21 जून 2026 को होने वाले NEET UG 2026 री-एग्जाम से पहले राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने देशभर के मेडिकल कॉलेजों और संस्थानों के लिए महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए हैं। आयोग ने कॉलेजों से परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए सतर्क रहने तथा 20 और 21 जून को, अपवादात्मक परिस्थितियों को छोड़कर, छात्रों को अवकाश न देने की सलाह दी है।
18 जून को जारी सार्वजनिक सूचना में NMC ने अपने अधीन सभी मेडिकल कॉलेजों और संस्थानों को शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग द्वारा जारी निर्देशों का सख्ती से पालन करने के लिए कहा है, ताकि NEET UG 2026 री-एग्जाम का निष्पक्ष और सुचारु आयोजन सुनिश्चित किया जा सके।

NMC ने कहा कि अतीत में कुछ मेडिकल छात्रों के परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता को प्रभावित करने वाली गतिविधियों में शामिल होने के मामले सामने आए थे। इसी कारण सभी संस्थानों को अतिरिक्त सतर्कता बरतने और यह सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है कि छात्र ऐसी किसी भी गतिविधि में शामिल न हों।
नोटिस में कहा गया है, "अतीत में ऐसे मामले सामने आए हैं, जिनमें मेडिकल कॉलेजों के कुछ छात्र ऐसी गतिविधियों में शामिल पाए गए, जो परीक्षा प्रक्रिया की पवित्रता और निष्पक्षता से समझौता कर सकती थीं।"
NMC का यह निर्देश 13 जून को उच्च शिक्षा सचिव डॉ. विनीत जोशी द्वारा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय को भेजे गए पत्र के बाद जारी किया गया। पत्र में NEET UG 2026 री-एग्जाम के निष्पक्ष और सुचारु आयोजन के लिए सभी संबंधित संस्थानों से सहयोग का अनुरोध किया गया था।
पत्र के अनुसार, 3 मई 2026 को आयोजित NEET UG 2026 परीक्षा अपरिहार्य परिस्थितियों के कारण रद्द कर दी गई थी और अब इसकी पुनर्परीक्षा 21 जून 2026 को आयोजित की जाएगी।
पत्र में पूर्व की उन घटनाओं का भी उल्लेख किया गया, जिनमें कुछ मेडिकल कॉलेजों के छात्र कथित रूप से परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित करने वाली गतिविधियों में शामिल पाए गए थे। इसलिए कॉलेजों से छात्रों को जागरूक करने और परीक्षा की निष्पक्षता बनाए रखने में सहयोग देने का अनुरोध किया गया है।
इसके अतिरिक्त, विभाग ने सलाह दी है कि 20 और 21 जून को छात्रों को केवल अपवादात्मक परिस्थितियों में ही अवकाश दिया जाए। इसका उद्देश्य संभावित दुरुपयोग को रोकना और परीक्षा का निष्पक्ष एवं व्यवस्थित संचालन सुनिश्चित करना है।
इन निर्देशों का उद्देश्य मेडिकल छात्रों पर किसी प्रकार का प्रतिबंध लगाना नहीं है, बल्कि परीक्षा की निष्पक्षता सुनिश्चित करना है। यदि किसी छात्र को अत्यावश्यक कारण से अवकाश की आवश्यकता हो, तो वह संस्थान के निर्धारित नियमों के अनुसार अनुमति प्राप्त कर सकता है।
