मध्य प्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (MPESB) ने प्राथमिक एवं माध्यमिक कक्षाओं में अध्यापन कर रहे शिक्षकों के लिए पात्रता परीक्षा 2026 (MSPSTET 2026) का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। नोटिफिकेशन जारी होने के साथ ही परीक्षा का विस्तृत विषयवार सिलेबस भी उपलब्ध करा दिया गया है। परीक्षा की तैयारी कर रहे अभ्यर्थी अब आधिकारिक पाठ्यक्रम के अनुसार अपनी तैयारी की रणनीति बना सकते हैं। पाठ्यक्रम में बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र, हिंदी भाषा, अंग्रेजी भाषा, संस्कृत भाषा, उर्दू भाषा, गणित और पर्यावरण अध्ययन से संबंधित विषय शामिल हैं।
नीचे परीक्षा में शामिल विषयों और उनके अंतर्गत पूछे जाने वाले प्रश्नों का विस्तृत विवरण दिया गया है।
बाल विकास की अवधारणा एवं इसका अधिगम से संबंध।
विकास और विकास को प्रभावित करने वाले कारक।
बाल विकास के सिद्धांत।
बालकों का मानसिक स्वास्थ्य एवं व्यवहार संबंधी समस्याएं।
वंशानुक्रम एवं वातावरण का प्रभाव।
समाजीकरण प्रक्रियाएं: सामाजिक जगत एवं बच्चे (शिक्षक, अभिभावक, साथी)।
पियाजे, पावलाव, कोहलर और थार्नडाइक: रचना एवं आलोचनात्मक स्वरूप।
बाल-केंद्रित एवं प्रगतिशील शिक्षा की अवधारणा।
बुद्धि की रचना का आलोचनात्मक स्वरूप और उसका मापन, बहुआयामी बुद्धि।
व्यक्तित्व और उसका मापन।
भाषा और विचार।
सामाजिक निर्माण के रूप में जेंडर, जेंडर की भूमिका, लिंगभेद और शैक्षिक प्रथाएं।
अधिगम कर्ताओं में व्यक्तिगत भिन्नताएं, भाषा, जाति, लिंग, संप्रदाय, धर्म आदि की विषमताओं पर आधारित भिन्नताओं की समझ।
अधिगम के लिए आकलन और अधिगम का आकलन में अंतर, शाला आधारित आकलन, सतत एवं समग्र मूल्यांकन: स्वरूप और प्रथाएं (मान्यताएं)।
अधिगमकर्ताओं की तैयारी के स्तर के आकलन हेतु उपयुक्त प्रश्नों का निर्माण, कक्षाकक्ष में अधिगम को बढ़ाने, आलोचनात्मक चिंतन तथा अधिगमकर्ता की उपलब्धि के आकलन के लिए।
अलाभान्वित एवं वंचित वर्गों सहित विविध पृष्ठभूमियों के अधिगमकर्ताओं की पहचान।
अधिगम कठिनाइयों, 'क्षति' आदि से ग्रस्त बच्चों की आवश्यकताओं की पहचान।
प्रतिभावान, सृजनात्मक, विशेष क्षमता वाले अधिगमकर्ताओं की पहचान।
समस्याग्रस्त बालक: पहचान एवं निदानात्मक पक्ष।
बाल अपराध: कारण एवं प्रकार।
बच्चे कैसे सोचते और सीखते हैं, बच्चे शाला प्रदर्शन में सफलता प्राप्त करने में क्यों और कैसे असफल होते हैं।
शिक्षण और अधिगम की मूलभूत प्रक्रियाएं, बच्चों के अधिगम की रणनीतियां, अधिगम एक सामाजिक प्रक्रिया के रूप में, अधिगम का सामाजिक संदर्भ।
समस्या समाधानकर्ता और वैज्ञानिक-अन्वेषक के रूप में बच्चा।
बच्चों में अधिगम की वैकल्पिक धारणाएं, बच्चों की त्रुटियों को अधिगम प्रक्रिया में सार्थक कड़ी के रूप में समझना। अधिगम को प्रभावित करने वाले कारक: अवधान और रुचि।
सज्ञान संवेद।
अभिप्रेरणा और अधिगम।
अधिगम में योगदान देने वाले कारक - व्यक्तिगत और पर्यावरणीय।
निर्देशन एवं परामर्श।
अभिक्षमता और उसका मापन।
स्मृति और विस्मृति।
भाषायी समझ/अवबोध के लिए दो अपठित दिए जायेंगे, जिसमें एक गद्यांश (नाटक/एकांकी/घटना/निबंध/कहानी/आदि से) तथा दूसरा अपठित पद्य के रूप में होगा। इस अपठित में से समझ/अवबोध, व्याख्या, व्याकरण एवं मौखिक योग्यता से संबंधित प्रश्न किए जायेंगे। गद्यांश साहित्यिक/वैज्ञानिक/विवरणात्मक हो सकता है। तत्कालिक घटनाओं पर आधारित हो सकता है।
भाषा सीखना और ग्रहणशीलता।
भाषा शिक्षण के सिद्धांत।
भाषा शिक्षण में सुनने, बोलने की भूमिका, भाषा के कार्य, बच्चे भाषा का प्रयोग कैसे करते हैं।
मौखिक और लिखित अभिव्यक्ति अन्तर्गत भाषा सीखने में व्याकरण की भूमिका।
भाषा शिक्षण में विभिन्न प्रकार के बच्चों की चुनौतियां, कठिनाइयां एवं त्रुटियां।
भाषा के चारों कौशल (सुनना, बोलना, पढ़ना, लिखना) का मूल्यांकन।
कक्षा में शिक्षण अधिगम सामग्री, पाठ्यपुस्तक, दुस्साध्य (दृश्य एवं श्रव्य) सामग्री, बहुकक्षा।
पुनः शिक्षण।
अवबोध, व्याकरण और मौखिक योग्यता से संबंधित प्रश्नों वाले दो अपठित गद्यांश (विवरणात्मक या साहित्यिक या कथात्मक या वैज्ञानिक)।
भाषा का अधिगम और अर्जन।
द्वितीय भाषा शिक्षण के सिद्धांत।
भाषा कौशल—सुनना, बोलना, पढ़ना, लिखना।
सुनने और बोलने की भूमिका, भाषा के कार्य तथा बच्चे भाषा का उपयोग एक उपकरण के रूप में कैसे करते हैं।
विचारों को मौखिक और लिखित रूप में संप्रेषित करने के लिए भाषा सीखने में व्याकरण की भूमिका।
विविधतापूर्ण कक्षा में भाषा शिक्षण की चुनौतियां, भाषा संबंधी कठिनाइयां।
शिक्षण-अधिगम सामग्री, पाठ्यपुस्तक, मल्टीमीडिया सामग्री, बहुभाषी कक्षा के संसाधन।
भाषा की समझ और दक्षता का मूल्यांकन—सुनना, बोलना, पढ़ना और लिखना।
उपचारात्मक शिक्षण (पुनः शिक्षण)।
भाषायी समझ/अवबोध के लिए दो अपठित दिए जायेंगे जिसमें एक गद्यांश (नाट्यांश/निबंध/कथा आदि से) तथा दूसरा अपठित पद्य के रूप में होगा। इन अपठित में से समझ/अवबोध, व्याकरण एवं शब्दार्थ से सम्बन्धित प्रश्न पूछे जायेंगे। नाट्यंश साहित्यिक/सामाजिक समरसता/तात्कालिक घटनाओं पर आधारित हो सकता है।
भाषा सीखना और ग्रहणशीलता।
भाषा शिक्षण के सिद्धांत।
भाषा शिक्षण में सुनने, बोलने की भूमिका, भाषा के कार्य, बच्चे भाषा का प्रयोग कैसे करते हैं।
मौखिक एवं लिखित संप्रेषण क्षमता विकसित करने में भाषा की भूमिका।
भाषा शिक्षण में विभिन्न स्तरों के बच्चों की चुनौतियां, कठिनाइयां, त्रुटियां एवं क्रमबद्धता।
भाषा के चारों कौशल (सुनना, बोलना, पढ़ना, लिखना) का मूल्यांकन।
कक्षा में शिक्षण अधिगम सामग्री, पाठ्यपुस्तक, दूरसंचार (दृश्य एवं श्रव्य) सामग्री, बहुकक्षा स्रोत।
पुनः शिक्षण।
दो गैर दरसी इख्तिसासात (मालूमाती/अदबी/बयानिया/साइंसी)।
सलाहित पर मबनी सवालात, कवायद, और जुबानी सलाहित पर मबनी सवालात।
सीखना और याद रखना।
जुबान की तदरीस के अमूल।
जुबान में सुनने और बोलने की अहमियत, जुबान का काम और बच्चों के जरिए जुबान की महारतों का इस्तेमाल।
जुबान सीखने और ख्यालात का जुबानी और तहरीरी इजहार करने में कवायद (ग्रामर) के रोल का तनकीदी जायजा।
क्लास रूम में मुख्तलिफ तालीमी इस्तेदाद वाले बच्चों की जुबान की मुश्किलात, गलतियों और बेहतरीनियों के चैलेंज को कुबूल करते हुए जुबान पढ़ाना।
जुबान की महारतें।
जुबान की सलाहियत और जुबान पर उबूर के तजुर्बे के लिए बोलना, सुनना, पढ़ना और लिखना।
तालीमी इमदादी अशिया (TLM), दरसी कुतुब और मल्टी मीडिया मटेरियल, क्लास रूम में मुहैया मुख्तलिफ जुबानों का मदद।
तदरीसी तदरीसा।
असनाफे नसर - कहानी, मालूमाती मजामीन, ड्रामा, मकाला।
असनाफे नज्म - नज्म, गीत।
ग्रामर - इस्म, जमीर, फेअल, सिफत, मेय किस्में जिन्स, जमाना, जुम्ले व मुहावरे, वाहिदजमा, मुजक्कर, मोअन्नस, तजाद, नज्म गीत वगैरह की तारीफ।
खतूत और दरख्वास्त नविसी।
गैर दरसी इख्तिसास।
मजमून नविसी।
संख्या पद्धति 1000 से बड़ी संख्याओं को पढ़ना व लिखना, 1000 से बड़ी संख्याओं पर स्थानीय मान की समझ व चार मूलभूत संक्रियाएं।
जोड़ना व घटाना - पांच अंकों तक की संख्याओं को जोड़ना व घटाना।
गुणा - 2 व 3 अंकों की संख्याओं का गुणा करना।
भाग - दो अंकों वाली संख्या से चार अंकों वाली संख्या में भाग देना।
भिन्न-भिन्न की अवधारणा, सरलतम रूप, समभिन्न, विषम भिन्न आदि भिन्नों का जोड़ना, घटाना, गुणा व भाग, समतुल्य भिन्न, भिन्न को दशमलव में तथा दशमलव संख्या को भिन्न में लिखना।
सामान्यतः प्रयोग होने वाली लंबाई, भार, आयतन की बड़ी व छोटी इकाई में संबंध।
बड़ी इकाइयों को छोटी इकाइयों में तथा छोटी इकाइयों को बड़ी इकाइयों में बदलना।
ज्ञात इकाइयों में किसी ठोस वस्तु का आयतन ज्ञात करना।
पैसा, लंबाई, भार, आयतन तथा समय अंतराल से संबंधित प्रश्नों में चार मूल गणितीय संक्रियाओं का उपयोग करना।
मीटर को सेंटीमीटर एवं सेंटीमीटर को मीटर में बदलना।
पैटर्न - संख्याओं से संबंधित पैटर्न को समझ आगे बढ़ाना, पैटर्न तैयार कर उसका संक्रियाओं के आधार पर सामान्यीकरण, त्रिभुजीय संख्याओं तथा वर्ग संख्याओं के पैटर्न पहचानना।
ज्यामिति - मूल ज्यामितीय अवधारणाएं, किरण, रेखाखण्ड, कोण (कोणों का वर्गीकरण), त्रिभुज, त्रिभुजों का वर्गीकरण (1) भुजाओं के आधार पर (2) कोणों के आधार पर। त्रिभुज के तीनों कोणों का योग 180° होता है।
वृत्त के केंद्र, त्रिज्या तथा व्यास की पहचान व समझ।
वृत्त, त्रिज्या व व्यास में परस्पर संबंध, सममित आकृति, परिवेश आधार पर समानान्तर रेखा व लम्बवत रेखा की समझ।
सरल ज्यामितीय आकृतियों (त्रिभुज, आयत, वर्ग) का क्षेत्रफल तथा परिमाप दी गई आकृति को इकाई मानकर ज्ञात करना।
परिवेश की 2D आकृतियों की पहचान।
दैनिक जीवन से संबंधित विभिन्न आंकड़ों को एकत्र करना।
घड़ी के समय को घंटे तथा मिनट में पढ़ना तथा AM और PM के रूप में व्यक्त करना।
24 घंटे की घड़ी का 12 घंटे की घड़ी से संबंध।
दैनिक जीवन की घटनाओं में लगने वाले समय अंतराल की गणना।
गुणा तथा भाग में पैटर्न की पहचान।
सममिति पर आधारित ज्यामिति पैटर्न।
दण्ड आलेख के माध्यम से प्रदर्शित कर उससे निष्कर्ष निकालना।
गणित शिक्षण द्वारा चिन्तन एवं तर्कशक्ति का विकास करना।
पाठ्यक्रम में गणित का स्थान।
गणित की भाषा।
प्रभावी शिक्षण हेतु परिवेश आधारित उपयुक्त शैक्षणिक सहायक सामग्री का निर्माण एवं उसका उपयोग करने की क्षमता का विकास करना।
मूल्यांकन की नवीन विधियां, निदानात्मक परीक्षण व पुनः शिक्षण की क्षमता का विकास करना।
गणित शिक्षण की नवीन विधियों का कक्षा शिक्षण में उपयोग करने की क्षमता।
परिवार और समाज से सहसंबंध - परिवार के बड़े-बूढ़े, बीमार, किशोर, विशिष्ट आवश्यकता वाले बच्चों की देखभाल और उनके प्रति हमारी संवेदनशीलता।
हमारे पशु, पक्षी - हमारे पालतू पशु-पक्षी, माल वाहक पशु, हमारे आस-पास के परिवेश में जीव-जन्तु एवं जानवरों पर प्रदूषण का प्रभाव।
हमारे पेड़-पौधे - स्थानीय पेड़-पौधे, पेड़-पौधों एवं मनुष्यों की अन्तःनिर्भरता, वनों की सुरक्षा और उनकी आवश्यकता और महत्त्व, पेड़-पौधों पर प्रदूषण का प्रभाव।
हमारे प्राकृतिक संसाधन - प्रमुख प्राकृतिक संसाधन, उनका संरक्षण, ऊर्जा के पारंपरिक और नवीनीकृत एवं अनवीनीकृत स्रोत।
खेल, व्यायाम और योगासन।
पारिवारिक उत्सव, विभिन्न मनोरंजन के साधन पुस्तकें, कहानियां, कठपुतली प्ले, मेला सांस्कृतिक कार्यक्रम एवं दिवसों को विद्यालय में मनाया जाना।
विभिन्न काम धंधे, उद्योग और व्यवसाय।
पशु, पक्षी और मनुष्य के विभिन्न आवास, आवास की आवश्यकता और स्वस्थ जीवन के लिए आवास की विशेषताएं।
स्थानीय इमारतों की सुरक्षा, सार्वजनिक संपत्ति, राष्ट्रीय धरोहर और उनकी देखभाल।
उत्तम आवास और उसके निर्माण में प्रयुक्त सामग्री, निर्माण सामग्री की गणना करना।
शौचालय की स्वच्छता, परिवेश की साफ-सफाई और अच्छी आदतें।
भोजन की आवश्यकता, भोजन के घटक।
फल एवं सब्जियों का महत्त्व, पौधों के अंगों के अनुसार फल, सब्जियां।
भोज्य पदार्थों का स्वास्थ्य वर्धक संयोजन।
विभिन्न प्रकार की आयु का भोजन और उनको ग्रहण करने का सही समय।
उत्तम स्वास्थ्य हेतु भोजन की स्वच्छता और सुरक्षा के उपाय।
खाद्य संसाधनों की सुरक्षा।
जीवन के लिए स्वच्छ पानी और स्वच्छ हवा की आवश्यकता।
स्थानीय मौसम, जल चक्र और जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और जलवायु परिवर्तन में हमारी भूमिका।
पानी के स्रोत, उसके सुरक्षित रखरखाव और संरक्षण एवं पोषण के तरीके।
संक्रमित वायु एवं पानी से होने वाले रोग, उनका उपचार और बचाव, अन्य संक्रामक रोग।
हवा, पानी, भूमि का प्रदूषण और उससे सुरक्षा, विभिन्न अपशिष्ट पदार्थों और उनका प्रबंधन, उचित निस्तारण।
भूकंप, बाढ़, सूखा आदि आपदाओं से सुरक्षा और बचाव के उपाय, आपदा प्रबंधन।
प्राकृतिक संसाधनों का संपोषित प्रबंधन, संसाधनों का उचित दोहन, डीजल, पेट्रोलियम खपत एवं संपोषण आदि।
मिट्टी, पानी, बीज और फसल का संबंध, जैविक रासायनिक खाद।
विभिन्न फसलें, उनके उत्पादक क्षेत्र।
फसल उत्पादन के लिए आवश्यक कृषि कार्य और उपकरण।
वनों की कटाई और शहरीकरण, पारिस्थितिक संतुलन पर प्रभाव।
ओजोन क्षय, अम्लीय वर्षा, ग्लोबल वार्मिंग, ग्रीन हाउस प्रभाव आदि के वैज्ञानिक कारण एवं निदान।
पॉलिथीन, प्लास्टिक का उपयोग और उनका अपघटक अपमार्जक।
जीवाश्म ईंधन के प्रयोग के प्रभाव।
आपदा प्रबंधन।
अंतरिक्ष वैज्ञानिकों का परिचय, उनके अंतरिक्ष में जीवन बिताने के अनुभव।
अंतरिक्ष जीवन के वैज्ञानिक तथ्य, जीवन की संभावनायें।
अंतरिक्ष यान, अंतरिक्ष खोजें एवं भविष्यवाणियां।
पर्यावरण अध्ययन की अवधारणा और उसकी आवश्यकता।
पर्यावरण अध्ययन का महत्त्व, समेकित पर्यावरणीय शिक्षा।
पर्यावरणीय शिक्षा के सूत्र एवं दायित्व।
पर्यावरणीय शिक्षा का विज्ञान और सामाजिक विज्ञान से सहसंबंध।
अवधारणाओं के स्पष्टीकरण हेतु प्रविधियां और गतिविधियां।
परिवेशीय भ्रमण, प्रयोगात्मक कार्य, प्रोजेक्ट कार्य और उनका महत्त्व।
चर्चा परिचर्चा, प्रस्तुतीकरण और समूह शिक्षण व्यवस्था से सीखना।
सतत-व्यापक मूल्यांकन, शिक्षण के दौरान प्रश्न पूछना, मुखर और लिखित अभिव्यक्ति के अवसर देना, वर्कशीट्स एवं एनेक्डॉटल रिकार्ड का प्रयोग, बच्चे की पोर्टफोलियो का विकास करना, केस स्टडी और व्यक्तिगत प्रोफाईल से शिक्षण व्यवस्थाएं।
पर्यावरणीय शिक्षा में शिक्षण सामग्री/सहायक सामग्री और उसका अनुप्रयोग।
स्थानीय परिवेश की पर्यावरणीय समस्याएं और उनके समाधान खोजने की क्षमता का विकास।
अभ्यर्थी MPESB MSPSTET 2026 का विषयवार विस्तृत सिलेबस PDF डाउनलोड करके सभी विषयों और टॉपिक्स की जानकारी देख सकते हैं। नीचे दिए गए लिंक से सिलेबस की PDF सीधे डाउनलोड करें और परीक्षा की तैयारी के लिए टॉपिक-वाइज प्लान बनाएं।
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MPESB MSPSTET 2026 का विस्तृत सिलेबस अभ्यर्थियों को परीक्षा की तैयारी के लिए स्पष्ट दिशा देता है। इसमें बाल विकास एवं शिक्षाशास्त्र, भाषाएं, गणित और पर्यावरण अध्ययन से जुड़े विषय शामिल हैं। अभ्यर्थियों को सलाह दी जाती है कि वे प्रत्येक विषय के टॉपिक्स को समझकर नियमित अध्ययन, रिवीजन और अभ्यास के साथ अपनी तैयारी करें।