NEET UG परीक्षा में पेपर लीक से जुड़े विवादों के बाद राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) परीक्षा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए नई तकनीकों पर विचार कर रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, एजेंसी Algorithm-Based Question Bank System अपनाने की संभावना पर काम कर रही है। इस व्यवस्था का उद्देश्य प्रश्नपत्र तैयार करने और उसके चयन की प्रक्रिया को अधिक सुरक्षित, पारदर्शी और गोपनीय बनाना है। इसी बीच NEET UG 2026 Re-Exam 21 जून 2026 को आयोजित होना है।
NEET सहित विभिन्न राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में सुरक्षा को लेकर उठे सवालों के बाद NTA परीक्षा प्रक्रिया को तकनीक आधारित बनाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। इसी क्रम में एल्गोरिदम-ड्रिवन प्रश्न बैंक प्रणाली को एक संभावित समाधान के रूप में देखा जा रहा है।
इस प्रणाली का उद्देश्य प्रश्नपत्र तैयार करने और उसके चयन की प्रक्रिया में मानवीय हस्तक्षेप को कम करना तथा गोपनीयता को अधिक मजबूत बनाना है।
इस नई व्यवस्था में NTA विभिन्न विषयों के लाखों प्रश्नों का एक सुरक्षित डिजिटल प्रश्न बैंक तैयार कर सकती है। इन प्रश्नों को विषय, अध्याय और कठिनाई स्तर के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में रखा जाएगा।
इसके बाद एक विशेष कंप्यूटर सिस्टम (एल्गोरिदम) अपने आप प्रश्नों का चयन करेगा और प्रश्नपत्र तैयार करेगा। इससे प्रश्नपत्र बनाने की प्रक्रिया में लोगों की भूमिका कम हो जाएगी और गोपनीयता बढ़ेगी।
रिपोर्ट्स के अनुसार, परीक्षा के लिए अंतिम प्रश्नपत्र का चयन परीक्षा के दिन या परीक्षा शुरू होने से कुछ समय पहले किया जा सकता है। क्योंकि सवालों का चयन पूरी तरह रैंडम तरीके से होगा, इसलिए पहले से यह पता लगाना मुश्किल होगा कि प्रश्नपत्र में कौन-कौन से प्रश्न आने वाले हैं।
माना जा रहा है कि इस तकनीक से प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनेगी तथा पेपर लीक जैसी घटनाओं की संभावना को कम करने में मदद मिल सकती है।
पिछले कुछ वर्षों में परीक्षा सुरक्षा और पेपर लीक से जुड़े मामलों ने परीक्षा एजेंसियों के सामने बड़ी चुनौती खड़ी की है। ऐसे में तकनीक आधारित समाधान अपनाने की आवश्यकता महसूस की जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि एल्गोरिदम-आधारित प्रश्नपत्र चयन प्रक्रिया से:
सुरक्षा स्तर मजबूत हो सकता है।
गोपनीयता बढ़ सकती है।
मानवीय हस्तक्षेप कम किया जा सकता है।
प्रश्नपत्र चयन को अधिक निष्पक्ष बनाया जा सकता है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, नई प्रणाली में प्रश्नपत्र का अंतिम चयन परीक्षा के दिन या परीक्षा शुरू होने से कुछ समय पहले एल्गोरिदम की मदद से किया जा सकता है।
इस व्यवस्था में प्रश्नपत्र पहले से तय होने के बजाय एक सुरक्षित डिजिटल प्रक्रिया के माध्यम से तैयार किया जा सकता है।
एल्गोरिदम उपलब्ध प्रश्न बैंक से निर्धारित मानकों के अनुसार स्वतः प्रश्नों का चयन करेगा।
इससे परीक्षा से पहले किसी व्यक्ति के लिए अंतिम प्रश्नपत्र की जानकारी प्राप्त करना काफी कठिन हो सकता है।
तकनीक आधारित यह प्रक्रिया प्रश्नपत्र तक अनधिकृत पहुंच की संभावना को कम करने में मदद कर सकती है।
माना जा रहा है कि इससे परीक्षा की गोपनीयता और सुरक्षा दोनों को मजबूत किया जा सकेगा।
हालांकि, इस पूरी व्यवस्था को लेकर NTA ने अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक दिशा-निर्देश या अंतिम प्रक्रिया जारी नहीं की है।
हाल के दिनों में सोशल मीडिया और विभिन्न ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर पेपर लीक से जुड़े कई दावे सामने आए हैं। NTA ने उम्मीदवारों को ऐसी अपुष्ट सूचनाओं और अफवाहों से सतर्क रहने की सलाह दी है। एजेंसी का कहना है कि परीक्षा से संबंधित जानकारी केवल आधिकारिक चैनलों के माध्यम से ही सत्यापित की जानी चाहिए। साथ ही परीक्षा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए निगरानी और नियंत्रण तंत्र को लगातार सुदृढ़ किया जा रहा है।
शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि तकनीक आधारित सुरक्षा उपाय परीक्षा प्रणाली को अधिक सुरक्षित और पारदर्शी बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। एल्गोरिदम-आधारित प्रश्न बैंक, डिजिटल मॉनिटरिंग और उन्नत सुरक्षा तंत्र जैसी व्यवस्थाएं भविष्य में प्रश्नपत्र सुरक्षा को मजबूत करने में मदद कर सकती हैं। हालांकि, किसी भी नई प्रणाली की सफलता उसके प्रभावी क्रियान्वयन, निगरानी और पारदर्शिता पर निर्भर करेगी। इसलिए आने वाले समय में NTA द्वारा उठाए जाने वाले कदमों पर छात्रों और अभिभावकों की विशेष नजर बनी रहेगी।
केवल NTA और अन्य आधिकारिक वेबसाइटों पर जारी अपडेट्स पर भरोसा करें।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रही अपुष्ट जानकारियों और अफवाहों से बचें।
परीक्षा की तैयारी पर ध्यान केंद्रित रखें और समय प्रबंधन का अभ्यास करें।
एडमिट कार्ड जारी होते ही उसे डाउनलोड करें और सभी विवरणों की जांच करें।
NTA की वेबसाइट और आधिकारिक नोटिस नियमित रूप से चेक करते रहें।
