Re-NEET 2026 Result घोषित होने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा जिन नामों की हो रही है, उनमें आर्यन गुप्ता सबसे आगे हैं। पंजाब के लुधियाना के रहने वाले आर्यन ने 720 में से 715 अंक हासिल कर पूरे देश में संयुक्त AIR 1 प्राप्त की। हरियाणा के पांशुल बंसल ने भी समान अंक हासिल किए और दोनों इस वर्ष के Highest Scorers बने।
हालांकि, आर्यन की सफलता सिर्फ एक शानदार स्कोर तक सीमित नहीं है। परीक्षा रद्द होने के बाद फिर से तैयारी करना, मानसिक दबाव से बाहर निकलना और दोबारा उसी आत्मविश्वास के साथ परीक्षा देना उनकी इस उपलब्धि को और भी खास बनाता है।
आर्यन गुप्ता पंजाब के लुधियाना के निवासी हैं। उनकी प्रारंभिक शिक्षा सेक्रेड हार्ट कॉन्वेंट स्कूल से हुई। स्कूल के दिनों से ही वे पढ़ाई में लगातार अच्छा प्रदर्शन करते रहे। उन्होंने कक्षा 12वीं में 98.4 प्रतिशत अंक हासिल किए। पढ़ाई के साथ-साथ वे खेलों में भी सक्रिय रहे और स्टेट लेवल टेबल टेनिस खिलाड़ी के रूप में भी अपनी पहचान बनाई।
यह संतुलन बताता है कि उन्होंने केवल किताबों तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि अनुशासित जीवनशैली को भी अपनी तैयारी का हिस्सा बनाया।
इस वर्ष NEET परीक्षा को लेकर कई घटनाक्रम सामने आए। पहली परीक्षा रद्द होने की खबर ने लाखों छात्रों की तरह आर्यन को भी झकझोर दिया।
उन्होंने स्वीकार किया कि उस समय उन्हें लगा जैसे महीनों की मेहनत व्यर्थ हो गई हो। लेकिन उन्होंने निराशा को अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया।
उनके बड़े भाई ने उन्हें समझाया कि परिस्थितियां सभी के लिए समान हैं और दोबारा मिलने वाले अवसर का पूरा लाभ उठाना चाहिए। इसी सोच के साथ आर्यन ने खुद को संभाला और Re-NEET की तैयारी पहले से अधिक गंभीरता के साथ शुरू कर दी।
आर्यन की तैयारी का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा नियमितता थी।
उन्होंने प्रतिदिन लगभग 16 से 17 घंटे पढ़ाई की, लेकिन केवल घंटों पर भरोसा नहीं किया। उनका पूरा फोकस Concept Clear करने, NCERT को बार-बार पढ़ने और लगातार Revision पर रहा।
जब भी उन्हें थकान महसूस होती, वे थोड़ी देर का ब्रेक लेते, परिवार के साथ समय बिताते या मनोरंजन के लिए फिल्में देखते थे। उनका मानना है कि मानसिक रूप से शांत रहना भी अच्छी तैयारी का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
आर्यन ऐसे परिवार से आते हैं, जहां चिकित्सा सेवा पहले से ही जीवन का हिस्सा रही है।
उनके पिता डॉ. सचिन गुप्ता एनेस्थेटिस्ट हैं और उनकी मां डॉ. रीनू गुप्ता गायनेकोलॉजिस्ट हैं। वहीं उनके बड़े भाई भी मेडिकल शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं और पहले ही NEET में शानदार रैंक हासिल कर चुके हैं।
घर का यही वातावरण आर्यन को बचपन से प्रेरित करता रहा। परिवार का मार्गदर्शन और सहयोग उनकी तैयारी की सबसे बड़ी ताकत बना।
आर्यन का लक्ष्य सिर्फ MBBS करना नहीं है। वे आगे चलकर ऑन्कोलॉजिस्ट (Cancer Specialist) बनना चाहते हैं।
इसके पीछे एक व्यक्तिगत कारण भी है। बचपन में उन्होंने कैंसर के कारण अपनी दादी को खो दिया था। उसी घटना ने उनके मन में यह संकल्प पैदा किया कि भविष्य में वे कैंसर से जूझ रहे मरीजों के इलाज के क्षेत्र में काम करेंगे।
यही सपना उनकी मेहनत की सबसे बड़ी प्रेरणा बना।
आर्यन गुप्ता की सफलता यह साबित करती है कि किसी भी प्रतियोगी परीक्षा में केवल प्रतिभा ही पर्याप्त नहीं होती। कठिन परिस्थितियों में धैर्य बनाए रखना, अपनी रणनीति पर भरोसा करना और लगातार मेहनत करते रहना भी उतना ही जरूरी है।
परीक्षा रद्द होने के बाद उन्होंने हार मानने के बजाय उसे एक नई शुरुआत माना। यही सोच उन्हें देश के संयुक्त टॉपर्स की सूची तक लेकर पहुंची।