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SSC GD Hindi विराम चिन्ह से बार-बार पूछे जाने वाले प्रश्नों की पूरी जानकरी

विराम चिन्ह हिंदी व्याकरण का महत्वपूर्ण विषय है। इनका प्रयोग वाक्य में रुकने, ठहरने, प्रश्न पूछने, भाव व्यक्त करने और किसी बात को स्पष्ट करने के लिए किया जाता है। अल्पविराम, अर्धविराम, पूर्णविराम, प्रश्नवाचक, विस्मयादिबोधक, उद्धरण और कोष्ठक आदि प्रमुख विराम चिन्ह हैं। SSC GD जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं में इनसे संबंधित प्रश्न पूछे जा सकते हैं।
authorImagePriyanka Yadav30 Jul, 2026
SSC GD Hindi विराम चिन्ह से बार-बार पूछे जाने वाले प्रश्नों की पूरी जानकरी

SSC GD परीक्षा की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए हिंदी व्याकरण एक महत्वपूर्ण विषय है। हिंदी में विराम चिन्हों से जुड़े प्रश्न परीक्षा में पूछे जा सकते हैं। अल्पविराम, अर्धविराम, पूर्णविराम, प्रश्नवाचक, विस्मयादिबोधक, उद्धरण चिन्ह और योजक चिन्ह जैसे विराम चिन्हों का सही प्रयोग जानना जरूरी है। यहां SSC GD हिंदी के लिए महत्वपूर्ण विराम चिन्ह, उनके प्रतीक, प्रयोग और आसान उदाहरणों के साथ बार-बार पूछे जाने वाले प्रश्नों को समझें , और अपनी परीक्षा तैयारी बेहतर करें।

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विराम चिन्ह क्या हैं?

विराम चिन्ह हिंदी व्याकरण का एक महत्वपूर्ण भाग हैं। लिखित भाषा में किसी वाक्य में ठहराव, विराम, प्रश्न, भाव या अर्थ की स्पष्टता देने के लिए विराम चिन्हों का प्रयोग किया जाता है। इनके सही प्रयोग से वाक्य का अर्थ आसानी से समझ में आता है और गलतफहमी की संभावना कम होती है।

उदाहरण के लिए, "मयंक पढ़ रहा है।" एक सामान्य कथन है, जबकि "मयंक कहाँ जा रहा है?" एक प्रश्नवाचक वाक्य है। दोनों वाक्यों के अंत में अलग-अलग विराम चिन्हों का प्रयोग किया गया है। SSC GD परीक्षा की तैयारी करने वाले अभ्यर्थियों को प्रमुख विराम चिन्हों के नाम, प्रतीक और उनके प्रयोग को अच्छी तरह समझना चाहिए।

विराम चिन्ह के प्रमुख प्रकार

विराम चिन्ह हिंदी भाषा को स्पष्ट और व्यवस्थित बनाते हैं। इनके प्रमुख प्रकारों में अल्पविराम, अर्धविराम, पूर्णविराम, प्रश्नवाचक, विस्मयादिबोधक, उद्धरण, कोष्ठक जैसे अन्य चिन्ह शामिल हैं। 

1. अल्पविराम (,)

अल्पविराम का प्रयोग वाक्य में बहुत थोड़े समय के लिए रुकने या अलग-अलग शब्दों को क्रम से लिखने के लिए किया जाता है।

उदाहरण:

  • राम, श्याम और मोहन बाजार गए।

  • सेब, केला, अंगूर और आम मेरे पसंदीदा फल हैं।

याद रखें: अल्पविराम = थोड़ा रुकना

2. अर्धविराम (;)

अर्धविराम का प्रयोग अल्पविराम से अधिक और पूर्णविराम से कम ठहराव दिखाने के लिए किया जाता है। इसका प्रयोग प्रायः आपस में संबंधित वाक्यांशों या वाक्यों को जोड़ने के लिए होता है।

उदाहरण:

  • वह बहुत मेहनती है; इसलिए वह सफल है।

  • सूरज निकल गया; पक्षी चहचहाने लगे।

याद रखें: अर्धविराम = अल्पविराम से अधिक ठहराव

3. पूर्णविराम (।)

पूर्णविराम का प्रयोग किसी पूर्ण वाक्य या विचार के समाप्त होने पर किया जाता है। हिंदी भाषा में पूर्णविराम का चिह्न "।" होता है।

उदाहरण:

  • वह बाजार गया।

  • मैं रोज स्कूल जाता हूँ।

  • आज मौसम बहुत अच्छा है।

याद रखें: पूर्णविराम = वाक्य की पूर्ण समाप्ति

4. उपविराम (:)

उपविराम का प्रयोग किसी बात के आगे उदाहरण, सूची या स्पष्टीकरण देने के लिए किया जाता है।

उदाहरण:

  • मेरे प्रिय फल हैं: आम, केला और अंगूर।

  • शिक्षक ने कहा: समय का सदुपयोग करो।

5. विस्मयादिबोधक चिन्ह (!)

विस्मयादिबोधक चिन्ह का प्रयोग आश्चर्य, खुशी, दुख, क्रोध, घृणा, उत्साह आदि भावों को व्यक्त करने के लिए किया जाता है।

उदाहरण:

  • वाह! कितना सुंदर दृश्य है!

  • अरे! तुम यहाँ कैसे?

  • छी! कितनी गंदगी है!

विस्मयादिबोधक चिन्ह = भाव या विस्मय से जुडा है l 

6. प्रश्नवाचक चिन्ह (?)

प्रश्नवाचक चिन्ह का प्रयोग प्रश्न पूछने वाले वाक्यों के अंत में किया जाता है।

उदाहरण:

  • तुम कहाँ जा रहे हो?

  • तुम क्या खाओगे?

  • तुम किसके साथ जा रहे हो?

याद रखें: प्रश्नवाचक चिन्ह = प्रश्न

7. कोष्ठक ( )

कोष्ठक का प्रयोग वाक्य में अतिरिक्त जानकारी, स्पष्टीकरण या किसी विशेष तथ्य को अलग से बताने के लिए किया जाता है।

उदाहरण:

  • महात्मा गांधी (राष्ट्रपिता) का जन्म गुजरात में हुआ।

  • दिल्ली (भारत की राजधानी) एक प्रमुख शहर है।

8. योजक चिन्ह (-)

योजक चिन्ह का प्रयोग दो शब्दों को जोड़ने के लिए किया जाता है। इसका प्रयोग विशेष रूप से ऐसे शब्दों में किया जाता है, जिनका आपस में घनिष्ठ संबंध हो।

उदाहरण:

  • माता-पिता

  • दिन-रात

  • सुख-दुख

याद रखें: योजक चिन्ह = शब्दों को जोड़ना

9. उद्धरण चिन्ह (" ")

उद्धरण चिन्ह का प्रयोग किसी व्यक्ति के कथन या कहे गए शब्दों को उसी रूप में लिखने के लिए किया जाता है।

उदाहरण:

  • उसने कहा, "मैं कल आऊँगा।"

  • शिक्षक ने कहा, "समय का सदुपयोग करो।"

10. संक्षेप या लाघव चिन्ह (.)

लाघव चिन्ह का प्रयोग किसी शब्द के संक्षिप्त रूप को दर्शाने के लिए किया जाता है।

उदाहरण:

  • डॉक्टर → डॉ.

  • प्रोफेसर → प्रो.

11. विवरण चिन्ह (:-)

विवरण चिन्ह का प्रयोग किसी विषय के बारे में विस्तार से जानकारी, उदाहरण या सूची प्रस्तुत करने के लिए किया जाता है।

उदाहरण:

  • पदार्थ की तीन अवस्थाएँ हैं: ठोस, द्रव और गैस।

  • परीक्षा के लिए आवश्यक सामग्री: प्रवेश पत्र, पहचान पत्र और पेन।

12. रेखांकन चिन्ह

रेखांकन चिन्ह का प्रयोग किसी महत्वपूर्ण शब्द या वाक्यांश पर विशेष ध्यान आकर्षित करने के लिए किया जाता है।

उदाहरण:

भारत की राजधानी नई दिल्ली है।

13. लोप चिन्ह (…)

लोप चिन्ह का प्रयोग किसी वाक्य या कथन के कुछ अंश के छूट जाने, अधूरा रह जाने या बात के आगे जारी रहने को दिखाने के लिए किया जाता है।

उदाहरण:

  • मैं सोच रहा था… अब क्या करूँ?

  • उसने कहा कि अगर तुम…

14. पुनरुक्ति सूचक चिन्ह (२)

पुनरुक्ति सूचक चिन्ह का प्रयोग किसी शब्द की पुनरावृत्ति को दर्शाने के लिए किया जाता है, ताकि एक ही शब्द को दोबारा लिखने की आवश्यकता न पड़े।

उदाहरण:

  • धीरे-धीरे

  • घर-घर

पुनरुक्ति को दर्शाने के लिए परंपरागत रूप से "२" का प्रयोग भी किया जाता है।

15. विस्मरण या त्रुटिपूरक चिन्ह

इस चिन्ह का प्रयोग लिखते समय छूटे हुए शब्द या अक्षर को बाद में जोड़ने के लिए किया जाता है। इसे प्रायः ऊपर की ओर संकेत करके दर्शाया जाता है।

उदाहरण:
यदि वाक्य लिखते समय कोई शब्द छूट गया हो, तो उसे संबंधित स्थान पर बाद में जोड़ा जा सकता है।

16. तुल्यता चिन्ह (=)

तुल्यता चिन्ह का प्रयोग दो वस्तुओं, संख्याओं या मानों के बराबर या समान होने को दर्शाने के लिए किया जाता है।

उदाहरण:

  • 1 मीटर = 100 सेंटीमीटर

  • 2 + 2 = 4

17. निर्देशक चिन्ह (—)

निर्देशक चिन्ह का प्रयोग किसी निर्देश, स्पष्टीकरण, विशेष कथन या आगे कही जाने वाली बात को स्पष्ट करने के लिए किया जाता है।

उदाहरण:

  • शिक्षक ने कहा — नियमित रूप से पढ़ाई करो।

  • एक बात हमेशा याद रखो — समय बहुत महत्वपूर्ण है।

18. अवग्रह चिन्ह (ऽ)

अवग्रह चिन्ह (ऽ) का प्रयोग किसी शब्द में छूटे हुए ‘अ’ स्वर को दर्शाने के लिए किया जाता है। इसका प्रयोग विशेष रूप से संस्कृतनिष्ठ शब्दों में देखने को मिलता है।

उदाहरण:

  • नमोऽस्तुते देव।

  • सोऽहम्।

योजक चिन्ह और निर्देशक चिन्ह में अंतर

योजक चिह्न और निर्देशक चिह्न दोनों का प्रयोग अलग-अलग उद्देश्यों के लिए किया जाता है। योजक शब्दों को जोड़ता है, जबकि निर्देशक चिन्ह निर्देश या स्पष्टीकरण दर्शाता है। 

 

आधार 

योजक चिन्ह (-) 

निर्देशक चिन्ह (—) 

आकार 

छोटा 

अपेक्षाकृत लंबा 

मुख्य प्रयोग 

दो शब्दों को जोड़ने के लिए 

निर्देश या स्पष्टीकरण देने के लिए 

उदाहरण 

माता-पिता 

शिक्षक ने कहा — पढ़ो। 

 

SSC GD परीक्षा में हिंदी व्याकरण के अंतर्गत विराम चिन्ह एक महत्वपूर्ण विषय है। अभ्यर्थियों को अल्पविराम, अर्धविराम, पूर्णविराम, प्रश्नवाचक, विस्मयादिबोधक, योजक, निर्देशक, उद्धरण और अवग्रह चिन्ह के प्रयोग को समझना चाहिए। इनके प्रतीक और उदाहरणों का नियमित अभ्यास करने से परीक्षा में पूछे जाने वाले प्रश्नों को हल करना आसान होगा और हिंदी विषय की तैयारी मजबूत होगी। 

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SSC GD Hindi Viram Chinh FAQs

Q1: Hindi mein Viram Chinhon ka mukhya uddeshya kya hai?

उत्तर: विराम चिन्हों का मुख्य उद्देश्य लिखित भाषा में ठहराव, विराम, प्रश्न, भाव और अर्थ को स्पष्ट करना है। इनके सही प्रयोग से वाक्य को समझना आसान होता है।

Q2: Alpviram aur Ardhviram mein kya antar hai?

उत्तर: अल्पविराम का प्रयोग कम ठहराव के लिए किया जाता है, जबकि अर्धविराम अल्पविराम की तुलना में अधिक ठहराव को दर्शाता है।

Q3: Vismayadibodhak Chinh ka prayog kab kiya jata hai?

उत्तर: इसका प्रयोग खुशी, आश्चर्य, दुख, क्रोध, घृणा या अन्य तीव्र भावनाओं को व्यक्त करने के लिए किया जाता है।

Q4: Uddharan Chinh ka prayog kis liye kiya jata hai?

उत्तर: उद्धरण चिन्ह का प्रयोग किसी व्यक्ति के कथन या उसके द्वारा कहे गए शब्दों को उसी रूप में प्रस्तुत करने के लिए किया जाता है।
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