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कक्षा 10 हिंदी क्षितिज अध्याय 9 लखनवी अंदाज़ NCERT Solution

कक्षा 10 हिंदी (क्षितिज) यशपाल द्वारा रचित अध्याय 9 'लखनवी अंदाज़' के सटीक NCERT सॉल्यूशंस। बोर्ड परीक्षा 2026 की बेहतरीन तैयारी, त्वरित रिवीजन और बेहतर उत्तर-लेखन के लिए महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर और क्रिया-भेद यहाँ पढ़ें।
authorImageEkta Rakesh Singh14 Aug, 2026
कक्षा 10 हिंदी क्षितिज अध्याय 9 लखनवी अंदाज़ NCERT Solution

 

यशपाल द्वारा रचित अध्याय 9 'लखनवी अंदाज़' आपको अध्याय के विचारों और संदर्भ की गहरी समझ हासिल करने में मदद करता है। यह अध्याय लखनऊ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, विनम्र भाषा और परिष्कृत शिष्टाचार (refined manners) से परिचय कराता है। ये सॉल्यूशंस इसके सूक्ष्म हास्य, सामाजिक रीति-रिवाजों और अनूठी तहज़ीब को समझाते हैं, जिससे रिवीजन और उत्तर-लेखन कौशल में सुधार के साथ-साथ विषयों (themes), पात्रों और संवादात्मक लहजे को समझना आसान हो जाता है।

NCERT कक्षा 10 हिंदी लखनवी अंदाज़ NCERT Solution

कक्षा 10 हिंदी 'लखनवी अंदाज़' के प्रश्न-उत्तर के लिए NCERT सॉल्यूशंस आपको अध्याय के मुख्य विचारों—लखनऊ की समृद्ध संस्कृति, परिष्कृत तहज़ीब और संवाद की सुरुचिपूर्ण शैली को स्पष्ट रूप से समझने में मदद करते हैं। इन प्रश्नों का अभ्यास करके, आप उत्तर-लेखन कौशल में सुधार कर सकते हैं, विचारों को अधिक प्रभावी ढंग से व्यक्त कर सकते हैं और आत्मविश्वास बढ़ा सकते हैं। अध्याय को ध्यान से पढ़ने और सारांश का संदर्भ लेने से भी आपको अर्थ और विषयों को अधिक स्पष्ट रूप से समझने में मदद मिलती है।

Chapter 9 लखनवी अंदाज़

1. लेखक को नवाब साहब के किन हाव-भावों से महसूस हुआ कि वे उनसे बातचीत करने के लिए तनिक भी उत्सुक नहीं हैं ?

उत्तर:- लेखक के अचानक डिब्बे में कूद पड़ने से नवाब-साहब की आँखों में एकांत चिंतन में खलल पड़ जाने का असंतोष दिखाई दिया। ट्रेन में लेखक के साथ बात-चीत करने के लिए नवाब साहब ने कोई उत्साह नहीं प्रकट किया। लेखक से कोई बातचीत भी नहीं की और न ही उनकी तरफ देखा। इससे लेखक को स्वयं के प्रति नवाब साहब की उदासीनता का आभास हुआ।

2. नवाब साहब ने बहुत ही यत्न से खीरा काटा, नमक-मिर्च बुरका, अंतत: सूँघकर ही खिड़की से बाहर फेंक दिया। उन्होंने ऐसा क्यों किया होगा ? उनका ऐसा करना उनके कैसे स्वभाव को इंगित करता है ?
उत्तर:- नवाब साहब द्वारा दिए गए खीरा खाने के प्रस्ताव को लेखक ने अस्वीकृत कर दिया। खीरे को खाने की इच्छा तथा सामने वाले यात्री के सामने अपनी झूठी साख बनाए रखने के उलझन में नवाब साहब ने खीरा खाने की सोची परन्तु जीत नवाब के दिखावे की हुई। और इसी इरादे से नवाब साहब ने खीरा सूँघ कर फेंक दिया ।
नवाब के इस स्वभाव से ऐसा प्रतीत होता है कि वो दिखावे की जिंदगी जीते हैं। खुद को अमीर सिद्ध करने के लिए वो कुछ भी कर सकते हैं।

3. बिना विचार, घटना और पात्रों के भी क्या कहानी लिखी जा सकती है। यशपाल के इस विचार से आप कहाँ तक सहमत हैं?
उत्तर:- हम लेखक यशपाल के विचारों से पूरी तरह सहमत हैं। किसी भी कहानी की रचना उसके आवश्यक तत्वों – कथावस्तु, घटना, पात्र आदि के बिना संभव नहीं होती। घटना तथा कथावस्तु कहानी को आगे बढ़ाते हैं, पात्रों द्वारा संवाद कहे जाते हैं। कहानी में कोई न कोई विचार, बात या उद्देश्य भी अवश्य होना चाहिए। ये कहानी के लिए आवश्यक तत्व हैं।

4. आप इस निबंध को और क्या नाम देना चाहेंगे?
उत्तर:- इस कहानी का नाम ‘झूठा दिखावा’ ‘नवाबी शान’, या ‘आडम्बर’ भी रखा जा सकता है, क्योंकि नवाब ने अपनी झूठी शान-शौकत को कायम रखने के लिए अपनी इच्छा को ही दबा दिया। साथ ही उनके नवाबी स्वभाव, सामंती-वर्ग की बनावटी जीवन-शैली व दिखावे को सिद्ध करता है।

• रचना और अभिव्यक्ति

5.1 नवाब साहब द्वारा खीरा खाने की तैयारी करने का एक चित्र प्रस्तुत किया गया है। इस पूरी प्रक्रिया को अपने शब्दों में व्यक्त कीजिए।
उत्तर:- सेकंड क्लास के एकांत डिब्बे में बैठे नवाब साहब खीरा खाने की इच्छा से दो ताज़े खीरे एक तौलिए पर रखे हुए थे। पहले तो उन्होंने खीरे को खिड़की से बाहर निकालकर लोटे के पानी से धोया और तौलिए से साफ़ कर पानी सुखा लिया जेब से चाकू निकाला। दोनों खीरों के सिर काटे और उन्हें गोद कर झाग निकाला। फिर खीरों को बहुत सावधानी से छीलकर फाँको पर बहुत कायदे से जीरा, नमक-मिर्च की सुर्खी बुरक दी। इसके बाद एक-एक करके उन फाँको को उठाते गए और उन्हें सूँघकर खिड़की से बाहर फेंकते गए।

5.2 किन-किन चीज़ों का रसास्वादन करने के लिए आप किस प्रकार की तैयारी करते हैं?
उत्तर:- हम खीर का रसास्वादन करने के लिए उसे अच्छी तरह से एक कटोरी में रखते हैं तथा उसके ऊपर काजू, किशमिश, बादाम और पिस्ता डालकर अच्छी तरह से उसे सजाते हैं और फिर उसका स्वाद लेते हैं ।

6. खीरे के संबंध में नवाब साहब के व्यवहार को उनकी सनक कहा जा सकता है। आपने नवाबों की और भी सनकों और शौक के बारे में पढ़ा-सुना होगा।किसी एक के बारे में लिखिए।
उत्तर:- पाठ में प्रस्तुत खीरे के प्रसंग द्वारा नवाब के दिखावटी ज़िंदगी का पता चलता है, इससे उनके सनकी व्यक्तित्व का ज्ञान होता है। ऐसे ही एक सनक यह भी हो सकती है –
नवाब अपनी शान और शौकत के लिए पैसे लुटाने से बाज़ नहीं आते हैं। फिर चाहे उनके घर में पैसों की तंगी ही क्यों न हो पर बाहर वे खूब पैसे लुटाते हैं।

7. क्या सनक का कोई सकारात्मक रूप हो सकता है? यदि हाँ तो ऐसी सनकों का उल्लेख कीजिए।
उत्तर:- सनक के दो रुप होते हैं। ऐसे कुछ सनकों का उल्लेख नीचे दिया जा रहा है –
एक सकारात्मक तथा दूसरा नकारात्मक। जहाँ एक ओर नकारात्मक सनक किसी व्यक्ति को समाज में हँसी -मजाक का पात्र बना देता है वहीं सनक का सकारात्मक पक्ष उसे रातों-रात प्रसिद्ध कर देता है।
मदर टेरेसा को सनक थी गरीब और बेसहारा लोगों की मदद करने की,तो हमारे देश के देशभक्त नेताओं को देश को आज़ादी, दिलाने की सनक सवार थी, महात्मा बुद्ध की सत्य को खोने की सनक ने उन्हें गौतम बुद्ध का दर्जा दिला दिया।

• भाषा-अध्ययन

8.1 निम्नलिखित वाक्यों में से क्रियापद छाँटकर क्रिया-भेद भी लिखिए –


एक सफेदपोश सज्जन बहुत सुविधा से पालथी मारे बैठे थे।

उत्तर:- बैठे थे – अकर्मक क्रिया

नवाब साहब ने संगति के लिए उत्साह नहीं दिखाया।

उत्तर:- दिखाया – सकर्मक

ठाली बैठे, कल्पना करते रहने की पुरानी आदत है।
उत्तर:- कल्पना करना – अकर्मक
है – अकर्मक

अकेले सफ़र का वक्त काटने के लिए ही खीरे खरीदे होंगे।

उत्तर:- काटना – सकर्मक
खरीदे होंगे – सकर्मक

दोनों खीरों के सिरे। काटे और उन्हें गोदकर झाग निकाला

उत्तर:- काटा – सकर्मक
गोदकर – सकर्मक
निकाला – सकर्मक

नवाब साहब ने सतृष्ण आँखों से नमक – मिर्च के संयोग से चमकती खीरे की फाँको की ओर देखा।

उत्तर:- देखा – अकर्मक (प्रयोग)

नवाब साहब खीरे की तैयारी और इस्तेमाल से थककर लेट गए।

उत्तर:- लेट गए – अकर्मक
थककर – अकर्मक

जेब से चाकू निकाला।

उत्तर:- निकाला – सकर्मक

NCERT Solutions kaksha 10 Lakhnavi Andaaz FAQs

'Lucknovee andaaz' ka mukhya vishay kya hai?

यह अध्याय लखनऊ की परिष्कृत संस्कृति, विनम्र वाणी और शिष्ट व्यवहार पर प्रकाश डालता है।

Is adhyay ke mukhya patra kaun hai?

इस अध्याय के मुख्य पात्र स्वयं लेखक (यशपाल) और ट्रेन के डिब्बे में सफर कर रहे एक 'नवाब साहब' हैं, जो अपनी दिखावटी रईसी का प्रदर्शन करते हैं।

Vidyarthiyon ke liye is adhyay ka adhyayan karna mahatvapurn kyon hai?

यह अध्याय छात्रों को समाज में व्याप्त पाखंड, दिखावे की प्रवृत्ति और सामंती मानसिकता को समझने में मदद करता है। साथ ही, यह हिंदी साहित्य की व्यंग्य विधा और उत्कृष्ट संवाद शैली को सीखने के लिए भी महत्वपूर्ण है।
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