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कक्षा 10 सामाजिक विज्ञान (समकालीन भारत) अध्याय 5: खनिज और ऊर्जा संसाधन के महत्वपूर्ण प्रश्न–उत्तर (MIQs)

Class 10 SST (समकालीन भारत) अध्याय 5 : खनिज और ऊर्जा संसाधन के जरूरी प्रश्न-उत्तर के साथ अपनी तैयारी को मजबूत करें।खनिज, ऊर्जा स्रोत, संरक्षण और वितरण जैसे महत्वपूर्ण टॉपिक्स को मार्क-वाइज प्रश्नों के माध्यम से आसानी से रिवाइज करें और अपने अंक बढ़ाएँ।
authorImagePriyanka Yadav10 Aug, 2026
कक्षा 10 सामाजिक विज्ञान (समकालीन भारत) अध्याय 5: खनिज और ऊर्जा संसाधन के महत्वपूर्ण प्रश्न–उत्तर (MIQs)

 

खनिज और ऊर्जा संसाधनों की उपलब्धता और उपयोग को समझना भारत के विकास अध्ययन के लिए बहुत जरूरी  है। कक्षा 10 SST (समकालीन भारत) अध्याय 5 “खनिज और ऊर्जा संसाधन” में इनके प्रकार, वितरण, महत्व और संरक्षण के उपायों को विस्तार से समझाया गया है। Physics Wallah द्वारा दिए गए ये MIQs मुख्य अवधारणाओं पर आधारित महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय प्रश्न हैं, जो आपकी तेज़ रिवीजन, बेहतर समझ और बोर्ड परीक्षा की प्रभावी तैयारी में मदद करते हैं।

अध्याय 5: खनिज और ऊर्जा संसाधन के महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर (MIQs) 

Class 10 Geography Chapter “Minerals and Energy Resources”यानी खनिज और ऊर्जा संसाधन में खनिजों के प्रकार, उनके उपयोग और ऊर्जा संसाधनों के महत्व को समझाया गया है। इन महत्वपूर्ण प्रश्नों के माध्यम से छात्र परीक्षा की तैयारी को बेहतर बना सकते हैं और संसाधनों के सही उपयोग व संरक्षण की समझ विकसित कर सकते हैं। 

Section –A (1 अंक) 

प्रश्न1. सोना, चाँदी और प्लेटिनम किसके उदाहरण हैं?
(A) लौह खनिज
(B) अलौह खनिज
(C) कीमती खनिज
(D) अधात्विक खनिज
उत्तर: (C)

 

प्रश्न2.कोबाल्ट किसका उदाहरण है?
(A) लौह खनिज
(B) अलौह खनिज
(C) ऊर्जा खनिज
(D) अधात्विक खनिज
उत्तर: (A)

 

प्रश्न 3 बलुआ पत्थर और अभ्रक किसके उदाहरण हैं?
(A) अधात्विक खनिज
(B) ऊर्जा खनिज
(C) अलौह खनिज
(D) लौह खनिज
उत्तर: (A)

 

प्रश्न 4 कोयला और प्राकृतिक गैस किस प्रकार के खनिज हैं?
(A) अधात्विक
(B) ऊर्जा
(C) लौह
(D) अलौह
उत्तर: (B)

 

प्रश्न 5  ________ धातुकर्म उद्योगों के विकास का मजबूत आधार प्रदान करता है।
(A) लौह खनिज
(B) अलौह खनिज
(C) ऊर्जा खनिज
(D) कीमती खनिज
उत्तर: (A)

 

प्रश्न6 जौवाई और चेरापूंजी में खनन किस प्रकार से किया जाता है?
(A) रैथोल खनन
(B) खुला खनन
(C) भूमिगत खनन
(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर: (A)

 

प्रश्न 7 पेट्रोलियम के अधिकतर भंडार गुजरात और ________ में पाए जाते हैं।
(A) मध्य प्रदेश
(B) तेलंगाना
(C) असम
(D) महाराष्ट्र
उत्तर: (C)

 

प्रश्न 8 मैग्नेटाइट में लोहे की मात्रा लगभग _______ तक होती है।
(A) 70 प्रतिशत
(B) 50 प्रतिशत
(C) 40 प्रतिशत
(D) 30 प्रतिशत
उत्तर: (A)

 

प्रश्न 9 दुर्ग-बस्तर-चंद्रपुर पेटी कहाँ स्थित है?
(A) राजस्थान और उत्तर प्रदेश
(B) छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र
(C) गुजरात और मध्य प्रदेश
(D) मध्य प्रदेश और ओडिशा
उत्तर: (B)

 

प्रश्न10.बल्लारी-चित्रदुर्ग-चिकमगलूर-तुमकुरु पेटी किस खनिज के लिए प्रसिद्ध है?
(A) लौह अयस्क
(B) तांबा
(C) यूरेनियम
(D) ग्रेनाइट
उत्तर: (A)

 

प्रश्न11 . भारत में मैंगनीज का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य कौन सा है?
(A) झारखंड
(B) ओडिशा
(C) मध्य प्रदेश
(D) पश्चिम बंगाल
उत्तर: (B)

 

प्रश्न 12.इनमें से किस स्थान पर अभ्रक (mica) के भंडार नहीं पाए जाते?
(A) अजमेर
(B) ब्यावर
(C) हजारीबाग
(D) कटनी
उत्तर: (D)

 

प्रश्न13. कोरापुट किस खनिज के लिए प्रसिद्ध है?
(A) अभ्रक
(B) बॉक्साइट
(C) लौह अयस्क
(D) मैंगनीज
उत्तर: (B)

 

प्रश्न14.आघातवर्धनीय, तन्य और अच्छे विद्युत चालक होने के कारण, __________ का उपयोग मुख्य रूप से विद्युत केबल, इलेक्ट्रॉनिक्स और रासायनिक उद्योगों में किया जाता है।

(A) स्टील

(B) मैंगनीज

(C) तांबा

(D) इनमें से कोई नहीं
उत्तर: (C)

 

प्रश्न15.भारत में __________ के भंडार मुख्य रूप से अमरकंटक पठार, मैकाल पहाड़ियों और बिलासपुर-कटनी के पठारी क्षेत्र में पाए जाते हैं।

(A) बॉक्साइट

(B) लौह अयस्क

(C) स्टील

(D) मैंगनीज

उत्तर. (A)  

Section –B  (2 अंक)

प्रश्न16.अवसादी चट्टानों में खनिज किस प्रकार पाए जाते हैं?

उत्तर. अवसादी चट्टानों में अनेक खनिज परतों या स्तरों के रूप में पाए जाते हैं। इनका निर्माण क्षैतिज स्तरों में निक्षेपण, संचयन और संकेंद्रण के परिणामस्वरूप हुआ है।

उदाहरण: कोयला, लौह अयस्क। 

प्रश्न17. खनिजों में रंग, कठोरता, क्रिस्टल रूप, चमक और घनत्व में विविधता क्यों पाई जाती है?
उत्तर: खनिजों का निर्माण अलग-अलग भौतिक और रासायनिक परिस्थितियों में होता है, इसलिए उनमें रंग, कठोरता, क्रिस्टल रूप, चमक और घनत्व में विविधता पाई जाती है।

प्रश्न18. आग्नेय और कायांतरित चट्टानों में खनिज कैसे पाए जाते हैं?
उत्तर: इन चट्टानों में खनिज दरारों, भ्रंशों, छिद्रों और जोड़ (जॉइंट्स) में पाए जाते हैं।

प्रश्न19. अवसादी चट्टानों में खनिज कैसे पाए जाते हैं?
उत्तर: अवसादी चट्टानों में खनिज परतों या स्तरों के रूप में पाए जाते हैं, जो अवसादन और संचयन के कारण बनते हैं।

प्रश्न20. गोबर के उपले को ईंधन के रूप में क्यों हतोत्साहित किया जाना चाहिए?
उत्तर: क्योंकि इससे मूल्यवान जैविक खाद नष्ट हो जाती है, जिसे कृषि में उपयोग किया जा सकता है।

प्रश्न21. ‘गोबर गैस संयंत्र’ किसानों के लिए किस प्रकार लाभदायक है?
उत्तर: यह ऊर्जा प्रदान करता है और बेहतर गुणवत्ता की जैविक खाद उपलब्ध कराता है।

प्रश्न22. भारत का सबसे बड़ा सौर ऊर्जा संयंत्र कहाँ स्थित है?
उत्तर: यह गुजरात के भुज के पास माधोपुर में स्थित है।

प्रश्न23. ऊर्जा हमारे आधुनिक जीवन की अनिवार्य आवश्यकता कैसे है? समझाइए।

उत्तर: ऊर्जा हमारे आधुनिक जीवन का आधार है क्योंकि यह लगभग सभी क्षेत्रों में आवश्यक होती है। कृषि में सिंचाई, मशीनों और उपकरणों के संचालन के लिए ऊर्जा की जरूरत होती है। उद्योगों में उत्पादन कार्य, मशीनों के संचालन और परिवहन व्यवस्था पूरी तरह ऊर्जा पर निर्भर होती है। परिवहन के साधन जैसे बस, ट्रेन, विमान आदि भी ऊर्जा से ही चलते हैं। इसके अलावा घरेलू जीवन में बिजली के उपकरण, रोशनी, खाना पकाने और अन्य दैनिक कार्यों के लिए ऊर्जा अनिवार्य है। इसलिए ऊर्जा के बिना आधुनिक जीवन की कल्पना भी नहीं की जा सकती और यह देश के आर्थिक विकास की मुख्य आधारशिला है। 

Section-C (3 अंक )

प्रश्न24. भारत में पाए जाने वाले लौह समूह (Ferrous group) के खनिजों की कोई तीन विशेषताएँ बताइए।
उत्तर: लौह युक्त धात्विक खनिजों को लौह समूह के खनिज कहा जाता है, जैसे लौह अयस्क, मैंगनीज, निकेल, कोबाल्ट आदि। भारत में पाए जाने वाले लौह समूह के खनिजों की तीन प्रमुख विशेषताएँ इस प्रकार हैं:

  1. लौह खनिज कुल धात्विक खनिज उत्पादन के लगभग तीन-चौथाई मूल्य का हिस्सा होते हैं।

  2. ये धातुकर्म उद्योगों के विकास के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करते हैं।

  3. भारत घरेलू आवश्यकता पूरी करने के बाद जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों को इन खनिजों का निर्यात करता है।

प्रश्न25. भारत में गैर-पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों के उपयोग की आवश्यकता क्यों है? कोई तीन कारण बताइए।
उत्तर: भारत में ऊर्जा की बढ़ती खपत के कारण जीवाश्म ईंधनों (कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस) पर निर्भरता बढ़ गई है, जो सीमित मात्रा में उपलब्ध हैं। इसलिए गैर-पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों की आवश्यकता बढ़ती जा रही है। इसके तीन प्रमुख कारण हैं:

  1. जीवाश्म ईंधनों की सीमित उपलब्धता और बढ़ती खपत के कारण भविष्य में ऊर्जा संकट की संभावना बढ़ गई है।

  2. तेल और गैस की बढ़ती कीमतें तथा आपूर्ति में अनिश्चितता राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के विकास पर प्रभाव डालती हैं।

  3. जीवाश्म ईंधनों के अत्यधिक उपयोग से वायु प्रदूषण और जल प्रदूषण जैसी गंभीर पर्यावरणीय समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। इसलिए सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, जल ऊर्जा आदि जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का उपयोग आवश्यक है।

प्रश्न26. बिजली उत्पादन के दो मुख्य तरीके क्या हैं? वे एक-दूसरे से कैसे भिन्न हैं? समझाइए।
उत्तर: बिजली उत्पादन के दो मुख्य तरीके हैं:

  1. बहते हुए जल से (जलविद्युत उत्पादन)

  2. कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस जैसे ईंधनों को जलाकर (ताप विद्युत उत्पादन)

दोनों में अंतर:

जलविद्युत (Hydroelectricity):
जलविद्युत तेज बहते पानी की मदद से टरबाइन चलाकर उत्पन्न की जाती है। यह एक नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत है और अपेक्षाकृत सस्ती होती है। भारत में भाखड़ा नांगल, दामोदर घाटी निगम जैसे बहुउद्देशीय परियोजनाएँ जलविद्युत उत्पादन करती हैं।

ताप विद्युत (Thermal Electricity):
ताप विद्युत कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस जैसे जीवाश्म ईंधनों को जलाकर उत्पन्न की जाती है। यह गैर-नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत है। भारत में 310 से अधिक ताप विद्युत संयंत्र कार्यरत हैं।

प्रश्न27. “खनिज हमारे जीवन का अनिवार्य हिस्सा हैं।” टिप्पणी कीजिए।
उत्तर: हमारे दैनिक जीवन में उपयोग होने वाली लगभग हर वस्तु खनिजों से बनी होती है, चाहे वह छोटी पिन हो, ऊँची इमारत हो या जहाज। परिवहन के सभी साधन खनिजों से निर्मित होते हैं और पृथ्वी से प्राप्त ऊर्जा संसाधनों पर चलते हैं। यहाँ तक कि हमारे भोजन में भी खनिज तत्व पाए जाते हैं। मानव ने अपने जीवनयापन, सजावट, उत्सव और विकास के हर चरण में खनिजों का उपयोग किया है। इसलिए खनिज हमारे जीवन का अनिवार्य हिस्सा हैं।

प्रश्न28. भारत के किसी तीन प्रमुख लौह-अयस्क पट्टों का उल्लेख कीजिए। दक्षिणतम लौह-अयस्क पट्टी की कोई तीन विशेषताएँ लिखिए।
उत्तर: भारत के तीन प्रमुख लौह-अयस्क पट्टे निम्नलिखित हैं:

  1. ओडिशा-झारखंड पट्टी

  2. दुर्ग-बस्तर-चंद्रपुर पट्टी

  3. बेल्लारी-चित्रदुर्ग-चिकमगलूर-तुमकुर पट्टी

बेल्लारी-चित्रदुर्ग-चिकमगलूर-तुमकुर पट्टी भारत की दक्षिणतम लौह-अयस्क पट्टी है। इसकी विशेषताएँ:

  1. कर्नाटक में स्थित इस पट्टी में लौह-अयस्क के विशाल भंडार पाए जाते हैं।

  2. पश्चिमी घाट में स्थित कुद्रेमुख खान विश्व की सबसे बड़ी खानों में से एक है।

  3. कुद्रेमुख एक 100% निर्यात इकाई है और यहाँ से अयस्क को पाइपलाइन द्वारा मैंगलोर बंदरगाह तक पहुँचाया जाता है।

प्रश्न29. ऊर्जा संसाधनों को दो श्रेणियों में वर्गीकृत कीजिए। प्रत्येक के दो उदाहरण दीजिए।
उत्तर: ऊर्जा संसाधनों को दो श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है:

  1. पारंपरिक ऊर्जा स्रोत – लकड़ी, कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस आदि।

  2. गैर-पारंपरिक ऊर्जा स्रोत – सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, ज्वारीय ऊर्जा, बायोगैस आदि।

प्रश्न30. धात्विक और अधात्विक खनिजों में अंतर स्पष्ट कीजिए। 

उत्तर :

धात्विक खनिज 

अधात्विक खनिज 

(i) धात्विक खनिज सामान्यतः आग्नेय और कायांतरित चट्टानों में पाए जाते हैं। कुछ खनिज नदी घाटियों की रेत और पहाड़ियों के आधार में जलोढ़ निक्षेप के रूप में भी मिलते हैं। 

अधात्विक खनिज मुख्यतः अवसादी चट्टानों में पाए जाते हैं। ये अवसादन, संचयन और क्षैतिज जमाव के परिणामस्वरूप बनते हैं। 

(ii) धात्विक खनिजों में लौह खनिज, अलौह खनिज और बहुमूल्य धातुएँ शामिल होती हैं। जैसे—लौह अयस्क, कोबाल्ट, तांबा, बॉक्साइट, सोना, प्लेटिनम और चाँदी। 

अधात्विक खनिजों में अभ्रक, नमक, चूना पत्थर और ग्रेनाइट शामिल हैं। चूना पत्थर सीमेंट उद्योग में तथा अभ्रक और ग्रेनाइट विद्युत एवं इलेक्ट्रॉनिक उद्योगों में उपयोग किए जाते हैं। 

(iii) धात्विक खनिज ओडिशा, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में पाए जाते हैं। 

अधात्विक खनिज राजस्थान, झारखंड और आंध्र प्रदेश में पाए जाते हैं। 

प्रश्न31. लौह और अलौह खनिजों में अंतर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर : लौह खनिज:

लौह खनिज धात्विक खनिजों के कुल उत्पादन मूल्य का लगभग तीन-चौथाई भाग होते हैं।

ये धातुकर्म उद्योगों के विकास के लिए मजबूत आधार प्रदान करते हैं।

भारत अपनी घरेलू आवश्यकताओं की पूर्ति के बाद जापान और दक्षिण कोरिया को पर्याप्त मात्रा में लौह खनिजों का निर्यात करता है।

अलौह खनिज:

भारत में अलौह खनिजों के भंडार और उत्पादन की स्थिति बहुत संतोषजनक नहीं है।

अलौह खनिजों में तांबा, बॉक्साइट, सीसा, जस्ता और सोना शामिल हैं।

ये धातुकर्म, इंजीनियरिंग और विद्युत उद्योगों के विकास के लिए मजबूत आधार प्रदान करते हैं।

तांबा और बॉक्साइट जैसे अलौह खनिज मुख्यतः क्रमशः मध्य प्रदेश और ओडिशा में पाए जाते हैं।

प्रश्न32. ऊर्जा संसाधन तथा औद्योगिक कच्चे माल के रूप में पेट्रोलियम के उपयोग की व्याख्या कीजिए।

उत्तर : ऊर्जा संसाधन के रूप में पेट्रोलियम के उपयोग:

पेट्रोलियम का उपयोग वाहनों में ईंधन के रूप में किया जाता है।

रेल, हवाई जहाज और अन्य परिवहन साधनों को चलाने में भी इसका उपयोग होता है।

यह घरेलू तथा औद्योगिक क्षेत्रों में प्रकाश और ऊष्मा प्राप्त करने के लिए भी प्रयोग किया जाता है।

औद्योगिक कच्चे माल के रूप में पेट्रोलियम के उपयोग:

पेट्रोलियम मशीनों में चिकनाई प्रदान करने वाले पदार्थ (लुब्रिकेंट) के रूप में उपयोग किया जाता है।

यह रासायनिक उद्योगों के लिए महत्वपूर्ण कच्चा माल है।

पेट्रोलियम से प्राप्त उप-उत्पादों का उपयोग उर्वरक, प्लास्टिक, कृत्रिम रेशा, दवाइयाँ, साबुन, सौंदर्य प्रसाधन और सिंथेटिक रबर बनाने में किया जाता है।

 

प्रश्न33. पारंपरिक और गैर-पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों में अंतर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर

पारंपरिक ऊर्जा स्रोत 

गैर-पारंपरिक ऊर्जा स्रोत 

(i) इनका उपयोग प्राचीन समय से किया जा रहा है। 

इनके बड़े पैमाने पर विकास की तकनीक अपेक्षाकृत नई है। 

(ii) जलविद्युत को छोड़कर अधिकांश स्रोत समाप्त होने वाले या गैर-नवीकरणीय हैं, जैसे—कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस। 

ये अक्षय ऊर्जा स्रोत हैं, जैसे—सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा और ज्वारीय ऊर्जा। 

(iii) ये ऊर्जा स्रोत प्रदूषण फैलाते हैं। 

ये प्रदूषण रहित और पर्यावरण के अनुकूल होते हैं। 

(iv) जल को छोड़कर अन्य स्रोत सीमित मात्रा में उपलब्ध हैं। 

ये प्रकृति में प्रचुर मात्रा में और स्वतंत्र रूप से उपलब्ध हैं। 

(v) इनका उपयोग अपेक्षाकृत महँगा होता है। 

ये अपेक्षाकृत सस्ते ऊर्जा स्रोत हैं। 

(vi) सीमित उपलब्धता के कारण इन पर लंबे समय तक निर्भर नहीं रहा जा सकता। 

प्रचुर उपलब्धता के कारण ये भविष्य के भरोसेमंद ऊर्जा स्रोत माने जाते हैं। 

प्रश्न34. ऊर्जा संसाधनों के संरक्षण के लिए उठाए जाने वाले कोई तीन कदम समझाइए।

उत्तर: ऊर्जा संसाधनों के संरक्षण के लिए हमें सतत विकास का मार्ग अपनाना चाहिए, अर्थात् नवीकरणीय और गैर-पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों का अधिक उपयोग करना चाहिए। सीमित ऊर्जा संसाधनों का सावधानीपूर्वक और उचित तरीके से उपयोग करना आवश्यक है। इसके अलावा, हमें बिजली की बचत करनी चाहिए, अनावश्यक बिजली उपकरण बंद रखने चाहिए तथा व्यक्तिगत वाहनों के स्थान पर सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग करना चाहिए।

प्रश्न35. मैंगनीज का क्या उपयोग है? भारत के सबसे बड़े मैंगनीज उत्पादक राज्य का नाम बताइए।

उत्तर: मैंगनीज का उपयोग मुख्य रूप से इस्पात निर्माण में किया जाता है। लगभग 1 टन इस्पात बनाने के लिए 10 किलोग्राम मैंगनीज की आवश्यकता होती है। इसका उपयोग फेरो-मैंगनीज मिश्रधातु, ब्लीचिंग पाउडर, कीटनाशक और पेंट बनाने में भी किया जाता है। भारत में ओडिशा मैंगनीज अयस्क का सबसे बड़ा उत्पादक राज्य है।

प्रश्न36. सभी गतिविधियों के लिए ऊर्जा की आवश्यकता क्यों होती है? ऊर्जा कैसे उत्पन्न की जा सकती है? समझाइए।

उत्तर: ऊर्जा हमारे दैनिक जीवन की मूलभूत आवश्यकता है। भोजन पकाने, प्रकाश और ऊष्मा प्राप्त करने, वाहनों को चलाने तथा उद्योगों में मशीनों के संचालन के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है। कृषि, उद्योग, परिवहन, व्यापार और घरेलू कार्यों सहित राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के प्रत्येक क्षेत्र में ऊर्जा का महत्वपूर्ण योगदान है। इसलिए आर्थिक विकास के लिए ऊर्जा अत्यंत आवश्यक है।

ऊर्जा का उत्पादन कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस और यूरेनियम जैसे ईंधन खनिजों से किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त बिजली भी ऊर्जा का एक प्रमुख स्रोत है। ग्रामीण भारत में पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों जैसे जलावन लकड़ी और गोबर के उपलों का व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है।

प्रश्न37. ‘पर्यावरणीय अवनयन हर जगह दिखाई देता है।’ पर्यावरणीय अवनयन को रोकने में सहायक कोई तीन मूल्यों की व्याख्या कीजिए।

उत्तर: पर्यावरणीय अवनयन को रोकने के लिए संसाधनों का सतत और समान उपयोग करना आवश्यक है, जिससे पर्यावरण को नुकसान न पहुँचे और स्वास्थ्य तथा सुरक्षा पर खतरा न हो। लोगों में संसाधनों के उचित उपयोग के प्रति जागरूकता और चेतना बढ़ानी चाहिए ताकि भूमि, जल, वनस्पति और वायु का संरक्षण किया जा सके।

पर्यावरणीय अवनयन को रोकने के लिए जल का पुनः उपयोग और पुनर्चक्रण अपनाना चाहिए। कारखानों में कोयले के स्थान पर तेल या गैस का उपयोग करने से धुएँ और प्रदूषण को कम किया जा सकता है। साथ ही मशीनों को इस प्रकार डिजाइन किया जाना चाहिए कि वे कम ऊर्जा का उपयोग करें और ध्वनि प्रदूषण भी कम हो।

Section-D (5 अंक )

प्रश्न38. भारत में सबसे अधिक मात्रा में उपलब्ध जीवाश्म ईंधन कौन-सा है? इसके विभिन्न प्रकार बताइए।

उत्तर: भारत में सबसे अधिक मात्रा में उपलब्ध जीवाश्म ईंधन कोयला है। कोयले के चार प्रमुख प्रकार हैं:

  1. एंथ्रासाइट (Anthracite): यह सबसे उच्च गुणवत्ता वाला कठोर कोयला है। इसमें 80% से अधिक कार्बन होता है और यह कम धुआँ देता है।

  2. बिटुमिनस (Bituminous): यह व्यावसायिक उपयोग में सबसे अधिक प्रयुक्त कोयला है। इसमें 60-80% कार्बन होता है। धातुकर्म में उपयोग होने वाला कोयला उच्च श्रेणी का बिटुमिनस कोयला होता है।

  3. लिग्नाइट (Lignite): यह निम्न श्रेणी का भूरे रंग का कोयला है। इसमें नमी अधिक होती है और यह मुलायम होता है।

  4. पीट (Peat): इसमें कार्बन की मात्रा कम और नमी अधिक होती है। इसकी ऊष्मा क्षमता कम होती है तथा जलने पर अधिक धुआँ निकलता है।

प्रश्न39. खनन गतिविधि खनिकों के स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए किस प्रकार हानिकारक है? समझाइए।

उत्तर: खनन गतिविधियाँ खनिकों के स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव डालती हैं। खदानों में धूल और जहरीली गैसों के कारण खनिक फेफड़ों से संबंधित बीमारियों के शिकार हो जाते हैं। इसके अलावा खदान की छत गिरने, आग लगने और पानी भरने जैसी दुर्घटनाओं का खतरा हमेशा बना रहता है।

खनन पर्यावरण को भी नुकसान पहुँचाता है। खनन से आसपास के जल स्रोत प्रदूषित हो जाते हैं। खदानों से निकलने वाला कचरा और गाद भूमि तथा मिट्टी को खराब करते हैं और नदियों व जलधाराओं को प्रदूषित करते हैं। इसलिए खनन को सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल बनाने के लिए सख्त नियमों का पालन आवश्यक है।



प्रश्न40. वर्तमान ऊर्जा संकट में ऊर्जा बचाने के लिए आप कौन-कौन से कदम उठाना चाहेंगे?

उत्तर: वर्तमान समय में ऊर्जा संरक्षण अत्यंत आवश्यक है क्योंकि ऊर्जा सभी गतिविधियों के लिए जरूरी है। ऊर्जा की बचत के लिए हमें सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग करना चाहिए और व्यक्तिगत वाहनों का कम प्रयोग करना चाहिए। उपयोग न होने पर बिजली के उपकरणों को बंद रखना चाहिए तथा ऊर्जा बचाने वाले उपकरणों का उपयोग करना चाहिए।

इसके अलावा सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा जैसे गैर-पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों को अपनाना चाहिए। बिजली के उपकरणों की नियमित जाँच करानी चाहिए ताकि ऊर्जा की बर्बादी रोकी जा सके। ऊर्जा का सावधानीपूर्वक उपयोग करके हम भविष्य के ऊर्जा संकट को कम कर सकते हैं।

प्रश्न41. सौर ऊर्जा भारत में ऊर्जा समस्या को किस हद तक हल कर सकती है? अपने विचार दीजिए।
अथवा
भारत में सौर ऊर्जा का भविष्य उज्ज्वल क्यों है?

उत्तर: भारत एक उष्णकटिबंधीय देश है, जहाँ वर्षभर प्रचुर मात्रा में सूर्य का प्रकाश प्राप्त होता है। इसलिए यहाँ सौर ऊर्जा की अपार संभावनाएँ हैं। सौर ऊर्जा एक अक्षय और असीमित ऊर्जा स्रोत है, जो प्रकृति में निःशुल्क उपलब्ध है।

यह ऊर्जा का सस्ता और पर्यावरण के अनुकूल स्रोत है, इसलिए ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में इसका उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। फोटोवोल्टिक तकनीक की सहायता से सूर्य के प्रकाश को सीधे बिजली में परिवर्तित किया जा सकता है।

सौर ऊर्जा के उपयोग से ग्रामीण क्षेत्रों में ईंधन लकड़ी पर निर्भरता कम होगी, जिससे पर्यावरण संरक्षण में सहायता मिलेगी। साथ ही पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर दबाव भी कम होगा। इन सभी कारणों से सौर ऊर्जा को भविष्य की ऊर्जा कहा जाता है।

प्रश्न42. ‘देश में सभी प्रकार की ऊर्जा की खपत लगातार बढ़ रही है। ऊर्जा विकास और ऊर्जा संरक्षण के लिए सतत मार्ग अपनाने की तत्काल आवश्यकता है।’ इस समस्या के समाधान के लिए कोई तीन उपाय सुझाइए।

उत्तर: जनसंख्या वृद्धि और बदलती जीवनशैली के कारण ऊर्जा की खपत तेजी से बढ़ रही है। ऊर्जा संरक्षण के लिए हमें सीमित संसाधनों का सावधानीपूर्वक उपयोग करना चाहिए।

  1. व्यक्तिगत वाहनों के बजाय सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग करना चाहिए।

  2. उपयोग न होने पर बिजली के उपकरणों और लाइटों को बंद रखना चाहिए।

  3. ऊर्जा बचाने वाले उपकरणों तथा सौर और पवन ऊर्जा जैसे गैर-पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों का उपयोग बढ़ाना चाहिए।

  4. बिजली के उपकरणों की नियमित जाँच से भी ऊर्जा की बचत की जा सकती है।

प्रश्न43. खनिज मुख्यतः किन-किन रूपों में पाए जाते हैं?

उत्तर: खनिज सामान्यतः निम्नलिखित रूपों में पाए जाते हैं:

  1. शिराओं और लोड्स के रूप में: आग्नेय और कायांतरित चट्टानों की दरारों और भ्रंशों में खनिज ठोस होकर जमा हो जाते हैं। जैसे—टिन, तांबा, जस्ता और सीसा।

  2. अवसादी चट्टानों में: खनिज परतों या स्तरों में पाए जाते हैं, जो अवसादन और संचयन से बनते हैं। जैसे—जिप्सम, पोटाश और नमक।

  3. अवशिष्ट निक्षेपों के रूप में: सतही चट्टानों के अपघटन के बाद बचा हुआ पदार्थ खनिजों का निर्माण करता है। बॉक्साइट इसी प्रकार बनता है।

  4. प्लेसर निक्षेपों के रूप में: कुछ खनिज नदी घाटियों और पहाड़ियों की तलहटी की रेत में जलोढ़ निक्षेप के रूप में पाए जाते हैं। जैसे—सोना, चाँदी, टिन और प्लेटिनम।

  5. महासागरीय जल में: समुद्री जल में नमक, मैग्नीशियम और ब्रोमाइड जैसे खनिज पाए जाते हैं। समुद्र तल मैंगनीज नोड्यूल्स से भी समृद्ध है।

प्रश्न44. भारत में नवीकरणीय ऊर्जा संसाधनों के उपयोग की आवश्यकता क्यों है? कोई पाँच कारण समझाइए।

उत्तर: भारत में ऊर्जा की बढ़ती मांग के कारण नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों का उपयोग आवश्यक हो गया है। इसके प्रमुख कारण निम्नलिखित हैं:

  1. कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस जैसे जीवाश्म ईंधन सीमित मात्रा में उपलब्ध हैं।

  2. तेल और गैस की बढ़ती कीमतें भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा के लिए खतरा बन रही हैं।

  3. जीवाश्म ईंधनों के अत्यधिक उपयोग से वायु और जल प्रदूषण जैसी पर्यावरणीय समस्याएँ बढ़ रही हैं।

  4. नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत प्रदूषण रहित और पर्यावरण के अनुकूल होते हैं।

  5. सौर और पवन ऊर्जा जैसे स्रोत प्रकृति में प्रचुर मात्रा में उपलब्ध हैं और अपेक्षाकृत सस्ते भी हैं।

प्रश्न45. देश के आर्थिक विकास के लिए ऊर्जा एक मूलभूत आवश्यकता कैसे है? उदाहरण सहित समझाइए।

उत्तर: ऊर्जा देश के आर्थिक विकास की आधारशिला है। राष्ट्रीय अर्थव्यवस्था के प्रत्येक क्षेत्र—कृषि, उद्योग, परिवहन और व्यापार—को कार्य करने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है। कृषि में सिंचाई और मशीनों के संचालन, उद्योगों में उत्पादन कार्य तथा परिवहन के साधनों को चलाने के लिए ऊर्जा आवश्यक है।

घरेलू क्षेत्र में भी बिजली की मांग लगातार बढ़ रही है क्योंकि इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और मशीनों का उपयोग बढ़ता जा रहा है। स्वतंत्रता के बाद लागू विकास योजनाओं के कारण ऊर्जा की खपत में लगातार वृद्धि हुई है। यही कारण है कि प्रति व्यक्ति ऊर्जा उपभोग निरंतर बढ़ रहा है।

प्रश्न46. खनिज संसाधनों का संरक्षण क्यों आवश्यक है? खनिज संरक्षण के कोई चार उपाय सुझाइए।

उत्तर: खनिज संसाधनों का निर्माण लाखों वर्षों में होता है, इसलिए उनका संरक्षण आवश्यक है। ये सीमित और अधिकांशतः गैर-नवीकरणीय संसाधन हैं। इनके पुनः बनने की गति बहुत धीमी होती है जबकि इनका उपयोग तेजी से बढ़ रहा है। औद्योगिक विकास और भविष्य की पीढ़ियों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए खनिजों का संरक्षण जरूरी है।

खनिज संरक्षण के उपाय:

  1. खनिजों का योजनाबद्ध और सतत उपयोग किया जाना चाहिए।

  2. कम गुणवत्ता वाले अयस्कों के उपयोग के लिए नई तकनीकों का विकास करना चाहिए।

  3. धातुओं का पुनर्चक्रण (Recycling) बढ़ावा देना चाहिए।

  4. खनन, प्रसंस्करण और वितरण में होने वाली बर्बादी को कम करना चाहिए।

  5. स्क्रैप धातुओं और वैकल्पिक पदार्थों के उपयोग को बढ़ावा देना चाहिए।

  6. खनिजों के निर्यात पर नियंत्रण रखना चाहिए।

प्रश्न47. “ऊर्जा विकास के लिए सतत मार्ग अपनाने की तत्काल आवश्यकता है।” इसके लिए दो व्यापक उपाय बताइए। एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में आप ऊर्जा संरक्षण में कैसे सहायता कर सकते हैं?

उत्तर: ऊर्जा विकास के लिए सतत मार्ग अपनाने हेतु हमें ऊर्जा संसाधनों का सावधानीपूर्वक और उचित उपयोग करना चाहिए। साथ ही सौर ऊर्जा, जलविद्युत और पवन ऊर्जा जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों के उपयोग को बढ़ावा देना चाहिए।

एक जिम्मेदार नागरिक के रूप में हम सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग करके, अनावश्यक बिजली उपकरण बंद रखकर और ऊर्जा बचाने वाले उपकरणों का उपयोग करके ऊर्जा संरक्षण में सहायता कर सकते हैं। इसके अलावा सौर ऊर्जा और पवन ऊर्जा जैसे गैर-पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों को अपनाना चाहिए तथा बिजली उपकरणों की नियमित जाँच करानी चाहिए ताकि ऊर्जा की बर्बादी रोकी जा सके।

Section-E (4 अंक )

प्रश्न48. निम्नलिखित गद्यांश को पढ़कर दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए।

खनिजों ने सदियों से भारतीय अर्थव्यवस्था को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। भारत एक खनिज-संपन्न देश है, जहाँ कोयला, लौह अयस्क, बॉक्साइट और अन्य आवश्यक खनिजों के विशाल भंडार पाए जाते हैं। ये संसाधन इस्पात, सीमेंट और विद्युत उत्पादन सहित विभिन्न उद्योगों की रीढ़ रहे हैं।

हालाँकि, अवैध खनन, पर्यावरणीय समस्याएँ, रैट होल खनन और संसाधनों की कमी जैसी चुनौतियों का समाधान करना आवश्यक है। भारत सरकार ने सतत खनन पद्धतियों को बढ़ावा देने, विदेशी निवेश आकर्षित करने और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए कई सुधार किए हैं। उचित प्रबंधन और जिम्मेदार खनन के माध्यम से भारत की खनिज संपदा देश की आर्थिक वृद्धि, आधारभूत संरचना के विकास और रोजगार सृजन में निरंतर योगदान दे सकती है।

(i) खनिज की परिभाषा दीजिए तथा बताइए कि चट्टानों और खनिजों का आपस में क्या संबंध है?
उत्तर: खनिज एक समरूप, प्राकृतिक रूप से पाया जाने वाला पदार्थ है जिसकी आंतरिक संरचना निश्चित होती है। चट्टानें विभिन्न खनिजों के संयोजन से बनती हैं। कुछ चट्टानें, जैसे चूना पत्थर, केवल एक ही खनिज से बनी होती हैं, जबकि अधिकांश चट्टानों में कई खनिज अलग-अलग अनुपात में पाए जाते हैं।

(ii) रैट होल (Rat Hole) खनन से क्या अभिप्राय है?
उत्तर: मेघालय में कोयला खनन परिवार के सदस्यों द्वारा लंबी और संकरी सुरंगों के माध्यम से किया जाता है, जिसे ‘रैट होल खनन’ कहा जाता है। यह खनन पद्धति मुख्यतः जवाई और चेरापूंजी क्षेत्रों में प्रचलित है।

(iii) खनिज किन-किन रूपों में पाए जाते हैं?
उत्तर: आग्नेय और कायांतरित चट्टानों में खनिज दरारों, भ्रंशों और जोड़ में पाए जाते हैं। अवसादी चट्टानों में खनिज परतों या स्तरों के रूप में मिलते हैं। इसके अतिरिक्त सतही चट्टानों के अपघटन और घुलनशील पदार्थों के हटने से अवशिष्ट खनिज भी बनते हैं।

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Khanij aur Urja Sansadhan ke Important Questions-Answers FAQs

Khanij kya hain?

खनिज प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले समरूप पदार्थ होते हैं, जिनकी आंतरिक संरचना निश्चित होती है।

Bharat mein sabse adhik uplabdh jeevashm indhan kaun-sa hai?

भारत में सबसे अधिक उपलब्ध जीवाश्म ईंधन कोयला है।

Gair-paramparik urja sroton ke udaharan dijiye.

सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, ज्वारीय ऊर्जा और बायोगैस गैर-पारंपरिक ऊर्जा स्रोत हैं।

Urja sanrakshan kyon avashyak hai?

ऊर्जा संसाधन सीमित हैं, इसलिए भविष्य की आवश्यकताओं को पूरा करने और पर्यावरण संरक्षण के लिए ऊर्जा संरक्षण आवश्यक है।
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