NEET UG 2026 परीक्षा में शामिल होने वाले सभी छात्रों के मन में इस समय एक ही बड़ा सवाल घूम रहा है कि इस साल का पेपर आसान था या कठिन? परीक्षा देकर बाहर निकले छात्रों और विशेषज्ञों से बातचीत के बाद यह साफ हो गया है कि NEET UG 2026 का ओवरऑल पेपर 'मॉडरेट' यानी मध्यम स्तर का रहा । पेपर न तो बहुत ज्यादा आसान था और न ही बहुत कठिन। हालांकि, हर विषय का स्तर अलग था, जिसने छात्रों की समय प्रबंधन कौशल की कड़ी परीक्षा ली।
NEET UG 2026 परीक्षा देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में से एक है। इस साल भी लाखों छात्रों ने डॉक्टर बनने के अपने सपने को पूरा करने के लिए जी-जान से मेहनत की और परीक्षा दी। परीक्षा केंद्र से बाहर निकलते ही छात्रों के चेहरों पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। कुछ छात्र खुश थे कि बायोलॉजी का सेक्शन बहुत आसान आया, तो वहीं कुछ छात्र फिजिक्स के लंबे-चौड़े सवालों को देखकर थोड़े परेशान नजर आए।
अगर हम पिछले कुछ सालों के ट्रेंड से इसकी तुलना करें, तो NEET UG 2026 का पेपर पैटर्न में बहुत ज्यादा बदलाव नहीं देखा गया, लेकिन सवालों को पूछने का तरीका थोड़ा पेचीदा था। इसका सीधा सा मतलब यह है कि जिन छात्रों ने केवल रट्टा मारा था, उन्हें परीक्षा में काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ा। वहीं, जिन छात्रों ने हर एक कॉन्सेप्ट को गहराई से समझा था और NCERT की किताबों से पढाई की थी वे काफी अच्छे नंबरों की उम्मीद कर रहे हैं। इस साल कोचिंग एक्सपर्ट्स का भी यही मानना है कि पेपर का डिजाइन छात्रों की तार्किक क्षमता (logical thinking) को जांचने के लिए किया गया था।
NEET UG 2026 की परीक्षा को बेहतर तरीके से समझने के लिए हमें इसके तीनों मुख्य विषयों यानी फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी का अलग-अलग विश्लेषण करना होगा। हर विषय का अपना एक अलग स्तर रहा , जो छात्रों के ओवरऑल स्कोर को प्रभावित करेगा ।
इस साल का सबसे कठिन और समय लेने वाला सेक्शन फिजिक्स ही रहा। परीक्षा देकर आए अधिकतर छात्रों का कहना था कि फिजिक्स का स्तर कठिन रहा । इसमें फॉर्मूला आधारित सीधे सवालों के बजाय पेचीदा न्यूमेरिकल और कॉन्सेप्ट-आधारित प्रश्न ज्यादा पूछे गए, जिससे कैलकुलेशन में काफी समय लगा।
मैकेनिक्स और इलेक्ट्रोडायनामिक्स से काफी गहरे सवाल पूछे गए थे।
कई सवाल ऐसे थे जिन्हें हल करने में काफी ज्यादा स्टेप्स लग रहे थे। इस वजह से छात्रों को टाइम मैनेजमेंट करने में बहुत दिक्कत आई और उनका काफी समय इसी सेक्शन में चला गया।
केमिस्ट्री का पेपर आसान से मध्यम स्तर का रहा। इसे हम बहुत ज्यादा कठिन नहीं कह सकते, लेकिन यह बिल्कुल सीधा भी नहीं था। जिन छात्रों की तीनों यानी आर्गेनिक, इनऑर्गेनिक और फिजिकल केमिस्ट्री पर अच्छी पकड़ थी, उन्होंने इसे आसानी से संभाल लिया।
इनऑर्गेनिक केमिस्ट्री में ज्यादातर सवाल सीधे NCERT की लाइनों से उठाकर पूछे गए थे, जिससे छात्रों को बहुत राहत मिली। आर्गेनिक केमिस्ट्री में कुछ रिएक्शन मैकेनिज्म वाले सवाल थोड़े घुमावदार थे, लेकिन अगर किसी के बेसिक कॉन्सेप्ट्स क्लियर थे, तो उन्हें दिक्कत नहीं हुई।
फिजिकल केमिस्ट्री के कुछ न्यूमेरिकल्स में थोड़ी लंबी कैलकुलेशन थी, लेकिन वे फिजिक्स जितने कठिन नहीं थे।
बायोलॉजी का पेपर हमेशा की तरह इस बार भी काफी आसान था, जिससे छात्रों को बहुत मदद मिली। यह पूरा सेक्शन सबसे आसान और सबसे ज्यादा स्कोरिंग रहा। बॉटनी और जूलॉजी दोनों में ही लगभग सभी प्रश्न पूरी तरह NCERT पर आधारित थे, जिन्हें छात्रों ने बहुत जल्दी हल कर लिया।
स्टेटमेंट वाले (Assertion and Reason) और मैचिंग (Match the Following) वाले सवाल काफी संख्या में थे। ये सवाल दिखने में बड़े जरूर थे, लेकिन अगर आपने NCERT को ध्यान से पढ़ा है, तो इन्हें हल करना बेहद आसान था।
इस सेक्शन में कोई बड़ी चुनौती नहीं थी, बल्कि इसने छात्रों का काफी समय बचाया, जिसे वे फिजिक्स के सेक्शन में इस्तेमाल कर पाए।
NEET UG 2026 Exam के बाद अब सबके मन में यह सवाल है कि इस साल कट-ऑफ क्या रहने वाली है। चूंकि बायोलॉजी का पेपर काफी आसान था, इसलिए ज्यादातर छात्र इस सेक्शन में बहुत अच्छा स्कोर करेंगे। केमिस्ट्री भी औसत रही, जिसका मतलब है कि वहां भी स्कोर ठीक-ठाक रहेगा। सारा खेल फिजिक्स के सेक्शन पर आकर टिक जाता है। जिन छात्रों ने फिजिक्स में अच्छा प्रदर्शन किया है और निगेटिव मार्किंग से खुद को बचाया है, वे रेस में बहुत आगे निकल जाएंगे।
एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि इस साल की कट-ऑफ पिछले साल के मुकाबले लगभग आसपास ही रहेगी या उसमें मामूली बढ़त देखने को मिल सकती है, क्योंकि कुल मिलाकर पेपर संतुलित था। सरकारी मेडिकल कॉलेज में सीट पक्की करने के लिए छात्रों को एक अच्छे और सुरक्षित स्कोर की जरूरत होगी।
