
किसी भी सेक्शन में केवल 7 अंक के साथ CAT की तैयारी शुरू करना किसी का भी आत्मविश्वास तोड़ सकता है। हरेंद्र कुमार शर्मा के लिए भी उनका पहला CAT प्रयास 81.1 पर्सेंटाइल पर समाप्त हुआ, जिसमें VARC उनका सबसे कमजोर सेक्शन था। लेकिन हार मानने के बजाय उन्होंने सही मार्गदर्शन के साथ अपनी तैयारी दोबारा शुरू करने का फैसला किया।
Physics Wallah ने हर कदम पर उनका साथ दिया और हरेंद्र ने CAT में कुल 99.05 पर्सेंटाइल हासिल किए, जिसमें VARC में 93.5 पर्सेंटाइल शामिल थे, वही सेक्शन जिसने कभी उनके स्कोर को सबसे ज्यादा प्रभावित किया था।
अपने पहले प्रयास में हरेंद्र के लिए VARC सबसे ज्यादा भ्रमित करने वाला और अप्रत्याशित सेक्शन था। वे प्रश्नों का प्रयास तो कर रहे थे, लेकिन सटीकता (Accuracy) की कमी थी।
"मैंने वहां पर 10 बजे कोशिश की थी और सारे गलत हो गए। बस सात स्कोर आया था मेरा।"
हालांकि उन्होंने पहले भी पढ़ाई की थी, लेकिन स्पष्टता की कमी के कारण VARC उन्हें हमेशा कठिन लगता था। यही वह मोड़ होता है जहां कई छात्र अपना आत्मविश्वास खो देते हैं, लेकिन हरेंद्र ने समस्या को नजरअंदाज करने के बजाय यह समझने का फैसला किया कि आखिर गलती कहां हो रही है।
अपने दूसरे प्रयास के दौरान हरेंद्र ने PW जॉइन किया, लेकिन जल्द ही उन्हें एक बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा। कॉलेज की फाइनल परीक्षाओं के कारण उनकी पढ़ाई में लगभग डेढ़ महीने का अंतराल आ गया और अभ्यास पूरी तरह रुक गया।
VARC के अंक फिर से गिरकर कभी-कभी केवल 4 या 5 रह जाते थे। घबराने के बजाय हरेंद्र ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया, उन्होंने मदद मांगी।
"फिर मैंने मेंटरशिप ली थी पीडब्लू पे। फिर उसमें उन्होंने कहा कि एक काम दोबारा से शुरू करो। पिछले साल के प्रश्न देखो... पिछले साल और बेसिक से एक बार लेक्चर देख के देखो।"
जब हरेंद्र ने PW के साथ अपनी तैयारी दोबारा शुरू की, तो उन्हें लगा कि इस बार सब कुछ आसान होगा।
"सर, जब मैंने दोबारा शुरुआत की थी तो मुझे लगा कि सिलेबस तो लगभग पूरा ही चुका है, तो यह केक का एक टुकड़ा होगा।"
लेकिन जैसे ही उन्होंने दोबारा लेक्चर देखने शुरू किए, उन्हें एहसास हुआ कि VARC अभी भी उतना ही कमजोर है और पढ़ाई में आए लंबे अंतराल का असर उनकी बुनियाद (Fundamentals) पर साफ दिखाई दे रहा था।
PW के व्यवस्थित लेक्चर्स ने उन्हें बिना किसी जल्दबाजी के एक-एक कॉन्सेप्ट को फिर से समझने का मौका दिया।
"हाँ फिर मैंने वो देखे लेक्चर, अब तो कॉन्सेप्ट क्लियर होने लग गए।"
यहीं से सब कुछ बदलना शुरू हुआ। अब वे केवल उत्तरों का अनुमान नहीं लगाते थे, बल्कि यह समझने लगे कि कौन-सा विकल्प सही है और क्यों। जैसे-जैसे कॉन्सेप्ट स्पष्ट होते गए, उनका आत्मविश्वास बढ़ता गया और मॉक टेस्ट के स्कोर भी लगातार बेहतर होने लगे।
कॉलेज के अंतिम वर्ष की पढ़ाई और CAT की तैयारी को एक साथ संभालना आसान नहीं होता। ऐसे में बैकलॉग होना लगभग तय था। हरेंद्र ने केवल सिलेबस पूरा करने की जल्दबाजी नहीं की, बल्कि PW के रिकॉर्डेड लेक्चर्स की मदद से अपनी तैयारी को व्यवस्थित बनाए रखा।
"फिर बीच में फिर मैंने लेक्चर बैकलॉग वेगेरा लगे वो भी ख़तम किये। फिर लगा कि ट्रैक पर आ गया है।"
इस सुविधा की वजह से कोई भी टॉपिक अधूरा नहीं छूटा। मजबूत कॉन्सेप्ट्स और नियमित अभ्यास की बदौलत उन्होंने Quant में भी शानदार प्रदर्शन किया और 99.5 पर्सेंटाइल हासिल किए।
"तो डायरेक्शन मिला बेसिकली... मेंटरशिप से फ़ायदा हुआ।"
"अब तो कॉन्सेप्ट क्लियर हो गए थे, फिर स्केल होने लगेगा स्कोर।"
हरेंद्र बताते हैं कि जब भी उन्हें अपनी तैयारी को लेकर असमंजस होता था, PW की मेंटरशिप ने उन्हें सही दिशा दिखाई। बिना किसी रणनीति के इधर-उधर पढ़ने के बजाय उन्हें यह समझ आया कि किस पर ध्यान देना है और किस तरह आगे बढ़ना है। जैसे-जैसे उन्होंने सही दिशा में तैयारी जारी रखी, उनके Quant के कॉन्सेप्ट मजबूत होते गए और स्कोर लगातार बढ़ने लगा।
एक और बड़ा बदलाव तब आया जब हरेंद्र को एहसास हुआ कि LRDI में उनके खराब प्रदर्शन का कारण कॉन्सेप्ट नहीं, बल्कि परीक्षा के दौरान होने वाली घबराहट थी। PW की मेंटरशिप के दौरान उन्हें टाइमर लगाकर अभ्यास करने की सलाह दी गई।
"आखिरी बार मैंने एक और मेंटरशिप सेशन लिया था। उन्हें कहा था कि मुझे टाइमर के साथ प्रैक्टिस करनी चाहिए।"
"हर सेट को मैं लगभग 8 मिनट देता था। अगर 8 मिनट में हो जाता था तो बहुत अच्छा, नहीं होता था तो 2 मिनट एक्स्ट्रा दे देता था।"
इस टाइमर आधारित रणनीति ने उन्हें अनुशासित बनाया और एक सेट छोड़कर दूसरे सेट पर जाने की आदत खत्म कर दी। इससे परीक्षा के दबाव में भी शांत रहकर सोचने की क्षमता विकसित हुई, जिसका फायदा उन्हें CAT परीक्षा के दिन भी मिला।
हरेंद्र के अनुसार PW की सबसे बड़ी खासियत केवल पेड बैच नहीं थे, बल्कि छात्रों को लगातार मिलने वाला सहयोग था।
"पिछले साल तो एमबीए वाले ने हर महीने एक अलग से फ्री बैच शुरू किया था।"
लगातार उपलब्ध रहने वाले इन संसाधनों की वजह से तैयारी सुरक्षित महसूस होती थी। जब भी उनका आत्मविश्वास कम होता, उनके पास रिवीजन, प्रैक्टिस या मार्गदर्शन का कोई न कोई विकल्प हमेशा मौजूद रहता था।
जब आखिरकार CAT परीक्षा का दिन आया, तब तक हरेंद्र की मानसिकता पूरी तरह बदल चुकी थी।
"मुझे उस दिन ऐसा लगा कि मैं एक और मॉक दे रहा हूँ।"
यही शांत सोच उनके शानदार परिणामों में दिखाई दी। VARC में केवल 7 अंक से शुरुआत करने वाले हरेंद्र ने आखिरकार उसी सेक्शन में 93.5 पर्सेंटाइल और CAT में कुल 99.05 पर्सेंटाइल हासिल किए।
हरेंद्र की कहानी यह साबित करती है कि शुरुआती खराब स्कोर आपकी क्षमता तय नहीं करते। सफलता के लिए सबसे ज्यादा जरूरी है सही दिशा, निरंतर अभ्यास और उचित समय पर सही मार्गदर्शन। Physics Wallah की मदद से उन्होंने अपनी कमजोरियों को पहचाना, बुनियादी कॉन्सेप्ट्स को दोबारा मजबूत किया और कठिन परिस्थितियों में भी आत्मविश्वास बनाए रखा।
भविष्य के CAT अभ्यर्थियों को सलाह देते हुए हरेंद्र ने बेहद सरल लेकिन महत्वपूर्ण बात कही ।
"मैं यहीं बोलूंगा कि पहले लेक्चर पूरा करो और डीपीपी ठीक से लगाओ।"
उनके अनुसार जब लेक्चर्स और नियमित अभ्यास के माध्यम से कॉन्सेप्ट स्पष्ट होने लगते हैं, तो आत्मविश्वास अपने आप बढ़ जाता है।
उन्होंने यह भी बताया कि जब भी तैयारी के दौरान भ्रम की स्थिति बने, तो अकेले संघर्ष करने के बजाय मार्गदर्शन लेना चाहिए।
"जब भी लगता था कि अटक रहा हूँ, तो मैंने मेंटरशिप ली…उसे डायरेक्शन मिल जाती थी।"
हरेंद्र के लिए सफलता का मतलब एक साथ सब कुछ करना नहीं था। उनके अनुसार सफलता का रास्ता था, बेसिक्स को मजबूत करना, रोजाना अभ्यास करना और जरूरत पड़ने पर सही मार्गदर्शन लेना। आज CAT की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए उनकी यह यात्रा एक स्पष्ट संदेश देती है कि आपको यह सफर अकेले तय करने की जरूरत नहीं है। सही मार्गदर्शन के साथ आपकी तैयारी पूरी तरह बदल सकती है।