NEET 2026 SC ST Cutoff उन सभी उम्मीदवारों के लिए आवश्यक है जो इस साल सरकारी मेडिकल कॉलेजों में दाखिला लेना चाहते हैं। नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने परीक्षा के परिणाम और क्वालिफाइंग कटऑफ लिस्ट जारी कर दिए हैं। सरकारी कॉलेजों में सीट पाने के लिए छात्रों को क्वालिफाइंग मार्क्स से कहीं ज्यादा स्कोर करने की जरूरत होती है। आइए जानते हैं कि इस साल एससी और एसटी वर्ग के लिए सरकारी कॉलेजों की संभावित कटऑफ क्या रहने वाली है।
NTA की आधिकारिक नोटिफिकेशन के अनुसार, इस साल नीट क्वालिफाइंग अंकों में थोड़ी बढ़ोतरी देखी गई है। परीक्षा में शामिल होने वाले आरक्षित और सामान्य वर्ग के छात्रों के लिए न्यूनतम क्वालिफाइंग अंक नीचे दिए गए हैं:
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कैटेगरी |
न्यूनतम पर्सेंटाइल |
क्वालिफाइंग अंक सीमा |
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SC और ST |
40th Percentile |
177 से 212 अंक |
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सामान्य वर्ग (UR / EWS) |
50th Percentile |
213 से 715 अंक |
नोट: इसका सीधा मतलब यह है कि NEET 2026 काउंसलिंग प्रक्रिया में भाग लेने के लिए SC और ST वर्ग के उम्मीदवारों के पास कम से कम 177 अंक होने ही चाहिए। इससे कम अंक पाने वाले छात्र काउंसलिंग के लिए योग्य नहीं माने जाएंगे।
नीट परीक्षा सिर्फ पास करना और कम फीस वाले सरकारी मेडिकल कॉलेज में सीट पाना, दोनों अलग बातें हैं। सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सीटों की संख्या सीमित होने के कारण केवल क्वालिफाइंग कटऑफ हासिल करना पर्याप्त नहीं होता। बेहतर रैंक के लिए अधिक अंक प्राप्त करना जरूरी होता है। एक्सपर्ट्स और पिछले रुझानों के आधार पर, NEET 2026 SC ST Cutoff का संभावित सुरक्षित स्कोर नीचे सारणी में दिया जा रहा है l
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कैटेगरी |
MBBS के लिए संभावित सुरक्षित स्कोर |
BDS के लिए संभावित सुरक्षित स्कोर |
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SC (अनुसूचित जाति) |
450+ अंक |
440+ अंक |
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ST (अनुसूचित जनजाति) |
425+ अंक |
410+ अंक |
यदि आप एससी या एसटी वर्ग से हैं, तो ऑल इंडिया कोटा (15% AIQ) के तहत सरकारी कॉलेज पाने के लिए आपका स्कोर इस सीमा में होना चाहिए। हालांकि, अलग-अलग राज्यों के अपने राज्य कोटा (85%) में यह कटऑफ थोड़ी कम भी जा सकती है।
NEET 2026 में सरकारी मेडिकल कॉलेज की कटऑफ हर वर्ष एक जैसी नहीं रहती। यह कई महत्वपूर्ण कारकों के आधार पर तय होती है। यदि आप SC या ST वर्ग से हैं, तो इन बातों को समझना आपके लिए जरूरी है।
परीक्षा का कठिनाई स्तर: यदि प्रश्नपत्र कठिन होता है, तो अधिकतर छात्रों के अंक कम आते हैं और कटऑफ नीचे जा सकती है। वहीं, आसान पेपर होने पर कटऑफ बढ़ने की संभावना रहती है।
कुल अभ्यर्थियों की संख्या: जितने अधिक उम्मीदवार परीक्षा में शामिल होते हैं और क्वालिफाई करते हैं, सरकारी मेडिकल कॉलेजों में प्रतिस्पर्धा उतनी ही बढ़ जाती है। इससे कटऑफ पर भी असर पड़ता है।
उपलब्ध MBBS सीटें: हर साल मेडिकल कॉलेजों और MBBS सीटों की संख्या में बदलाव हो सकता है। यदि सीटें बढ़ती हैं, तो कुछ मामलों में कटऑफ पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है, जबकि सीमित सीटों के कारण प्रतिस्पर्धा बनी रहती है।
AIQ और State Quota: 15% ऑल इंडिया कोटा (AIQ) और 85% स्टेट कोटा की काउंसलिंग अलग-अलग होती है। AIQ में पूरे देश के उम्मीदवार प्रतिस्पर्धा करते हैं, इसलिए इसकी कटऑफ आमतौर पर अधिक रहती है। वहीं, स्टेट कोटा की कटऑफ संबंधित राज्य की काउंसलिंग और उपलब्ध सीटों के अनुसार अलग हो सकती है।
पिछले वर्षों की कटऑफ: NEET 2026 की संभावित कटऑफ का अनुमान लगाने के लिए पिछले वर्षों के कटऑफ ट्रेंड का भी विश्लेषण किया जाता है। हालांकि, अंतिम कटऑफ हर वर्ष परीक्षा के स्तर, उम्मीदवारों के प्रदर्शन और काउंसलिंग प्रक्रिया के आधार पर बदल सकती है
परीक्षा पास करने के बाद अगला कदम काउंसलिंग का होता है। SC और ST वर्ग के उम्मीदवारों को यह ध्यान रखना चाहिए कि काउंसलिंग दो स्तरों पर होती है:
15% ऑल इंडिया कोटा (AIQ): इसके तहत आप देश के किसी भी सरकारी मेडिकल कॉलेज में प्रवेश के लिए पात्र हो सकते हैं। इसके लिए आपको NEET 2026 SC ST Cutoff के सुरक्षित स्कोर (425 से 450+) की आवश्यकता होगी।
85% स्टेट कोटा: इसके तहत आप अपने ही राज्य के सरकारी कॉलेजों में दाखिला ले सकते हैं। राज्य के अनुसार स्टेट कोटा की कटऑफ अलग-अलग हो सकती है और कई राज्यों में यह AIQ की तुलना में कम रहती है।