
CBSE कक्षा 12 भूगोल की बोर्ड परीक्षा 2025 और 2026 के बीच का तुलनात्मक विश्लेषण यह दर्शाता है कि शिक्षा प्रणाली अब रटने की पद्धति से हटकर योग्यता-आधारित (competency-based) मूल्यांकन की ओर बढ़ रही है। जहाँ 2025 का प्रश्नपत्र काफी सीधा और परिभाषाओं पर केंद्रित था, वहीं 2026 में विश्लेषणात्मक सोच, जटिल मानचित्र कार्य और समकालीन विषयों जैसे सतत विकास पर अधिक जोर दिया गया है। यह बदलाव छात्रों को विषय की गहरी समझ विकसित करने और उसे व्यावहारिक स्थितियों में लागू करने के लिए प्रोत्साहित करता है।
CBSE कक्षा 12 भूगोल की बोर्ड परीक्षा ह्यूमैनिटीज (Humanities) के छात्रों के कुल प्रदर्शन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। हर साल, पेपर NCERT पाठ्यक्रम का पालन करता है, लेकिन पूछे गए प्रश्नों के प्रकार के आधार पर कठिनाई का स्तर थोड़ा बदल सकता है।
2025 बनाम 2026 के विश्लेषण के माध्यम से, हम समग्र कठिनाई और खंड-वार रुझानों के संदर्भ में दोनों पेपरों की तुलना करते हैं। यह विश्लेषण भविष्य के उम्मीदवारों को उनकी तैयारी की रणनीति बनाने में मदद करेगा।
2025 और 2026 की तुलना से पता चलता है कि बोर्ड अब वैचारिक (Conceptual) और अनुप्रयोग-आधारित (Application-based) प्रश्नों की ओर झुक रहा है। जहाँ अंकों का वितरण समान है, वहीं स्रोत-आधारित प्रश्नों की जटिलता में वृद्धि हुई है।
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मापदंड (Parameter) |
2025 का पेपर |
2026 का पेपर |
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समग्र कठिनाई |
मध्यम (Moderate) |
मध्यम से कठिन (Tricky) |
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MCQs (खंड A) |
प्रत्यक्ष और तथ्य-आधारित |
वैचारिक और कथन-आधारित |
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स्रोत-आधारित (खंड B) |
संतुलित |
विश्लेषणात्मक और विस्तृत |
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लघु उत्तरीय (खंड C) |
NCERT पर केंद्रित |
अनुप्रयोग-उन्मुख (Application-oriented) |
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दीर्घ उत्तरीय (खंड D) |
सीधे और सरल |
बहुआयामी (Multi-dimensional) |
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मानचित्र कार्य (खंड E) |
आसानी से पहचानने योग्य |
सटीक और विशिष्ट जानकारी आधारित |
खंड A (MCQs): 2026 में प्रश्न सीधे तथ्यों के बजाय 'कथन और कारण' (Assertion-Reason) वाले अधिक रहे हैं, जिससे छात्रों की तार्किक क्षमता की जाँच होती है।
खंड B (Source-based): 2026 में केस स्टडीज अधिक विश्लेषणात्मक हो गई हैं, जिसके लिए पाठ्यपुस्तक के गहन अध्ययन की आवश्यकता है।
मानचित्र कार्य (Map Work): 2025 की तुलना में 2026 में मानचित्र पर स्थानों को चिन्हित करना अधिक विशिष्ट और सूक्ष्म (Precise) जानकारी की मांग करता है।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न: अब उत्तर केवल एक पहलू पर नहीं, बल्कि विषय के सामाजिक, आर्थिक और पर्यावरणीय जैसे कई आयामों को जोड़ने पर केंद्रित हैं।
2026 का पेपर थोड़ा अधिक चुनौतीपूर्ण था क्योंकि इसमें भौगोलिक अवधारणाओं की गहरी समझ की आवश्यकता थी। 2025 बनाम 2026 की समीक्षा यह दर्शाती है कि बोर्ड अब योग्यता-आधारित परीक्षण (Competency-based testing) की ओर बढ़ रहा है।
पेचीदा कथन-कारण (Assertion-Reason) प्रश्न: खंड A में जटिल कथन शामिल थे जिन्होंने छात्रों के तर्क की परीक्षा ली।
लंबा स्रोत विश्लेषण: खंड B के स्रोत-आधारित प्रश्नों के लिए पंक्तियों के बीच छिपे अर्थ (Reading between the lines) को समझना आवश्यक था।
विशिष्ट मानचित्र आवश्यकताएँ: मानचित्र कार्य में छोटे बंदरगाहों और औद्योगिक क्षेत्रों के बहुत सटीक स्थानों की मांग की गई थी।
2026 के रुझान ने पाठ्यक्रम के "मानव भूगोल" और "अर्थशास्त्र" भागों पर स्पष्ट ध्यान दिखाया।
खंड A (MCQs): इसमें "मिलान करें" (Match the Following) और "सही क्रम" (Correct Sequence) वाले प्रश्नों का अधिक उपयोग किया गया।
खंड C (लघु उत्तरीय): सतत विकास जैसे समकालीन मुद्दों पर केंद्रित।
खंड E (मानचित्र कार्य): परिवहन मार्गों की अधिक तकनीकी पहचान शामिल थी।
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प्रश्न पत्र (2026) |
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CBSE कक्षा 12 भूगोल सेट 1 |
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CBSE कक्षा 12 भूगोल सेट 2 |
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CBSE कक्षा 12 भूगोल सेट 3 |
2025 की सीबीएसई कक्षा 12 भूगोल परीक्षा का रुझान एक पारंपरिक परीक्षा पैटर्न पर आधारित था।
खंड A (MCQs): यह मुख्य रूप से परिभाषाओं और सरल पहचान (Identification) पर केंद्रित था।
खंड B (स्रोत-आधारित): इसमें पढ़ने में आसान गद्यांश (Passages) शामिल थे, जिनके उत्तर सीधे मिल जाते थे।
खंड D (दीर्घ उत्तरीय): इसमें 120-150 शब्दों के मानक वर्णनात्मक उत्तरों की आवश्यकता थी।
छात्र अभ्यास और पुनरीक्षण के लिए आधिकारिक पेपर देख सकते हैं:
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प्रश्न पत्र (2025) |
PDF डाउनलोड करें |
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CBSE कक्षा 12 भूगोल सेट 1 |
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CBSE कक्षा 12 भूगोल सेट 2 |
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CBSE कक्षा 12 भूगोल सेट 3 |
यह तुलना स्पष्ट करती है कि बोर्ड छात्रों की याद रखने की क्षमता (Memory) से अधिक उनके विश्लेषणात्मक कौशल (Analytical Skills) का परीक्षण कर रहा है।
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विशेषता (Feature) |
2025 का फोकस |
2026 का फोकस |
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प्रश्न शैली |
तथ्य पुनर्प्राप्ति (Fact Retrieval) |
विश्लेषणात्मक सोच |
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भाषा |
सरल और प्रत्यक्ष |
औपचारिक और तकनीकी |
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कठिनाई अंतराल |
कम से मध्यम |
मध्यम से उच्च |
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मानचित्र सटीकता |
सामान्य क्षेत्र |
विशिष्ट स्थान |