

JEE Main परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए हाई-वेटेज चैप्टर्स की पहचान करना बहुत ज़रूरी है। ये वही चैप्टर्स हैं जो परीक्षा में अच्छे अंक दिलाने में सबसे ज्यादा मदद करते हैं। नीचे दी गई जानकारी से आप समझ पाएंगे कि गणित के इन महत्वपूर्ण अध्यायों की तैयारी कैसे करनी चाहिए और किस प्रकार अपनी रणनीति बनाकर स्कोर बढ़ाया जा सकता है।

  • मुख्य चैप्टर्स पर फोकस करें: 3D ज्योमेट्री, मैट्रिसेस & डिटरमिनेंट्स, डिफरेंशियल इक्वेशन और बाइनोमियल प्रमेय को पहले तैयार करें।

  • कंसिस्टेंट प्रैक्टिस: हर हाई-वेटेज चैप्टर से रोज़ाना हल करने की आदत डालें।

  • PYQs का अभ्यास: पिछले सालों के सवालों को देखकर सवालों का पैटर्न और अक्सर पूछे जाने वाले टॉपिक्स समझें।

  • कॉनसेप्ट क्लियर करें: हर फॉर्मूला और थ्योरी को समझकर याद करें, सिर्फ रटे नहीं।

  • टाइम मैनेजमेंट सीखें: कठिन चैप्टर्स के लिए समय निर्धारित करें और मॉक टेस्ट में लागू करें।

  • रिविजन और नोट्स: छोटी-छोटी नोट्स बनाएं और नियमित रूप से revise करें ताकि परीक्षा में जल्दी याद आ सके।

 

JEE Main 2026 Ganit Pathyakram FAQs

JEE Main 2026 me kaunse Maths ke chapters high weightage ke liye jane jate hain?

हाई-वेटेज चैप्टर्स में त्रिआयामी ज्यामिति (3D Geometry), मैट्रिसेस और डिटरमिनेंट्स (Matrices & Determinants), डिफरेंशियल इक्वेशन (Differential Equations) और द्विपद प्रमेय (Binomial Theorem) शामिल हैं। इन पर अच्छे से तैयारी करने से परीक्षा में अधिक अंक हासिल किए जा सकते हैं।

High weightage chapters ki tayari kaise shuru karein?

सबसे पहले इन चैप्टर्स को पहचानें। उसके बाद कॉन्सेप्ट क्लियर करें, सभी फॉर्मूला और थ्योरी समझें। पिछले सालों के सवालों का अभ्यास (PYQs) करें और मॉक टेस्ट में इनका अभ्यास करके समय प्रबंधन सीखें।

Low aur medium weightage chapters ko kaise handle karein?

हाई-वेटेज चैप्टर्स के बाद लो और मीडियम वेटेज चैप्टर्स का हल्का-फुल्का रिविजन करें। इससे आपका ओवरऑल स्कोर बढ़ता है और किसी भी सरप्राइज सवाल का सामना आसानी से किया जा सकता है।

Revision ka best tariqa kya hai?

छोटी-छोटी नोट्स बनाएं, जिसमें सभी फॉर्मूला, महत्वपूर्ण पॉइंट्स और बार-बार आने वाले सवाल शामिल हों। नियमित रूप से इन नोट्स को दोहराएँ ताकि परीक्षा के समय सब आसानी से याद रहे।
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