Class 10 Science Chapter 5 “जैव प्रक्रम” के NCERT Solutions CBSE पाठ्यक्रम के महत्वपूर्ण विषयों को समझने के लिए बेहद उपयोगी हैं। इस अध्याय में पोषण, श्वसन, परिवहन और उत्सर्जन जैसी जीवन प्रक्रियाएँ शामिल हैं, जो जीवित प्राणियों के लिए अत्यंत आवश्यक होती हैं। ये समाधान इन सभी अवधारणाओं को सरल, स्पष्ट और व्यवस्थित तरीके से समझाते हैं, जिससे छात्रों को पढ़ाई में मदद मिलती है और वे परीक्षा की बेहतर तैयारी कर पाते हैं।
Class 10 “जैव प्रक्रम” अध्याय के कुछ महत्वपूर्ण प्रश्न और उत्तर NCERT पाठ्यपुस्तक से दिए गए हैं। NCERT Solutions के साथ-साथ आप बेहतर और स्मार्ट तैयारी के लिए अतिरिक्त प्रश्नोत्तर भी अभ्यास कर सकते हैं, जिससे CBSE Class 10 पाठ्यक्रम के अनुसार जीवन प्रक्रियाओं की पूरी समझ विकसित होती है।
प्रश्न 1: मनुष्यों जैसे बहुकोशिकीय जीवों में ऑक्सीजन की आवश्यकता पूरी करने के लिए प्रसरण (Diffusion) पर्याप्त क्यों नहीं है?
उत्तर: प्रसरण एक धीमी प्रक्रिया है जिसमें अणु उच्च सान्द्रता से निम्न सान्द्रता की ओर जाते हैं। छोटे जीवों जैसे अमीबा में यह पर्याप्त होता है क्योंकि उनका शरीर छोटा होता है। लेकिन मनुष्यों जैसे बहुकोशिकीय जीवों में शरीर कई परतों से बना होता है और अंदर की कोशिकाएँ दूर होती हैं। इसलिए केवल प्रसरण से ऑक्सीजन सभी कोशिकाओं तक जल्दी नहीं पहुँच पाती। इसी कारण मनुष्यों में श्वसन तंत्र और परिसंचरण तंत्र होते हैं, जो ऑक्सीजन को तेजी से पूरे शरीर में पहुँचाते हैं।
प्रश्न 2: हम कैसे तय करते हैं कि कोई वस्तु जीवित है या नहीं?
उत्तर: हम किसी वस्तु को जीवित मानते हैं यदि वह जीवन की प्रक्रियाएँ जैसे गति, वृद्धि, प्रजनन, श्वसन और प्रतिक्रिया दिखाती है। जीवित चीजें पाचन और उत्सर्जन जैसी आंतरिक क्रियाएँ भी करती हैं।
उदाहरण के लिए, पौधे चल नहीं सकते, फिर भी वे जीवित हैं क्योंकि वे बढ़ते हैं, भोजन बनाते हैं और प्रकाश के प्रति प्रतिक्रिया करते हैं।
प्रश्न 3: जीव बाहरी कच्चे पदार्थों (raw materials) का उपयोग किस लिए करते हैं?
उत्तर:जीवों को जीवित रहने और वृद्धि के लिए बाहरी कच्चे पदार्थ जैसे पानी, ऑक्सीजन और पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। पौधे मिट्टी से पानी और खनिज तथा हवा से कार्बन डाइऑक्साइड लेकर भोजन बनाते हैं।
जानवर भोजन खाते हैं, पानी पीते हैं और ऑक्सीजन लेते हैं। ये सभी पदार्थ ऊर्जा उत्पादन, कोशिकाओं की मरम्मत और जीवन क्रियाओं को बनाए रखने में मदद करते हैं।
प्रश्न 4: जीवन को बनाए रखने के लिए कौन-सी प्रक्रियाएँ आवश्यक हैं?
उत्तर:जीवित रहने के लिए कुछ आवश्यक जीवन प्रक्रियाएँ होती हैं:
पोषण (Nutrition): भोजन प्राप्त करना और उसका उपयोग करना
श्वसन (Respiration): भोजन से ऊर्जा प्राप्त करना
परिवहन (Transportation): शरीर में पदार्थों का आवागमन
उत्सर्जन (Excretion): अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालना
यदि ये प्रक्रियाएँ बंद हो जाएँ, तो जीवन संभव नहीं रहता। इसलिए इन्हें जीवन प्रक्रियाएँ कहा जाता है।
प्रश्न 5 .स्वपोषी और परपोषी पोषण में क्या अंतर है?
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स्वपोषी पोषण |
परपोषी पोषण |
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जीव सूर्य के प्रकाश, कार्बन डाइऑक्साइड और जल की सहायता से अपना भोजन स्वयं बनाते हैं। |
जीव भोजन के लिए अन्य जीवों पर निर्भर रहते हैं। |
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यह प्रक्रिया प्रकाश संश्लेषण द्वारा होती है। |
यह प्रक्रिया अन्य जीवों को खाकर या उनसे पोषण प्राप्त करके होती है। |
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उदाहरण: हरे पौधे, कुछ बैक्टीरिया |
उदाहरण: मनुष्य, पशु, कवक |
प्रश्न 6: पौधे प्रकाश संश्लेषण के लिए आवश्यक कच्चे पदार्थ कहाँ से प्राप्त करते हैं?
उत्तर:पौधों को प्रकाश संश्लेषण के लिए कार्बन डाइऑक्साइड, पानी और सूर्य का प्रकाश चाहिए।
कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂): पत्तियों में मौजूद छोटे-छोटे छिद्र (रंध्र/स्टोमाटा) के माध्यम से वायु से ली जाती है।
पानी (H₂O): जड़ों द्वारा मिट्टी से अवशोषित किया जाता है और जाइलम वाहिकाओं के माध्यम से पत्तियों तक पहुँचता है।
सूर्य का प्रकाश: पत्तियों में उपस्थित हरित लवक (क्लोरोफिल) द्वारा अवशोषित किया जाता है, जो भोजन बनाने में मदद करता है।
इन सभी पदार्थों की सहायता से पौधे ग्लूकोज (भोजन) और ऑक्सीजन का निर्माण करते हैं। यह प्रक्रिया पौधे को जीवित रखने के साथ-साथ अन्य जीवों के लिए ऑक्सीजन भी प्रदान करती है।
प्रश्न 7: हमारे पेट में अम्ल (Acid) की क्या भूमिका है?
उत्तर: हमारे पेट में हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCl) स्रावित होता है, जिसकी दो मुख्य भूमिकाएँ हैं:
यह भोजन में मौजूद हानिकारक जीवाणुओं और कीटाणुओं को नष्ट करता है।
यह अम्लीय वातावरण बनाता है, जिससे पेप्सिन जैसे एंजाइम प्रोटीन का पाचन सही तरीके से कर पाते हैं।
यदि यह अम्ल न हो, तो पाचन प्रक्रिया धीमी और अधूरी हो जाएगी तथा संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।
प्रश्न 8: पाचन एंजाइम (Digestive enzymes) का क्या कार्य है?
उत्तर:पाचन एंजाइम विशेष रसायन होते हैं जो भोजन के पाचन में सहायता करते हैं। ये बड़े और जटिल भोजन कणों को छोटे और सरल अणुओं में तोड़ते हैं, ताकि वे आसानी से अवशोषित हो सकें।
उदाहरण:
एमाइलेज स्टार्च को शर्करा में बदलता है।
पेप्सिन प्रोटीन को छोटे अणुओं में तोड़ता है।
लाइपेज वसा को फैटी एसिड और ग्लिसरॉल में बदलता है।
ये एंजाइम पाचन को तेज और आसान बनाते हैं।
प्रश्न 9: छोटी आंत (Small intestine) पचे हुए भोजन को अवशोषित करने के लिए कैसे अनुकूलित होती है?
उत्तर:छोटी आंत एक लंबी और कुंडलित नली होती है, जो पचे हुए भोजन के अवशोषण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इसके अंदर उँगली जैसी छोटी संरचनाएँ होती हैं जिन्हें विल्ली (Villi) कहते हैं। ये सतह क्षेत्र को बढ़ाती हैं और इनमें सूक्ष्म रक्त वाहिकाएँ होती हैं, जो पोषक तत्वों को रक्त में पहुँचाती हैं।
छोटी आंत की दीवारों में एंजाइम भी होते हैं, जो भोजन के अंतिम पाचन में मदद करते हैं। अवशोषित पोषक तत्व रक्त द्वारा शरीर के विभिन्न भागों तक पहुँचाए जाते हैं।
प्रश्न 10: श्वसन के लिए ऑक्सीजन प्राप्त करने में स्थलीय जीवों को जलीय जीवों पर क्या लाभ होता है?
उत्तर: स्थलीय जीव भूमि पर रहते हैं, जहाँ हवा में ऑक्सीजन आसानी से उपलब्ध होती है। हवा में ऑक्सीजन की मात्रा अधिक होती है और यह कम घनी होती है, इसलिए इसे लेना आसान होता है।
इसके विपरीत, जलीय जीव पानी में घुली हुई ऑक्सीजन को गलफड़ों (gills) के माध्यम से प्राप्त करते हैं, जिसमें ऑक्सीजन की मात्रा कम होती है। इसलिए उन्हें अधिक पानी प्रवाहित करना पड़ता है।
इस प्रकार, स्थलीय जीव फेफड़ों की मदद से अधिक कुशलता से ऑक्सीजन प्राप्त करते हैं।
प्रश्न 11: विभिन्न जीवों में ऊर्जा प्राप्त करने के लिए ग्लूकोज का ऑक्सीकरण किन-किन तरीकों से होता है?
उत्तर: भोजन से प्राप्त ग्लूकोज कोशिकाओं में टूटकर ऊर्जा प्रदान करता है। यह प्रक्रिया ऑक्सीजन की उपलब्धता के आधार पर अलग-अलग तरीकों से होती है:
वायवीय श्वसन (Aerobic respiration):
यह ऑक्सीजन की उपस्थिति में होता है। इसमें ग्लूकोज पूरी तरह टूटकर कार्बन डाइऑक्साइड और पानी बनाता है और अधिक ऊर्जा प्राप्त होती है।
उदाहरण: मनुष्य और अधिकांश जीव
अवायवीय श्वसन (Anaerobic respiration):
यह ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में होता है। इसमें ग्लूकोज आंशिक रूप से टूटकर अल्कोहल या लैक्टिक अम्ल बनाता है और कम ऊर्जा मिलती है।
उदाहरण: यीस्ट (अल्कोहल), मांसपेशियाँ (लैक्टिक अम्ल)
मांसपेशियों में आंशिक विघटन:
जब हम अधिक व्यायाम करते हैं, तो ऑक्सीजन की कमी के कारण ग्लूकोज लैक्टिक अम्ल में बदल जाता है, जिससे मांसपेशियों में दर्द (cramps) हो सकता है।
प्रश्न 12: मनुष्यों में ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड का परिवहन कैसे होता है?
उत्तर: मनुष्यों में गैसों का परिवहन रक्त द्वारा किया जाता है।
ऑक्सीजन का परिवहन:
फेफड़ों से प्राप्त ऑक्सीजन लाल रक्त कोशिकाओं में उपस्थित हीमोग्लोबिन से मिलकर ऑक्सीहीमोग्लोबिन बनाती है। यह शरीर की सभी कोशिकाओं तक पहुँचाई जाती है।
कार्बन डाइऑक्साइड का परिवहन:
कोशिकाओं में बनने वाली कार्बन डाइऑक्साइड रक्त प्लाज्मा में घुलकर (मुख्यतः बाइकार्बोनेट के रूप में) फेफड़ों तक पहुँचती है।
फेफड़ों में पहुँचकर कार्बन डाइऑक्साइड बाहर निकाल दी जाती है (श्वसन छोड़ते समय)। इस प्रक्रिया से शरीर में गैसों का संतुलन बना रहता है।
प्रश्न 13: मनुष्यों में फेफड़े गैसों के आदान-प्रदान के लिए अधिक सतह क्षेत्र कैसे प्रदान करते हैं?
उत्तर:मनुष्यों के फेफड़ों में लाखों छोटी-छोटी गुब्बारे जैसी संरचनाएँ होती हैं जिन्हें एल्वियोलाई (Alveoli) कहते हैं। ये एल्वियोलाई गैसों के आदान-प्रदान के लिए बहुत बड़ा सतह क्षेत्र प्रदान करती हैं।
प्रत्येक एल्वियोलस के चारों ओर पतली रक्त केशिकाएँ (capillaries) होती हैं। जब हम साँस लेते हैं, तो ऑक्सीजन एल्वियोलाई से रक्त में प्रवेश करती है और कार्बन डाइऑक्साइड रक्त से एल्वियोलाई में आकर बाहर निकल जाती है।
इस प्रकार फेफड़ों की यह संरचना गैसों के तेज और प्रभावी आदान-प्रदान में मदद करती है।
प्रश्न 14: मनुष्यों में परिवहन तंत्र के घटक कौन-कौन से हैं? उनके कार्य क्या हैं?
उत्तर: मनुष्यों का परिवहन तंत्र तीन मुख्य भागों से मिलकर बना है:
हृदय (Heart): यह एक पेशीय अंग है जो पूरे शरीर में रक्त को पंप करता है।
रक्त (Blood): यह ऑक्सीजन, भोजन, हार्मोन और अपशिष्ट पदार्थों का परिवहन करता है।
रक्त वाहिकाएँ (Blood Vessels):
धमनियाँ (Arteries): ऑक्सीजन युक्त रक्त को हृदय से शरीर के भागों तक ले जाती हैं।
शिराएँ (Veins): ऑक्सीजन रहित रक्त को शरीर से वापस हृदय तक लाती हैं।
केशिकाएँ (Capillaries): धमनियों और शिराओं को जोड़ती हैं और पदार्थों का आदान-प्रदान करती हैं।
प्रश्न 15: स्तनधारियों और पक्षियों में ऑक्सीजन युक्त और ऑक्सीजन रहित रक्त को अलग रखना क्यों आवश्यक है?
उत्तर: स्तनधारी और पक्षी ऊष्मरक्ती (warm-blooded) होते हैं, जो अपने शरीर का तापमान स्थिर रखते हैं। इसके लिए उन्हें अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है। यदि ऑक्सीजन युक्त और रहित रक्त मिल जाए, तो शरीर को पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं मिलेगी और ऊर्जा उत्पादन कम हो जाएगा। इसलिए इनके हृदय में चार कक्ष होते हैं, जो दोनों प्रकार के रक्त को अलग रखते हैं और शरीर के अंगों को सही ढंग से कार्य करने में मदद करते हैं।
प्रश्न 16: उन्नत (जटिल) पौधों में परिवहन तंत्र के घटक कौन-कौन से हैं?
उत्तर: पौधों में दो मुख्य परिवहन ऊतक होते हैं:
जाइलम (Xylem): जड़ों से पानी और खनिजों को पत्तियों तक पहुँचाता है।
फ्लोएम (Phloem): पत्तियों में बना भोजन पौधे के अन्य भागों तक पहुँचाता है।
प्रश्न 17: पौधों में पानी और खनिजों का परिवहन कैसे होता है?
उत्तर: पौधे जड़ों के रोएँ (root hairs) द्वारा मिट्टी से पानी और खनिजों को अवशोषित करते हैं। ये जाइलम के माध्यम से ऊपर तने और पत्तियों तक पहुँचते हैं।
यह प्रक्रिया निम्न कारकों से होती है:
जड़ दाब (Root pressure)
केशिकीय क्रिया (Capillary action)
वाष्पोत्सर्जन खिंचाव (Transpiration pull)
प्रश्न 18: पौधों में भोजन का परिवहन कैसे होता है?
उत्तर:पत्तियों में प्रकाश संश्लेषण द्वारा बना भोजन फ्लोएम के माध्यम से पौधे के सभी भागों तक पहुँचाया जाता है। इस प्रक्रिया को स्थानांतरण (Translocation) कहते हैं। यह प्रक्रिया ऊर्जा (ATP) का उपयोग करती है और भोजन पौधे की आवश्यकता के अनुसार ऊपर और नीचे दोनों दिशाओं में जा सकता है, जैसे जड़ों में संग्रह के लिए या नए भागों के विकास के लिए।
प्रश्न 19: नेफ्रॉन की संरचना और कार्य का वर्णन कीजिए।
उत्तर: नेफ्रॉन (Nephron) गुर्दे की सबसे छोटी कार्यात्मक इकाई होती है। प्रत्येक गुर्दे में लगभग दस लाख नेफ्रॉन पाए जाते हैं।
संरचना (Structure):
इसमें एक कप के आकार की संरचना होती है जिसे बोमैन कैप्सूल (Bowman’s capsule) कहते हैं।
इसके अंदर केशिकाओं का गुच्छा होता है जिसे ग्लोमेरुलस (Glomerulus) कहते हैं।
बोमैन कैप्सूल से एक लंबी, कुंडलित नलिका (ट्यूब्यूल) जुड़ी होती है, जो आगे जाकर संग्रह नलिका (collecting duct) से मिलती है।
कार्य (Function):
रक्त ग्लोमेरुलस में प्रवेश करता है, जहाँ छानन (filtration) की प्रक्रिया होती है।
अपशिष्ट पदार्थ, अतिरिक्त लवण और पानी बोमैन कैप्सूल में छनकर आ जाते हैं।
उपयोगी पदार्थ जैसे ग्लूकोज और अमीनो अम्ल ट्यूब्यूल में पुनः अवशोषित हो जाते हैं।
शेष अपशिष्ट पदार्थ मूत्र (urine) के रूप में बनते हैं, जो संग्रह नलिका से होते हुए मूत्राशय तक पहुँचते हैं।
प्रश्न 20: पौधे अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालने के लिए किन-किन तरीकों का उपयोग करते हैं?
उत्तर:पौधों में जानवरों की तरह अलग उत्सर्जन तंत्र नहीं होता, इसलिए वे विभिन्न तरीकों से अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालते हैं:
ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड जैसे अपशिष्ट रंध्रों (stomata) के माध्यम से बाहर निकलते हैं।
कुछ अपशिष्ट पदार्थ पुराने पत्तों या छाल में जमा हो जाते हैं, जो बाद में गिर जाते हैं।
कुछ अपशिष्ट रेजिन, गोंद या लेटेक्स के रूप में विशेष कोशिकाओं में संग्रहित होते हैं।
अतिरिक्त पानी वाष्पोत्सर्जन (transpiration) के माध्यम से बाहर निकाला जाता है।
प्रश्न 21: मूत्र (Urine) की मात्रा कैसे नियंत्रित होती है?
उत्तर: मूत्र की मात्रा निम्न कारकों पर निर्भर करती है:
शरीर द्वारा लिया गया पानी
वातावरण का तापमान
शरीर को पानी बचाने की आवश्यकता
मस्तिष्क ADH (एंटीडाययूरेटिक हार्मोन) के माध्यम से मूत्र की मात्रा को नियंत्रित करता है।
जब शरीर में पानी कम होता है, तो ADH अधिक स्रावित होता है, जिससे किडनी अधिक पानी पुनः अवशोषित करती है और मूत्र कम बनता है।
जब शरीर में पानी अधिक होता है, तो ADH कम स्रावित होता है और अधिक मूत्र बनता है।
इस प्रकार शरीर में जल संतुलन बना रहता है।
प्रश्न 22: किडनी का मुख्य कार्य क्या है?
(a) पोषण
(b) श्वसन
(c) उत्सर्जन
(d) परिवहन
उत्तर: (c) उत्सर्जन
व्याख्या:किडनी शरीर से अपशिष्ट पदार्थों और अतिरिक्त पानी को बाहर निकालती है। इस प्रक्रिया को उत्सर्जन (Excretion) कहा जाता है।
प्रश्न 23: पौधों में जाइलम (Xylem) किसके लिए जिम्मेदार होता है?
(a) पानी का परिवहन
(b) भोजन का परिवहन
(c) अमीनो अम्ल का परिवहन
(d) ऑक्सीजन का परिवहन
उत्तर: (a) पानी का परिवहन
व्याख्या: जाइलम जड़ों से पानी और खनिजों को पौधे के सभी भागों तक पहुँचाता है।
प्रश्न 24: स्वपोषी (Autotrophic) पोषण के लिए क्या आवश्यक है?
(a) कार्बन डाइऑक्साइड और पानी
(b) क्लोरोफिल
(c) सूर्य का प्रकाश
(d) उपरोक्त सभी
उत्तर: (d) उपरोक्त सभी
व्याख्या: पौधों को अपना भोजन बनाने के लिए सूर्य का प्रकाश, पानी, कार्बन डाइऑक्साइड और क्लोरोफिल सभी की आवश्यकता होती है।
प्रश्न 25: पाइरुवेट के टूटकर कार्बन डाइऑक्साइड, पानी और ऊर्जा बनने की प्रक्रिया कहाँ होती है?
(a) साइटोप्लाज्म
(b) माइटोकॉन्ड्रिया
(c) क्लोरोप्लास्ट
(d) नाभिक
उत्तर:(b) माइटोकॉन्ड्रिया
व्याख्या: माइटोकॉन्ड्रिया को कोशिका का पावरहाउस कहा जाता है, जहाँ श्वसन के दौरान ऊर्जा उत्पन्न होती है।
प्रश्न 26: हमारे शरीर में वसा (Fats) का पाचन कैसे होता है और यह कहाँ होता है?
उत्तर:वसा का पाचन छोटी आंत (Small intestine) में होता है। यकृत (लिवर) से निकलने वाला पित्त (Bile) वसा को छोटे-छोटे कणों में तोड़ता है और एंजाइम इन्हें फैटी एसिड और ग्लिसरॉल में बदल देते हैं।
प्रश्न 27: भोजन के पाचन में लार (Saliva) की क्या भूमिका है?
उत्तर: लार भोजन को नरम बनाती है और एमाइलेज एंजाइम की मदद से स्टार्च को शर्करा में तोड़ती है, जिससे पाचन की प्रक्रिया आसान हो जाती है।
प्रश्न 28: स्वपोषी पोषण के लिए आवश्यक स्थितियाँ क्या हैं और इसके उप-उत्पाद क्या हैं?
उत्तर: स्वपोषी पोषण के लिए सूर्य का प्रकाश, पानी, कार्बन डाइऑक्साइड और क्लोरोफिल आवश्यक होते हैं। इसके उप-उत्पाद के रूप में ग्लूकोज (भोजन) और ऑक्सीजन बनते हैं।
प्रश्न 29: वायवीय (Aerobic) और अवायवीय (Anaerobic) श्वसन में क्या अंतर है? अवायवीय श्वसन करने वाले कुछ जीवों के नाम बताइए।
उत्तर:
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वायवीय श्वसन (Aerobic Respiration) |
अवायवीय श्वसन (Anaerobic Respiration) |
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यह ऑक्सीजन की उपस्थिति में होता है |
यह ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में होता है |
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इसमें अधिक ऊर्जा उत्पन्न होती है |
इसमें कम ऊर्जा उत्पन्न होती है |
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यह मनुष्य और अधिकांश जन्तुओं में होता है |
यह यीस्ट और कुछ बैक्टीरिया में होता है |
प्रश्न 30: एल्वियोलाई (Alveoli) गैसों के आदान-प्रदान को अधिकतम करने के लिए कैसे अनुकूलित होती हैं?
उत्तर:एल्वियोलाई की दीवारें बहुत पतली होती हैं और ये बड़ी संख्या में छोटी-छोटी वायु थैलियों के रूप में होती हैं। इससे सतह क्षेत्र बहुत बढ़ जाता है, जिससे ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड का आदान-प्रदान आसानी और तेजी से हो पाता है।
प्रश्न 31: हमारे शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी के क्या परिणाम होते हैं?
उत्तर:हीमोग्लोबिन की कमी होने पर रक्त में ऑक्सीजन का परिवहन कम हो जाता है। इससे थकान, कमजोरी और सांस फूलना जैसी समस्याएँ होती हैं। यह स्थिति एनीमिया (रक्ताल्पता) का कारण बन सकती है।
प्रश्न 32: मनुष्यों में रक्त का द्विगुणित परिसंचरण (Double circulation) क्या है? यह क्यों आवश्यक है?
उत्तर:द्विगुणित परिसंचरण में रक्त हृदय से दो बार होकर गुजरता है—पहली बार फेफड़ों तक ऑक्सीजन लेने के लिए और दूसरी बार शरीर के अन्य भागों तक ऑक्सीजन पहुँचाने के लिए।
यह आवश्यक है क्योंकि इससे ऑक्सीजन युक्त और ऑक्सीजन रहित रक्त अलग-अलग रहता है और शरीर के अंगों को पर्याप्त ऑक्सीजन मिलती है, जिससे वे सही ढंग से कार्य कर पाते हैं।
प्रश्न 33: जाइलम (Xylem) और फ्लोएम (Phloem) में पदार्थों के परिवहन में क्या अंतर है?
उत्तर
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जाइलम (Xylem) |
फ्लोएम (Phloem) |
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पानी और खनिजों का परिवहन करता है |
पत्तियों में बने भोजन का परिवहन करता है |
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परिवहन केवल ऊपर की ओर होता है |
परिवहन ऊपर और नीचे दोनों दिशाओं में होता है |
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मृत कोशिकाओं से बना होता है |
जीवित कोशिकाओं से बना होता है |
प्रश्न 34: फेफड़ों के एल्वियोलाई और गुर्दों के नेफ्रॉन की संरचना एवं कार्य की तुलना कीजिए।
उत्तर
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एल्वियोलाई (फेफड़े) |
नेफ्रॉन (गुर्दे) |
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ये छोटी वायु थैलियाँ होती हैं जो गैसों के आदान-प्रदान में मदद करती हैं |
ये सूक्ष्म नलिकाएँ होती हैं जो रक्त को छानकर मूत्र बनाती हैं |
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ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड का आदान-प्रदान करती हैं |
रक्त से अपशिष्ट पदार्थों को हटाती हैं |
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पतली दीवारें और बड़ा सतह क्षेत्र होता है |
लंबी नलिकाएँ और कई केशिकाएँ होती हैं |
मजबूत अवधारणा निर्माण: NCERT समाधान सभी अध्यायों को सरल और व्यवस्थित तरीके से समझाते हैं, जिससे बुनियादी अवधारणाएँ अच्छी तरह स्पष्ट हो जाती हैं।
परीक्षा उन्मुख तैयारी: इसमें दिए गए उत्तर CBSE परीक्षा पैटर्न के अनुसार होते हैं, जिससे छात्र सही दिशा में तैयारी कर पाते हैं।
उत्तर लेखन कौशल में सुधार: ये समाधान बताते हैं कि प्रश्नों का उत्तर किस प्रकार लिखना चाहिए, जिससे प्रस्तुति बेहतर होती है।
नियमित अभ्यास के लिए उपयोगी: छात्र इन प्रश्नों का अभ्यास करके अपनी समझ को परख सकते हैं और कमजोरियों को सुधार सकते हैं।
त्वरित और प्रभावी रिवीजन: परीक्षा से पहले महत्वपूर्ण बिंदुओं का जल्दी और आसानी से दोहराव किया जा सकता है।
समय प्रबंधन में सुधार: लगातार अभ्यास करने से छात्र कम समय में अधिक प्रश्न हल करना सीखते हैं।
आत्मविश्वास में वृद्धि: जब तैयारी सही दिशा में होती है, तो परीक्षा के समय आत्मविश्वास अपने आप बढ़ जाता है।