कई छात्रों को कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 11 'विद्युत' में ओम का नियम, प्रतिरोध, विद्युत शक्ति और संख्यात्मक प्रश्नों को समझने में कठिनाई होती है। बोर्ड परीक्षा में इस अध्याय से अक्सर संख्यात्मक और अवधारणात्मक प्रश्न पूछे जाते हैं। इसलिए इस लेख में सभी महत्वपूर्ण NCERT Solutions सरल भाषा और चरणबद्ध व्याख्या के साथ दिए गए हैं, ताकि छात्र अपनी अवधारणाएँ मजबूत कर सकें और परीक्षा की बेहतर तैयारी कर सकें।
Class 10 Electricity के NCERT समाधान महत्वपूर्ण संख्यात्मक और सैद्धांतिक प्रश्नों का अभ्यास करने में सहायक होते हैं। इनमें दिए गए स्पष्ट और सरल समाधान आपकी समस्या-समाधान क्षमता को बढ़ाते हैं और परीक्षा की तैयारी को अधिक आसान और प्रभावी बनाते हैं।
प्रश्न 1: विद्युत परिपथ (Electric Circuit) क्या होता है?
उत्तर: विद्युत परिपथ एक निरंतर बंद मार्ग (closed path) होता है, जिसमें विभिन्न विद्युत अवयव जुड़े होते हैं और जिसके माध्यम से विद्युत धारा प्रवाहित होती है।
एक सरल परिपथ में निम्न घटक होते हैं:
चालक (Conductors): तार या पदार्थ जिनसे होकर धारा प्रवाहित होती है।
सेल (Cell): विद्युत ऊर्जा का स्रोत, जो धारा प्रवाहित करने के लिए विभवांतर प्रदान करता है।
स्विच (Switch): परिपथ को चालू या बंद करने के लिए उपयोग किया जाता है।
लोड (Load): वह उपकरण जो विद्युत ऊर्जा का उपयोग करता है, जैसे बल्ब या प्रतिरोधक।
प्रश्न 2: विद्युत धारा की इकाई क्या है?
उत्तर: विद्युत धारा की SI इकाई एम्पियर (Ampere) होती है।
एक एम्पियर वह धारा है, जिसमें किसी चालक से एक सेकंड में एक कूलाम आवेश प्रवाहित होता है। इसे संक्षेप में A से दर्शाया जाता है।
प्रश्न 3 : 1 कूलॉम आवेश बनाने वाले इलेक्ट्रॉनों की संख्या ज्ञात कीजिए।
एक इलेक्ट्रॉन का आवेश e = 1.6 × 10⁻¹⁹ C होता है|
आवेश का सूत्र: Q= n X e
जहाँ Q=1C
e=1.6×10-19 C
अब,
अतः, 1 कूलॉम आवेश में इलेक्ट्रॉनों की संख्या 6.25x1018 होती है।
प्रश्न 4:ऐसा कौन-सा उपकरण है जो किसी चालक के सिरों के बीच विभवांतर बनाए रखने में सहायता करता है?
उत्तर:विद्युत सेल अथवा बैटरी चालक के सिरों के बीच विभवांतर बनाए रखती है। इसमें एक या अधिक विद्युत कोशिकाएँ (electric cells) होती हैं, जो परिपथ में विद्युत धारा प्रवाहित करने के लिए आवश्यक वोल्टेज प्रदान करती हैं।
प्रश्न 5:दो बिंदुओं के बीच विभवांतर 1 V होने का क्या अर्थ है?
उत्तर: जब कहा जाता है कि दो बिंदुओं के बीच विभवांतर 1 वोल्ट (V) है, तो इसका अर्थ है कि 1 कूलॉम (C) आवेश को एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक ले जाने में 1 जूल (J) कार्य करना पड़ता है।
प्रश्न 6:6 V की बैटरी से गुजरने वाले प्रत्येक कूलॉम आवेश को कितनी ऊर्जा दी जाती है?
उत्तर:हम जानते हैं कि विभवांतर का सूत्र होता है:
V=W/Q
जहाँ
V=विभवांतर
W = किया गया कार्य (ऊर्जा)
Q = आवेश
इससे, W=V×Q
अब मान रखें: W=6×1=6J
अतः, 6 V की बैटरी से गुजरने वाले प्रत्येक 1 कूलॉम आवेश को 6 जूल ऊर्जा दी जाती है।
प्रश्न 7:किसी चालक का प्रतिरोध किन-किन कारकों पर निर्भर करता है?
उत्तर: किसी चालक का प्रतिरोध निम्नलिखित कारकों पर निर्भर करता है:
तापमान (Temperature): जैसे-जैसे चालक का तापमान बढ़ता है, उसका प्रतिरोध भी बढ़ जाता है। इसका कारण इलेक्ट्रॉनों और परमाणुओं के बीच टक्करों का बढ़ना है।
अनुप्रस्थ क्षेत्रफल (Cross-Sectional Area):चालक का क्षेत्रफल जितना अधिक होगा, उसका प्रतिरोध उतना ही कम होगा, क्योंकि धारा के प्रवाह के लिए अधिक रास्ते उपलब्ध होते हैं।
लंबाई (Length):चालक की लंबाई जितनी अधिक होगी, उसका प्रतिरोध उतना ही अधिक होगा। अर्थात, प्रतिरोध लंबाई के सीधे अनुपाती होता है।
पदार्थ का स्वभाव (Nature of Material):अलग-अलग पदार्थों का प्रतिरोध अलग-अलग होता है। धातुओं का प्रतिरोध कम होता है (अच्छे चालक), जबकि रबर जैसे पदार्थों का प्रतिरोध अधिक होता है (अच्छे कुचालक)।
प्रश्न 8:क्या समान पदार्थ की मोटी तार या पतली तार में, समान स्रोत से जोड़ने पर, धारा अधिक आसानी से प्रवाहित होगी? क्यों?
उत्तर:
प्रतिरोध का सूत्र होता है:
जहाँ
R = प्रतिरोध
ρ = पदार्थ का विशिष्ट प्रतिरोध
l = तार की लंबाई
A = अनुप्रस्थ क्षेत्रफल
इस सूत्र से स्पष्ट है कि प्रतिरोध, क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती (inversely proportional) होता है।
अर्थात:
क्षेत्रफल बढ़ने पर प्रतिरोध कम होता है
क्षेत्रफल घटने पर प्रतिरोध बढ़ता है
निष्कर्ष:
मोटी तार का अनुप्रस्थ क्षेत्रफल अधिक होता है, इसलिए उसका प्रतिरोध कम होता है।
इसी कारण मोटी तार में धारा पतली तार की तुलना में अधिक आसानी से प्रवाहित होती है।
प्रश्न 9:यदि किसी विद्युत अवयव का प्रतिरोध स्थिर रहे और उसके सिरों के बीच का विभवांतर अपने पूर्व मान का आधा कर दिया जाए, तो उसमें प्रवाहित धारा में क्या परिवर्तन होगा?
उत्तर: ओम के नियम के अनुसार: I=V/R
जहाँ
I = धारा
V = विभवांतर
R = प्रतिरोध
अब, विभवांतर आधा कर दिया गया है:
नई धारा होगी:
विभवांतर आधा करने पर धारा भी आधी हो जाती है।
प्रश्न 10:इलेक्ट्रिक टोस्टर और इलेक्ट्रिक आयरन की कुंडलियाँ (coils) शुद्ध धातु के बजाय मिश्रधातु (alloy) की क्यों बनाई जाती हैं?
उत्तर:
इलेक्ट्रिक टोस्टर और आयरन की कुंडलियाँ मिश्रधातु से बनाई जाती हैं, इसके निम्नलिखित कारण हैं:
उच्च प्रतिरोध (High Resistivity):मिश्रधातुओं का प्रतिरोध शुद्ध धातुओं की तुलना में अधिक होता है, जिससे उनमें विद्युत धारा प्रवाहित होने पर अधिक ऊष्मा उत्पन्न होती है।
उच्च गलनांक (High Melting Point):मिश्रधातुओं का गलनांक अधिक होता है, इसलिए वे उच्च तापमान पर भी पिघलती नहीं हैं।
ऑक्सीकरण का कम प्रभाव:मिश्रधातुएँ उच्च ताप पर जल्दी ऑक्सीकरण (जलना) नहीं करतीं, जिससे उनकी आयु अधिक होती है।
निष्कर्ष: इन गुणों के कारण मिश्रधातुएँ विद्युत ऊर्जा को ऊष्मा में प्रभावी रूप से बदलती हैं और उच्च तापमान को सहन कर पाती हैं, इसलिए इन्हें हीटिंग उपकरणों में उपयोग किया जाता है।
प्रश्न 11: नीचे दी गई तालिका में दिए गए आँकड़ों का उपयोग करके निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।
|
श्रेणी |
पदार्थ |
प्रतिरोधकता (Ω m) |
|
चालक (Conductors) |
चाँदी (Silver) ताँबा (Copper) एल्युमिनियम (Aluminium) टंगस्टन (Tungsten) निकेल (Nickel) लोहा (Iron) क्रोमियम (Chromium) पारा (Mercury) मैंगनीज (Manganese) |
1.60 × 10⁻⁸ 1.62 × 10⁻⁸ 2.63 × 10⁻⁸ 5.20 × 10⁻⁸ 6.84 × 10⁻⁸ 10.0 × 10⁻⁸ 12.9 × 10⁻⁸ 94.0 × 10⁻⁸ 1.84 × 10⁻⁶ |
|
मिश्रधातुएँ (Alloys) |
कॉन्स्टैन्टन (Constantan) मैंगनीन (Manganin) निक्रोम (Nichrome) |
49 × 10⁻⁶ 44 × 10⁻⁶ 100 × 10⁻⁶ |
|
कुचालक (Insulators) |
काँच (Glass) कठोर रबर (Hard rubber) एबोनाइट (Ebonite) हीरा (Diamond) कागज (सूखा) (Paper, dry) |
10¹⁰ – 10¹⁴ 10¹³ – 10¹⁶ 10¹⁵ – 10¹⁷ 10¹² – 10¹³ 10¹² |
प्रश्न (a): लोहा (Iron) और पारा (Mercury) में से कौन बेहतर चालक है?
उत्तर: लोहा (Iron) पारे (Mercury) की तुलना में बेहतर चालक है, क्योंकि पारे की प्रतिरोधकता लोहे से अधिक होती है। कम प्रतिरोधकता वाला पदार्थ बेहतर चालक होता है, इसलिए लोहा में धारा अधिक आसानी से प्रवाहित होती है।
प्रश्न (b):तालिका में दिए गए पदार्थों में सबसे अच्छा चालक कौन-सा है?
उत्तर: तालिका के अनुसार चाँदी (Silver) सबसे अच्छा चालक है, क्योंकि इसकी प्रतिरोधकता सबसे कम 1.60×10-8 है। इसलिए इसमें विद्युत धारा सबसे आसानी से प्रवाहित होती है।
प्रश्न 12: 2 V के तीन कोशिकाओं वाली बैटरी, 5 Ω, 8 Ω और 12 Ω के प्रतिरोधकों तथा एक प्लग कुंजी को श्रेणीक्रम (series) में जोड़कर परिपथ का आरेख बनाइए।
उत्तर:2 V की तीन कोशिकाओं वाली बैटरी का कुल विभव 6 V होता है। नीचे दिया गया परिपथ आरेख 12 Ω, 8 Ω और 5 Ω के तीनों प्रतिरोधकों को श्रेणीक्रम में तथा 6 V की बैटरी के साथ दर्शाता है।

प्रश्न 13: प्रश्न 1 के परिपथ को पुनः बनाइए, जिसमें प्रतिरोधकों में प्रवाहित धारा मापने के लिए एक एमीटर तथा 12 Ω प्रतिरोधक के सिरों के बीच विभवांतर मापने के लिए एक वोल्टमीटर लगाया गया हो। एमीटर और वोल्टमीटर के पाठ्यांक क्या होंगे?
उत्तर:एमीटर को हमेशा प्रतिरोधकों के साथ श्रेणीक्रम (series) में जोड़ा जाता है, जबकि वोल्टमीटर को किसी प्रतिरोधक के सिरों के बीच विभवांतर मापने के लिए उसके समानांतर (parallel) जोड़ा जाता है, जैसा कि नीचे दिए गए चित्र में दर्शाया गया है

ओम के नियम का उपयोग करके एमीटर और वोल्टमीटर के पाठ्यांक प्राप्त किए जा सकते हैं। परिपथ का कुल प्रतिरोध 5Ω+8Ω+12Ω=25Ω है। हमें ज्ञात है कि परिपथ का विभवांतर 6 V है, अतः परिपथ या प्रतिरोधकों में प्रवाहित धारा निम्न प्रकार से ज्ञात की जा सकती है:
12 Ω प्रतिरोधक के सिरों के बीच विभवांतर को V1 मान लेते हैं।
प्राप्त धारा से V1 को इस प्रकार ज्ञात किया जा सकता है: =0.24A×12Ω=2.88V
अतः एमीटर का पाठ्यांक 0.24 A होगा तथा वोल्टमीटर का पाठ्यांक 2.88 V होगा।
प्रश्न 14 निम्नलिखित को समांतर (parallel) संयोजन में जोड़ने पर तुल्य प्रतिरोध (Equivalent Resistance) ज्ञात कीजिए –
(a) 1 Ω और 106 Ω
इसलिए तुल्य प्रतिरोध लगभग 1 Ω से थोड़ा कम होगा।
निष्कर्ष:
(a) तुल्य प्रतिरोध ≈ 1 Ω से थोड़ा कम
(b) तुल्य प्रतिरोध ≈ 1 Ω से थोड़ा कम (और भी थोड़ा कम)
प्रश्न15: 100 Ω का एक विद्युत बल्ब, 50 Ω का एक टोस्टर तथा 500 Ω का एक जल फिल्टर 220 V के स्रोत के साथ समांतर क्रम में जुड़े हुए हैं। उसी स्रोत से जुड़े एक विद्युत इस्त्री का प्रतिरोध कितना होना चाहिए, जो इन तीनों उपकरणों के बराबर धारा ले, तथा उस इस्त्री में धारा कितनी होगी?
उत्तर 220 V के स्रोत से समांतर क्रम में जुड़े विद्युत बल्ब, टोस्टर और जल फिल्टर को एक परिपथ आरेख के माध्यम से निम्न प्रकार दिखाया जा सकता है:

प्रतिरोधों का तुल्य प्रतिरोध निम्न प्रकार से ज्ञात किया जा सकता है:
प्रतिरोधों का तुल्य प्रतिरोध निम्न प्रकार से ज्ञात किया जा सकता है:
अब, ओम के नियम का उपयोग करके, परिपथ में प्रवाहित होने वाली धारा को निम्न प्रकार से ज्ञात किया जा सकता है:
चूंकि उपकरण समांतर क्रम में जुड़े हैं, इसलिए उनमें से सभी द्वारा ली जाने वाली कुल धारा 7.04 A है।
अतः उसी स्रोत से समांतर रूप में जुड़े विद्युत इस्त्री द्वारा ली जाने वाली धारा भी 7.04 A होगी।
ओम के नियम का उपयोग करके इस्त्री का प्रतिरोध निम्न प्रकार से ज्ञात किया जा सकता है:
विद्युत इस्त्री का प्रतिरोध 31.25 Ω है।
प्रश्न 16. बैटरी के साथ विद्युत उपकरणों को श्रेणी क्रम (series) की बजाय समांतर क्रम (parallel) में जोड़ने के क्या लाभ हैं?
उत्तर : जब विद्युत उपकरणों को बैटरी के साथ समांतर (parallel) क्रम में जोड़ा जाता है, तो निम्नलिखित मुख्य लाभ होते हैं:
1. समान वोल्टेज (Uniform Voltage):
समांतर संयोजन में प्रत्येक उपकरण पर समान विभवांतर (potential difference) होता है, जो स्रोत (बैटरी) के वोल्टेज के बराबर होता है। इससे प्रत्येक उपकरण को पूरी वोल्टेज मिलती है, जिससे सभी उपकरण समान रूप से और उचित रूप से कार्य करते हैं।
2. प्रभावी प्रतिरोध में कमी (Reduced Effective Resistance):
समांतर परिपथ में कुल प्रतिरोध कम हो जाता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि समांतर संयोजन में कुल प्रतिरोध, जुड़े हुए सबसे छोटे प्रतिरोध से भी कम होता है। जैसे-जैसे और उपकरण जोड़े जाते हैं, कुल प्रतिरोध और घटता जाता है, जिससे परिपथ में अधिक धारा प्रवाहित होती है।
प्रश्न 17. 2 Ω, 3 Ω और 6 Ω प्रतिरोध वाले तीन प्रतिरोधकों को किस प्रकार जोड़ा जाए कि कुल प्रतिरोध (a) 4 Ω तथा (b) 1 Ω प्राप्त हो सके?
उत्तर (a) नीचे दिया गया परिपथ आरेख तीन प्रतिरोधकों के संयोजन को दर्शाता है।

उपरोक्त परिपथ से स्पष्ट है कि 3 Ω और 6 Ω समानांतर (parallel) में जुड़े हुए हैं। अतः उनका तुल्य प्रतिरोध इस प्रकार दिया जाता है:
तुल्य प्रतिरोध 2 Ω, 2 Ω प्रतिरोध के साथ श्रेणीक्रम (series) में जुड़ा हुआ है। अब कुल तुल्य प्रतिरोध इस प्रकार निकाला जा सकता है:
Req=2Ω+2Ω=4Ωहै।
(b) नीचे दिया गया परिपथ आरेख तीन प्रतिरोधकों के संयोजन को दर्शाता है।

परिपथ से स्पष्ट है कि सभी प्रतिरोधक समानांतर (parallel) में जुड़े हुए हैं। अतः उनका तुल्य प्रतिरोध निम्न प्रकार से निकाला जा सकता है:
परिपथ का कुल प्रतिरोध 1 Ω है।
प्रश्न 18. 4 Ω, 8 Ω, 12 Ω, 24 Ω प्रतिरोध वाली चार कुंडलियों के संयोजन द्वारा (a) अधिकतम, (b) न्यूनतम कुल प्रतिरोध क्या प्राप्त किया जा सकता है?
उत्तर: (a) यदि चारों प्रतिरोधकों को श्रेणीक्रम (series) में जोड़ा जाए, तो उनका कुल प्रतिरोध उनके व्यक्तिगत प्रतिरोधों के योग के बराबर होगा और यह अधिकतम होगा।
श्रेणीक्रम में जुड़े प्रतिरोधकों का कुल तुल्य प्रतिरोध होगा:
4 Ω + 8 Ω + 12 Ω + 24 Ω = 48 Ω।
(b) यदि प्रतिरोधकों को समानांतर (parallel) में जोड़ा जाए, तो उनका तुल्य प्रतिरोध न्यूनतम होगा। समानांतर में जुड़े उनके तुल्य प्रतिरोध होगा:
अतः न्यूनतम कुल प्रतिरोध 2 Ω है।
प्रश्न 19. इलेक्ट्रिक हीटर की तार (cord) नहीं चमकती जबकि हीटिंग एलिमेंट चमकता है, ऐसा क्यों?
उत्तर: इलेक्ट्रिक हीटर का हीटिंग एलिमेंट ऐसे मिश्रधातु (alloy) से बना होता है जिसका प्रतिरोध (resistance) अधिक होता है। जब विद्युत धारा इस उच्च प्रतिरोध वाले पदार्थ से होकर गुजरती है, तो अधिक प्रतिरोध के कारण विद्युत ऊर्जा ऊष्मा में परिवर्तित हो जाती है। परिणामस्वरूप हीटिंग एलिमेंट बहुत गर्म हो जाता है और अधिक ताप के कारण लाल रंग में चमकने लगता है।
इसके विपरीत, हीटर की तार (cord) तांबा या एल्युमिनियम जैसे कम प्रतिरोध वाले पदार्थों से बनी होती है। ये पदार्थ विद्युत धारा को आसानी से प्रवाहित करते हैं और इनमें बहुत कम ऊष्मा उत्पन्न होती है। इसलिए तार ठंडी रहती है और नहीं चमकती, जिससे हीटर का उपयोग सुरक्षित और प्रभावी होता है।
प्रश्न 20. 50 V के विभवांतर पर एक घंटे में 96000 कूलॉम आवेश प्रवाहित होने पर उत्पन्न ऊष्मा की गणना कीजिए।
उत्तर : उत्पन्न ऊष्मा को जूल के नियम के अनुसार इस प्रकार गणना किया जा सकता है:
H=VIt
जहाँ,
V विभवांतर है, V = 50 V
I धारा है
t समय है (सेकंड में), 1 घंटा = 3600 सेकंड
धारा की मात्रा इस प्रकार निकाली जा सकती है:

प्रश्न 21. 20 Ω प्रतिरोध वाला एक विद्युत इस्त्री (electric iron) 5 A धारा लेता है। 30 सेकंड में उत्पन्न ऊष्मा की गणना कीजिए।
उत्तर : उत्पन्न ऊष्मा की मात्रा को जूल के ऊष्मा नियम से निकाला जा सकता है, जो इस प्रकार है:
H=VIt
ऊपर दिए गए समीकरण में मान रखने पर,
H=100×5×30=1.5× 104 J
30 सेकंड में विद्युत इस्त्री द्वारा उत्पन्न ऊष्मा 1.5×104 J है।
प्रश्न 22. किसी धारा द्वारा ऊर्जा किस दर से प्रदान की जाती है, यह किससे निर्धारित होता है?
उत्तर : विद्युत शक्ति (Electric Power) वह मात्रा है जो यह बताती है कि विद्युत ऊर्जा किस दर से उपभोग या प्रदान की जा रही है। यह दर्शाती है कि किसी परिपथ में ऊर्जा कितनी तेजी से उपयोग या स्थानांतरित हो रही है।
सरल शब्दों में, यह किसी उपकरण द्वारा प्रति इकाई समय में उपयोग या प्रदान की जाने वाली ऊर्जा की मात्रा को दर्शाती है।
प्रश्न 23. एक विद्युत मोटर 220 V की लाइन से 5 A धारा लेती है। मोटर की शक्ति तथा 2 घंटे में उपभोगित ऊर्जा ज्ञात कीजिए।
उत्तर : मोटर की शक्ति को निम्न समीकरण से निकाला जा सकता है:
P=VI
ऊपर दिए गए समीकरण में मान रखने पर,
P=220 V X 5A=1100W
मोटर द्वारा उपभोगित ऊर्जा को निम्न समीकरण से निकाला जा सकता है:
E=P×t
ऊपर दिए गए समीकरण में मान रखने पर,
E=1100W×7200s=7.92×106 J
मोटर की शक्ति 1100 W है तथा 2 घंटे में उपभोगित ऊर्जा 7.92×106 J है।
प्रश्न 24. R प्रतिरोध वाले एक तार को पाँच समान भागों में काटा जाता है। इन भागों को समानांतर (parallel) में जोड़ा जाता है। यदि इस संयोजन का तुल्य प्रतिरोध R′ है, तो R/R′ का मान क्या होगा?
(a) 1/25
(b) 1/5
(c) 5
(d) 25
सही उत्तर: d) 25
व्याख्या:तार को पाँच समान भागों में काटा गया है, इसका अर्थ है कि प्रत्येक भाग का प्रतिरोध R/5R/5R/5 होगा। हम जानते हैं कि सभी भाग आपस में समानांतर (parallel) में जुड़े हैं, अतः उनका तुल्य प्रतिरोध इस प्रकार निकाला जा सकता है:
प्रश्न 25. निम्नलिखित में से कौन-सा परिपथ में विद्युत शक्ति को निरूपित नहीं करता है?
(a) I2R
(b)IR2
(c)VI
(d)VI2/R
उत्तर : ( b) IR2
प्रश्न 26. एक विद्युत बल्ब 220 V और 100 W का रेटेड है। जब इसे 110 V पर चलाया जाता है, तो उपभोगित शक्ति कितनी होगी?
(a) 100 W
(b) 75 W
(c) 50 W
(d) 25 W
उत्तर : 25 W
प्रश्न 27. समान पदार्थ के, समान लंबाई और समान व्यास वाले दो चालक तारों को पहले श्रेणीक्रम (series) में और फिर समानांतर (parallel) में समान विभवांतर पर जोड़ा जाता है। श्रेणीक्रम और समानांतर संयोजन में उत्पन्न ऊष्मा का अनुपात क्या होगा?
(a) 1:2
(b) 2:1
(c) 1:4
(d) 4:1
उत्तर : मान लें Rs और Rp क्रमशः श्रेणीक्रम (series) और समानांतर (parallel) में जुड़े तारों का तुल्य प्रतिरोध हैं। समान विभवांतर V के लिए, परिपथ में उत्पन्न ऊष्मा का अनुपात इस प्रकार दिया जाता है:

अतः उत्पन्न ऊष्मा का अनुपात 1 : 4 है।
प्रश्न 28. किसी परिपथ में दो बिंदुओं के बीच विभवांतर मापने के लिए वोल्टमीटर को कैसे जोड़ा जाता है?
उत्तर : किसी परिपथ में दो बिंदुओं के बीच वोल्टेज मापने के लिए वोल्टमीटर को उन दोनों बिंदुओं के बीच समानांतर (parallel) में जोड़ा जाता है। इस प्रकार जोड़ने से वोल्टमीटर बिना धारा के प्रवाह को अधिक प्रभावित किए सही विभवांतर मापता है। समानांतर संयोजन में यह उन बिंदुओं के बीच वोल्टेज ड्रॉप को मापता है, जिससे सटीक रीडिंग प्राप्त होती है।
प्रश्न 29. एक तांबे के तार का व्यास 0.5 mm है और उसका प्रतिरोधकता 1.6×10-8 Ωm है। इस तार की लंबाई कितनी होगी ताकि इसका प्रतिरोध 10 Ω हो जाए? यदि व्यास दोगुना कर दिया जाए, तो प्रतिरोध में कितना परिवर्तन होगा?
उत्तर : तांबे के तार का प्रतिरोध, जिसकी लंबाई मीटर में और अनुप्रस्थ क्षेत्रफल m-2 में है, निम्न सूत्र से दिया जाता है:

तार की लंबाई 122.72 m है और नया प्रतिरोध 2.5 Ω है।
प्रश्न 30. किसी दिए गए प्रतिरोधक में प्रवाहित धारा III के मान, उसके सिरों के बीच के विभवांतर VVV के संगत मानों के लिए नीचे दिए गए हैं –
|
I (एम्पियर) |
0.5 |
1.0 |
2.0 |
3.0 |
4.0 |
|
V (वोल्ट) |
1.6 |
3.4 |
6.7 |
10.2 |
13.2 |
उत्तर : वोल्टेज और धारा के बीच संबंध दर्शाने वाले ग्राफ को I–V विशेषता कहा जाता है। इस ग्राफ में, धारा (I) को y-अक्ष पर और वोल्टेज (V) को x-अक्ष पर प्रदर्शित किया जाता है। यह ग्राफ सामान्यतः दर्शाता है कि जैसे-जैसे प्रतिरोधक के सिरों के बीच वोल्टेज बदला जाता है, उसके माध्यम से प्रवाहित धारा किस प्रकार बदलती है।

रेखा का ढाल प्रतिरोध का मान देता है। ढाल को इस प्रकार निकाला जा सकता है:
ढाल = 1/ R = BC / AC = 2/6.8
R ज्ञात करने के लिए,
R = 6.8/2 = 3.4 Ω
प्रतिरोधक का प्रतिरोध 3.4 Ω है।
प्रश्न 31. जब 12 V की बैटरी को एक अज्ञात प्रतिरोध के साथ जोड़ा जाता है, तो परिपथ में 2.5 mA धारा प्रवाहित होती है। प्रतिरोध का मान ज्ञात कीजिए।
उत्तर : प्रतिरोध का मान ओम के नियम का उपयोग करके निम्न प्रकार से निकाला जा सकता है:
प्रश्न 32. 9 V की एक बैटरी को क्रमशः 0.2 Ω, 0.3 Ω, 0.4 Ω, 0.5 Ω और 12 Ω प्रतिरोधकों के साथ श्रेणीक्रम (series) में जोड़ा गया है। 12 Ω प्रतिरोधक से कितनी धारा प्रवाहित होगी?
उत्तर : श्रेणीक्रम (series) संयोजन में धारा का विभाजन नहीं होता है। सभी प्रतिरोधकों में प्रवाहित होने वाली धारा समान होती है। प्रतिरोधकों में प्रवाहित धारा की मात्रा ज्ञात करने के लिए हम ओम के नियम का उपयोग करते हैं। लेकिन पहले, आइए तुल्य प्रतिरोध ज्ञात करते हैं: R=0.2Ω+0.3Ω+0.4Ω+0.5Ω+12Ω=13.4Ω
12 Ω प्रतिरोधक से प्रवाहित होने वाली धारा 0.671 A है।
प्रश्न 33. 220 V की लाइन पर 5 A धारा प्रवाहित करने के लिए 176 Ω के कितने प्रतिरोधक (समानांतर में) आवश्यक हैं?
उत्तर : मान लें आवश्यक प्रतिरोधकों की संख्या ‘x’ है। प्रतिरोध R के समानांतर संयोजन का तुल्य प्रतिरोध इस प्रकार दिया जाता है:
प्रश्न 34. दिखाइए कि 6 Ω प्रतिरोध वाले तीन प्रतिरोधकों को किस प्रकार जोड़ा जाए ताकि संयोजन का प्रतिरोध (i) 9 Ω, (ii) 4 Ω हो।
उत्तर :
(ii) 4 Ω प्राप्त करने के लिए:
दो 6 Ω प्रतिरोधकों को श्रेणीक्रम (series) में जोड़ें:
तुल्य प्रतिरोध = 6+6=12Ω
अब इस 12 Ω को तीसरे 6 Ω के साथ समानांतर (parallel) में जोड़ें:
कुल प्रतिरोध =
प्रश्न 35. 220 V विद्युत आपूर्ति लाइन पर उपयोग के लिए बनाए गए कई विद्युत बल्ब 10 W के रेटेड हैं। यदि अधिकतम अनुमेय धारा 5 A है, तो 220 V लाइन के दो तारों के बीच कितने बल्बों को एक-दूसरे के साथ समानांतर में जोड़ा जा सकता है?
उत्तर : बल्ब का प्रतिरोध निम्न व्यंजक का उपयोग करके निकाला जा सकता है P1=V2 /R1 R1 =V2 /P1 मान रखने पर, हमें प्राप्त होता है

अतः 110 बल्बों को समानांतर में जोड़ा जा सकता है।
प्रश्न 36. एक विद्युत ओवन की हॉट प्लेट 220 V लाइन से जुड़ी है, जिसमें दो प्रतिरोध कुंडलियाँ A और B हैं, प्रत्येक का प्रतिरोध 24 Ω है। इन्हें अलग-अलग, श्रेणीक्रम (series) में या समानांतर (parallel) में उपयोग किया जा सकता है। तीनों स्थितियों में धारा ज्ञात कीजिए।
उत्तर : (i) जब केवल एक कुंडली उपयोग की जाती है:
(ii) जब श्रेणीक्रम (series) में जोड़ा जाए:
(iii) जब समानांतर (parallel) में जोड़ा जाए:
प्रश्न .37 निम्नलिखित परिपथों में 2 Ω प्रतिरोधक में उपयोग की गई शक्ति की तुलना कीजिए:
(i) 1 Ω और 2 Ω प्रतिरोधकों के साथ श्रेणीक्रम (series) में जुड़ी 6 V की बैटरी, और
(ii) 12 Ω और 2 Ω प्रतिरोधकों के साथ समानांतर (parallel) में जुड़ी 4 V की बैटरी।
उत्तर : (i) विभवांतर 6 V है और 1 Ω तथा 2 Ω प्रतिरोधक श्रेणीक्रम (series) में जुड़े हैं, अतः उनका तुल्य प्रतिरोध इस प्रकार दिया जाता है:
1 Ω + 2 Ω = 3 Ω।
परिपथ में धारा को ओम के नियम का उपयोग करके निम्न प्रकार से गणना किया जा सकता है:

अतः 2 Ω प्रतिरोधक द्वारा उपभोग की गई शक्ति 8 W है।
(ii) जब 12 Ω और 2 Ω प्रतिरोधक समानांतर (parallel) में जुड़े होते हैं, तो प्रतिरोधकों के सिरों के बीच विभवांतर समान रहता है। यह जानते हुए कि 2 Ω प्रतिरोधक के सिरों के बीच विभवांतर 4 V है,
हम प्रतिरोधक द्वारा उपभोग की गई शक्ति निम्न प्रकार से ज्ञात कर सकते हैं:

2 Ω प्रतिरोधक द्वारा उपभोग की गई शक्ति 8 W है।
प्रश्न 38. दो लैम्प, जिनमें एक 100 W (220 V) और दूसरा 60 W (220 V) रेटेड है, 220 V की विद्युत आपूर्ति से समानांतर (parallel) में जुड़े हैं। यदि आपूर्ति वोल्टेज 220 V है, तो लाइन से कितनी धारा ली जाएगी?
उत्तर : चूंकि दोनों बल्ब समानांतर (parallel) में जुड़े हैं, इसलिए प्रत्येक के सिरों पर विभवांतर समान होगा।
100 W रेटिंग वाले बल्ब द्वारा ली गई धारा इस प्रकार निकाली जा सकती है:
P = V × I
I = P/V
समीकरण में मान रखने पर, हमें प्राप्त होता है:
I = 100 W / 220 V = 100/220 A
इसी प्रकार 60 W रेटिंग वाले बल्ब द्वारा ली गई धारा इस प्रकार निकाली जा सकती है:
I = 60 W / 220 V = 60/220 A
अतः लाइन से ली जाने वाली कुल धारा है
प्रश्न 39. कौन अधिक ऊर्जा उपयोग करता है, 1 घंटे में 250 W का टीवी सेट या 10 मिनट में 1200 W का टोस्टर?
उत्तर :
तुलना: टीवी सेट द्वारा उपयोग की गई ऊर्जा = 250 Wh
टोस्टर द्वारा उपयोग की गई ऊर्जा = 200 Wh
अतः अधिक ऊर्जा 250 W का टीवी सेट उपयोग करता है।
प्रश्न 40. 8 Ω प्रतिरोध वाला एक विद्युत हीटर सेवा मेन्स से 15 A धारा लेता है और 2 घंटे तक चलता है। हीटर में ऊष्मा उत्पन्न होने की दर (rate) ज्ञात कीजिए।
उत्तर : ऊष्मा विकसित होने की दर को निम्न सूत्र का उपयोग करके निकाला जा सकता है: P = I²R
समीकरण में मान रखने पर, हमें प्राप्त होता है:
P = (15 A)² × 8 Ω = 1800 watt
विद्युत हीटर 1800 watt की दर से ऊष्मा उत्पन्न करता है।
प्रश्न 41. निम्नलिखित की व्याख्या कीजिए:
(a) टंगस्टन का उपयोग विद्युत बल्ब के फिलामेंट के लिए लगभग पूरी तरह क्यों किया जाता है?
टंगस्टन का उपयोग बल्ब के फिलामेंट के लिए किया जाता है क्योंकि इसका गलनांक बहुत अधिक होता है तथा इसकी प्रतिरोधकता भी अधिक होती है। इससे यह उच्च तापमान को बिना पिघले सहन कर सकता है और धारा प्रवाहित होने पर अधिक ऊष्मा उत्पन्न करता है, जिससे प्रकाश उत्पन्न होता है।
(b) ब्रेड-टोस्टर और विद्युत इस्तरी जैसे विद्युत हीटिंग उपकरणों के चालक शुद्ध धातु के बजाय मिश्रधातु से क्यों बनाए जाते हैं?
विद्युत हीटिंग उपकरणों में मिश्रधातु का उपयोग किया जाता है क्योंकि उनकी प्रतिरोधकता शुद्ध धातुओं की तुलना में अधिक होती है। इससे विद्युत धारा प्रवाहित होने पर अधिक ऊष्मा उत्पन्न होती है, जो हीटिंग उपकरणों के लिए आवश्यक होती है।
(c) घरेलू परिपथों में श्रेणीक्रम (series) संयोजन का उपयोग क्यों नहीं किया जाता?
श्रेणीक्रम संयोजन घरेलू परिपथों में उपयोग नहीं किया जाता क्योंकि:
इसमें वोल्टेज सभी उपकरणों में विभाजित हो जाता है, जिससे प्रत्येक उपकरण को पर्याप्त वोल्टेज नहीं मिलता।
यदि एक उपकरण खराब हो जाए, तो पूरा परिपथ बंद हो जाता है।
कुल प्रतिरोध बढ़ जाता है, जिससे धारा कम हो जाती है।
(d) किसी तार का प्रतिरोध उसके अनुप्रस्थ क्षेत्रफल के साथ कैसे बदलता है?
प्रतिरोध अनुप्रस्थ क्षेत्रफल के व्युत्क्रमानुपाती होता है। अर्थात, जैसे-जैसे तार का क्षेत्रफल बढ़ता है, उसका प्रतिरोध घटता है और जैसे-जैसे क्षेत्रफल घटता है, प्रतिरोध बढ़ता है। मोटा तार कम प्रतिरोध रखता है जबकि पतला तार अधिक प्रतिरोध रखता है।
(e) विद्युत ऊर्जा के संचरण में तांबा और एल्यूमिनियम के तारों का उपयोग क्यों किया जाता है?
तांबा और एल्यूमिनियम अच्छे चालक होते हैं और उनकी प्रतिरोधकता कम होती है। इससे ऊर्जा का ह्रास कम होता है और विद्युत धारा को दूर तक कुशलतापूर्वक पहुँचाया जा सकता है।
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