
प्रारंभिक फीडबैक के अनुसार, भौतिक विज्ञान का पेपर 'मध्यम से कठिन' (Moderate to Difficult) स्तर का रहा। जहाँ एक ओर प्रश्न पूरी तरह से NCERT पाठ्यक्रम पर आधारित थे, वहीं दूसरी ओर गणनाओं (Calculations) की अधिकता ने छात्रों की समय प्रबंधन क्षमता की कड़ी परीक्षा ली।
CBSE कक्षा 12वीं भौतिक विज्ञान परीक्षा 2026 के प्रश्न पत्र का संक्षिप्त विवरण और मुख्य आकर्षण नीचे दिए गए हैं:
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CBSE Class 12 Physics Paper 2026 Overview |
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पैरामीटर्स |
विश्लेषण |
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समग्र कठिनाई |
मध्यम (Moderate) |
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न्यूमेरिकल (Numericals) |
लंबे और गणना प्रधान |
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थ्योरी बनाम गणित |
अधिक एप्लीकेशन-आधारित प्रश्न |
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समय प्रबंधन |
कठिन (पेपर काफी लंबा था) |
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सिलेबस का पालन |
पूर्णतः NCERT आधारित |
इस प्रश्न पत्र में कुल 33 अनिवार्य प्रश्न होते हैं, जिन्हें पाँच खंडों (Sections) में बाँटा गया है:
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खंड (Section) |
प्रश्नों के प्रकार |
प्रश्नों की संख्या |
प्रति प्रश्न अंक |
कुल अंक |
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खंड A |
MCQs और अभिकथन-तर्क (Assertion-Reasoning) |
16 |
1 |
16 |
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खंड B |
अति लघु उत्तरीय प्रश्न (VSA) |
5 |
2 |
10 |
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खंड C |
लघु उत्तरीय प्रश्न (SA) |
7 |
3 |
21 |
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खंड D |
केस स्टडी पर आधारित प्रश्न |
2 |
4 |
8 |
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खंड E |
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (LA) |
3 |
5 |
15 |
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कुल |
33 |
70 |
परीक्षा केंद्र से बाहर निकले छात्रों के बीच मिश्रित प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं:
MCQ सेक्शन: छात्रों ने बताया कि बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) उम्मीद से अधिक गणना-प्रधान थे, जिनमें वैचारिक स्पष्टता के साथ सटीक गणितीय हल की आवश्यकता थी।
डेरिवेशन (Derivations): पेपर में व्यावहारिक अनुप्रयोगों (Practical applications) के मुकाबले थ्योरी और सिलेबस के मुख्य डेरिवेशनों पर अधिक ध्यान दिया गया।
केस स्टडी: विशेष रूप से ऑप्टिक्स (Optics) से जुड़ी केस स्टडी छात्रों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हुई।
समय की कमी: कई औसत परीक्षार्थियों के लिए पेपर को पूरा हल करना मुश्किल रहा क्योंकि न्यूमेरिकल काफी समय लेने वाले थे। पिछले साल की तुलना में पेपर थोड़ा सरल था, लेकिन इसकी लंबाई ने इसे चुनौतीपूर्ण बना दिया।
यह विश्लेषण न केवल वर्तमान छात्रों के लिए बल्कि भविष्य के उम्मीदवारों के लिए भी महत्वपूर्ण है:
अंक योजना (Marking Scheme): इसके जरिए आप सेक्शन-वार वेटेज को समझ सकते हैं।
महत्वपूर्ण विषय: बार-बार पूछे जाने वाले टॉपिक्स की पहचान कर सकते हैं।
तैयारी में सुधार: अपनी तैयारी की कमियों को पहचानकर रिवीजन रणनीति में बदलाव ला सकते हैं।