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कक्षा 10 हिंदी संचयन अध्याय 2: सपनों के से दिन - NCERT Solutions

कक्षा 10 की हिंदी किताब के पाठ 'सपनों के से दिन' को समझने में आपकी पूरी मदद करेगा। इसमें बोर्ड परीक्षा के लिए ज़रूरी NCERT के सभी प्रश्न-उत्तर और कहानी का सारांश दिया गया है। यह पाठ लेखक गुरदयाल सिंह के बचपन, स्कूल के अनुशासन, स्काउटिंग के अनुभवों और बाल मनोविज्ञान को दर्शाता है। यहाँ बोर्ड परीक्षा के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर और सारांश सरल भाषा में दिए गए हैं।
authorImageEkta Rakesh singh5 Jun, 2026
कक्षा 10 हिंदी संचयन अध्याय 2: सपनों के से दिन - NCERT Solutions

 

कक्षा 10 हिंदी संचयन का अध्याय 'सपनों के से दिन' लेखक गुरदयाल सिंह के बचपन की स्मृतियों पर आधारित है। इस पाठ से बोर्ड परीक्षा में अक्सर व्याख्यात्मक और मूल्यपरक प्रश्न पूछे जाते हैं। इसलिए केवल पाठ पढ़ना पर्याप्त नहीं होता। यहाँ दिए गए कक्षा 10 हिंदी संचयन अध्याय 2 'सपनों के से दिन' के लिए NCERT Solutions विद्यार्थियों को पाठ की घटनाओं, पात्रों और मुख्य भावों को समझने तथा परीक्षा में प्रभावी उत्तर लिखने में सहायता करेंगे। 

सपनों के से दिन कक्षा 10 NCERT Solutions

'सपनों के से दिन' NCERT प्रश्न-उत्तर आपको बोर्ड परीक्षाओं के लिए प्रभावी ढंग से तैयार करने के लिए लिखे गए हैं। वे महत्वपूर्ण घटनाओं, पात्रों की विशेषताओं और नैतिक शिक्षा को कवर करते हैं। इससे लघु और दीर्घ दोनों प्रकार के प्रश्नों के उत्तर देना आसान हो जाता है।

यहाँ पाठ 'सपनों के से दिन' के प्रश्न-उत्तर दिए गए हैं:

1. कोई भी भाषा आपसी व्यवहार में बाधा नहीं बनती – पाठ के किस अंश से यह सिद्ध होता है?

उत्तर:- कोई भी भाषा आपसी व्यवहार में बाधा नहीं बनती – पाठ के इस अंश से यह सिद्ध होता हैं – इस पाठ में लेखक ने बचपन की घटना को बताया है कि उनके आधे से ज्यादा साथी कोई हरियाणा से, कोई राजस्थान से है। सब अलग-अलग भाषा बोलते हैं, उनके कुछ शब्द सुनकर तो हँसी ही आ जाती थी परन्तु खेलते समय सब की भाषा सब समझ लेते थे। 

उनके व्यवहार में इससे कोई अंतर न आता था। क्योंकि बच्चे जब मिलकर खेलते हैं तो उनका व्यवहार, उनकी भाषा अलग होते हुए भी एक ही लगती है। भाषा अलग होने से आपसी खेलकूद, मेल-मिलाप में बाधा नहीं बनती।

2. पीटी साहब की ‘शाबाश’ फ़ौज के तमगों-सी क्यों लगती थी? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर:- पीटी साहब बहुत ही अनुशासन प्रिय व्यक्ति थे। छोटी सी भी गलती उनके लिए असहनीय थी। प्रार्थना सभा की कतार भी यदि सीधी न हो तो वे बच्चों को कठोर सजा देते थे। इसलिए जब कभी वे बच्चों को शाबाशी देते थे तो बच्चों को यह किसी फौजी तमगों से कम नहीं लगती थी।

3. नयी श्रेणी में जाने और नयी कापियों और पुरानी किताबों से आती विशेष गंध से लेखक का बालमन क्यों उदास हो उठता था?

उत्तर:- नयी श्रेणी में जाने और नयी कापियों और पुरानी किताबों से आती विशेष गंध से लेखक का बालमन उदास हो उठता था क्योंकि उनके परिवार की आर्थिक स्थिति अच्छी न होने के कारण उन्हें हेडमास्टर साहब द्वारा प्रबंध की गयी पुरानी किताबें ही मिलती थीं। वे भी अन्य बच्चों की तरह नयी श्रेणी में नयी कापियाँ और किताबें चाहते थे जो उन्हें नहीं मिल पाती थी इसलिए वे उदास हो जाते थे।

4. स्काउट परेड करते समय लेखक अपने को महत्वपूर्ण आदमी फ़ौजी जवान क्यों समझने लगता था?

उत्तर:- स्काउट परेड में लेखक साफ़ सुथरे धोबी के घुले कपड़े, पॉलिश किए हुए बूट, जुराबों को पहन कर जब लेखक ठक-ठक करके चलता था तो वह अपने आपको फ़ौजी से कम नहीं समझता था। उसके साथ ही जब पीटी मास्टर परेड करवाया करते और उनके आदेश पर लेफ्ट टर्न, राइट टर्न या अबाऊट टर्न को सुनकर जब वह अकड़कर चलता तो अपने अंदर एक फ़ौजी जैसी आन-बान-शान महसूस करता था।

5. हेडमास्टर शर्मा जी ने पीटी साहब को क्यों मुअत्तल कर दिया?

उत्तर:- एक दिन मास्टर प्रीतमचंद ने कक्षा में बच्चों को फ़ारसी के शब्द रूप याद करने के लिए दिए। परन्तु बच्चों से यह शब्द रूप याद नहीं हो सके। इस पर मास्टर जी ने उन्हें मुर्गा बना दिया। बच्चे इसे सहन नहीं कर पाए कुछ ही देर में लुढ़कने लगे। उसी समय नम्र ह्रदय हेडमास्टर जी वहाँ से निकले और बच्चों की हालत देखकर उत्तेजित हो गए और इस प्रकार की क्रूरता को बच्चों के प्रति सहन नहीं कर पाए और पीटी मास्टर को उन्होंने तत्काल मुअत्तल कर दिया।

6. लेखक के अनुसार उन्हें स्कूल खुशी से भागे जाने की जगह न लगने पर भी कब और क्यों उन्हें स्कूल जाना अच्छा लगने लगा?

उत्तर:- लेखक के अनुसार उन्हें स्कूल जाना बिल्कुल अच्छा नहीं लगता था परन्तु जब स्कूल में रंग बिरगें झंडे लेकर, गले में रूमाल बाँधकर मास्टर प्रीतमचंद पढाई के बजाए स्काउटिंग की परेड करवाते थे, तो लेखक को बहुत अच्छा लगता था। सब बच्चे ठक-ठक करते राइट टर्न, लेफ्ट टर्न या अबाऊट टर्न करते और मास्टर जी उन्हें शाबाश कहते तो लेखक को पूरे साल में मिले गुड्डों से भी ज़्यादा अच्छा लगता था। इसी कारण लेखक को स्कूल जाना अच्छा लगने लगा।

7. लेखक अपने छात्र जीवन में स्कूल से छुट्टियों में मिले काम को पूरा करने के लिए क्या-क्या योजनाएँ बनाया करता था और उसे पूरा न कर पाने की स्थिति में किसकी भाँति ‘बहादुर’ बनने की कल्पना किया करता था?

उत्तर:- लेखक के स्कूल की छुट्टियों में जो काम करने के लिए मिलता उसे पूरा करने के लिए लेखक समय सारणी बनाता। जैसे हिसाब के मास्टर द्वारा दिए गए 200 सवालों को पूरा करने के लिए रोज दस सवाल निकाले जाने पर 20 दिन में पूरे हो जाएँगे, लेकिन खेल कूद में लेखक का समय बीत जाता और काम न हो पाता। धीरे-धीरे समय बीतने लगता तो लेखक ओमा नामक ठिगने और बलिष्ठ लड़के जैसा बहादुर बनना चाहता था जो उद्दंड था और काम करने के बजाए पिटना सस्ता सौदा समझता था।

8. पाठ में वर्णित घटनाओं के आधार पर पीटी सर की चारित्रिक विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।

उत्तर:- पाठ में वर्णित घटनाओं के आधार पर पीटी सर की चारित्रिक विशेषताएँ निम्नलिखित हैं –

  1. पीटी सर शरीर से दुबले-पतले, ठिगने कद के थे, उनकी आँखें भूरी और तेज़ थीं। वे खाकी वर्दी और लम्बे जूते पहनते थे।

  2. वे बहुत अनुशासन प्रिय थे। बच्चे उनका कहना नहीं मानते थे तो वे दंड देते थे।

  3. वे कठोर स्वभाव के थे, उनके मन में दया भाव न था। बाल खींचना, ठुडढे मारना, खाल खींचना उनकी आदत थी।

  4. इसके साथ वे स्वाभिमानी भी थे। नौकरी से निकाले जाने पर वे हेडमास्टर जी के सामने गिड़गिड़ाए नहीं बल्कि चुपचाप चले गए।

9. विद्यार्थियों को अनुशासन में रखने के लिए पाठ में अपनाई गई युक्तियों और वर्तमान में स्वीकृत मान्यताओं के संबंध में अपने विचार प्रकट कीजिए।

उत्तर:- इस पाठ में अनुशासन बनाए रखने के लिए बच्चों को कठोर यातनाएँ दी जाती थी साथ ही उनका उत्साह बढ़ाने के लिए शाबासियाँ भी दी जाती थी। परन्तु वर्तमान परिवेश में शिक्षकों को बच्चों के साथ मारपीट का अधिकार नहीं दिया गया है। आजकल बच्चों के मनोविज्ञान को समझने के लिए शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाता है कि वे बच्चे की भावनाओं को समझें, उनके दुर्व्यवहार के कारण को समझे, उन्हें उनकी गलती का एहसास कराएँ तथा उनके साथ मित्रता व ममता का व्यवहार किया जाए जिससे वे बच्चों को ठीक से समझ कर उनके साथ उचित व्यवहार कर सकें।

10. बचपन की यादें मन को गुदगुदाने वाली होती हैं विशेषकर स्कूली दिनों की। अपने अब तक के स्कूली जीवन की खट्टी-मीठी यादों को लिखिए।

उत्तर:- हर एक बच्चे की स्कूली जीवन से जुड़ी कुछ खास यादें होती हैं। जब मैं पाँचवीं क्लास में था तो बड़ा शरारती हुआ करता था। हमारे स्कूल के आहाते में जामुन के कुछ पेड़ थे परन्तु हेडमास्टर और माली के डर से कोई उन्हें हाथ भी नहीं लगाता था। एक दिन मैंने और कुछ मित्रों ने जामुन तोड़ने का निश्चय किया। मैं पेड़ पर चढ़ा और डाली टूट गई। 

मैं नीचे एक लड़के के ऊपर गिरा और मेरा सिर पत्थर से टकराने के कारण फट गया। हेडमास्टर साहब ने मुझे दवाखाने ले गए और मेरा उपचार करवाया। उन्होंने मुझे समझाया कि जामुन की लकड़ी कमजोर होती है और ऐसे जोखिम नहीं उठाने चाहिए। आज भी जब जामुन देखता हूँ, तो मुझे हेडमास्टर जी की बातें और वह घटना याद आ जाती हैं।

11.1 प्रायः अभिभावक बच्चों को खेल-कूद में ज़्यादा रूचि लेने पर रोकते हैं और समय बरबाद न करने की नसीहत देते हैं। बताइए – खेल आपके लिए क्यों ज़रूरी हैं?

उत्तर:- खेल मेरे लिए दिनभर की मानसिक थकान को दूर करने के लिए जरुरी है। इससे मुझे नींद अच्छी आती है और दूसरे दिन मैं अपने आप को तरोताजा महसूस करता हूँ। ये मुझमें सहयोग, प्रतिस्पर्धा और लगन की भावनाओं का भी निर्माण करते है।

11.2 प्रायः अभिभावक बच्चों को खेल-कूद में ज़्यादा रूचि लेने पर रोकते हैं और समय बरबाद न करने की नसीहत देते हैं। बताइए – आप कौन से ऐसे नियम-कायदों को अपनाएँगे जिससे अभिभावकों को आपके खेल पर आपत्ति न हो।

उत्तर:- मेरे खेल-कूद से मेरे अभिभावकों को आपत्ति न हो इसलिए मैं उनके द्वारा बनाई गई समय-सारिणी के अनुसार कार्य करूँगा। खेल के साथ पढ़ाई भी उतनी ही तन्मयता से करूँगा ताकि उन्हें मुझसे कोई शिकायत न रहे।

 

 

Kaksha 10 hindi 'sapno ke se din' ke liye NCERT Solutions (FAQs)

1. Hindi me sapno ke se din ke prashn-uttar kya hai?

यह पाठ लेखक गुरदयाल सिंह के बचपन की यादों, स्कूली जीवन के अनुभवों और पी.टी. मास्टर के अनुशासन पर आधारित विस्तृत प्रश्न-उत्तर है।

2. 'Sapno ke se din' ke mukhya vishay kya hai?

इस पाठ के मुख्य विषय बचपन की पुरानी यादें, तत्कालीन शिक्षा प्रणाली का कठोर अनुशासन और बाल मनोविज्ञान हैं।

3. 'Sapno ke se din' ke prashn-uttar parikshaaon me kaise madad kar sakte hai?

ये NCERT Solutions विद्यार्थियों को कहानी की गहरी समझ प्रदान करते हैं जिससे वे बोर्ड परीक्षाओं में सटीक और विश्लेषणात्मक उत्तर लिख सकें।

4. 'Sapno ke se din' ke saransh se mukhya shiksha kya milati hai?

यह पाठ हमें सिखाता है कि बचपन के अनुभव और गुरुओं का अनुशासन (चाहे वह कठोर ही क्यों न हो) हमारे व्यक्तित्व के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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