देशभर के लाखों छात्र हर वर्ष MBBS, BDS और BAMS जैसे मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए NEET UG परीक्षा देते हैं। इसी बीच NITI Aayog की एक बैठक में मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया को अधिक समावेशी बनाने के उद्देश्य से 12वीं कक्षा के अंकों को भी प्रवेश प्रक्रिया में महत्व देने का सुझाव सामने आया। इसके बाद छात्रों और अभिभावकों के बीच यह चर्चा तेज हो गई कि क्या भविष्य में मेडिकल एडमिशन के नियम बदल सकते हैं।
हालांकि, 21 जून 2026 को आयोजित होने वाली NEET UG Re-Exam सहित वर्तमान प्रवेश प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं किया गया है और MBBS, BDS, BAMS सहित सभी मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए NEET UG ही अनिवार्य परीक्षा बनी हुई है।
हाल ही में आयोजित NITI Aayog की बैठक में शिक्षा, रोजगार और कौशल विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। इसी दौरान मेडिकल शिक्षा में प्रवेश प्रणाली को अधिक प्रभावी और समावेशी बनाने की आवश्यकता पर भी विचार-विमर्श हुआ।
बैठक में यह मुद्दा उठाया गया कि मेडिकल शिक्षा तक पहुंच को और व्यापक बनाने के लिए प्रवेश प्रक्रिया के विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की जा सकती है।
बैठक के दौरान कुछ विशेषज्ञों और प्रतिनिधियों ने सुझाव दिया कि मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए 12वीं कक्षा के अंकों को भी महत्व दिया जाना चाहिए। उनका तर्क था कि बोर्ड परीक्षा छात्रों के लंबे समय तक किए गए शैक्षणिक प्रदर्शन को दर्शाती है।
हालांकि, यह केवल एक प्रस्ताव है और फिलहाल इसे लेकर कोई आधिकारिक निर्णय नहीं लिया गया है। वर्तमान व्यवस्था के अनुसार MBBS, BDS, BAMS और अन्य मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश NEET UG के आधार पर ही किया जाता है।
बैठक में ग्रामीण क्षेत्रों और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्रों की चुनौतियों पर भी चर्चा की गई। कई छात्रों को महंगी कोचिंग और सीमित संसाधनों के कारण प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
इसी वजह से कुछ विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि प्रवेश प्रक्रिया में ऐसे छात्रों के लिए अधिक अवसर सुनिश्चित करने के उपायों पर विचार किया जाना चाहिए।
सरकार का फोकस शिक्षा प्रणाली को अधिक लचीला और छात्र-केंद्रित बनाने पर है। नई शिक्षा नीति (NEP) के तहत भी विद्यार्थियों को अधिक विकल्प और अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भविष्य में मेडिकल शिक्षा और प्रवेश प्रणाली को अधिक समावेशी बनाने के लिए विभिन्न मॉडल्स पर चर्चा जारी रह सकती है।
बैठक में युवाओं के कौशल विकास को लेकर भी महत्वपूर्ण चर्चा हुई। सरकार का उद्देश्य अधिक से अधिक युवाओं को रोजगारोन्मुख प्रशिक्षण प्रदान करना है ताकि वे आधुनिक उद्योगों की जरूरतों के अनुसार अपने कौशल को विकसित कर सकें।
प्रस्तावित योजना के तहत हर साल लगभग 5 लाख युवाओं को विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा गया है।
युवाओं को स्थानीय स्तर पर कौशल प्रशिक्षण उपलब्ध कराने के लिए प्रत्येक जिले में स्किल सेंटर स्थापित करने की योजना पर भी चर्चा हुई। इन केंद्रों के माध्यम से युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार से जुड़े प्रशिक्षण उपलब्ध कराए जाएंगे।
इस पहल से ग्रामीण और छोटे शहरों के युवाओं को अपने क्षेत्र में ही प्रशिक्षण प्राप्त करने का अवसर मिल सकेगा।
वर्तमान में MBBS, BDS, BAMS और अन्य मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए NEET UG ही एकमात्र मान्य और अनिवार्य प्रवेश परीक्षा है।
12वीं कक्षा के अंकों को आधार बनाने या मेडिकल प्रवेश प्रक्रिया में बदलाव को लेकर कोई आधिकारिक अधिसूचना जारी नहीं की गई है।
NITI Aayog की बैठक में इस विषय पर केवल सुझाव और चर्चा सामने आई है।
छात्रों को मेडिकल एडमिशन नियमों में बदलाव से जुड़ी अफवाहों पर भरोसा नहीं करना चाहिए।
NEET 2026 की तैयारी जारी रखना और केवल आधिकारिक अपडेट्स पर भरोसा करना ही सबसे सही विकल्प है।
