राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) की ओर से Assistant Prosecution Officer (APO) Preliminary Examination 2026 का आयोजन 2 सितंबर 2026 को किया गया। परीक्षा एक ही शिफ्ट में दोपहर 12 बजे से 2 बजे तक आयोजित हुई। परीक्षा के बाद उम्मीदवारों से मिले प्रारंभिक फीडबैक के अनुसार इस बार RPSC APO Prelims 2026 का पेपर Moderate to Difficult रहा। कई उम्मीदवारों ने पेपर को सीधे तौर पर कठिन बताया।
इस बार परीक्षा में पुराने पैटर्न की तुलना में काफी बदलाव देखने को मिला। उम्मीदवारों के अनुसार पेपर में Direct Questions की संख्या कम रही, जबकि Conceptual, Case Law और Section/Clause-based Questions पर अधिक जोर दिया गया। ऐसे में जिन उम्मीदवारों ने विषयों की गहराई से तैयारी की थी, उनके लिए पेपर अपेक्षाकृत बेहतर रहा।
उम्मीदवारों से मिले फीडबैक के अनुसार इस बार RPSC APO Prelims का Overall Difficulty Level Moderate to Difficult रहा। कई उम्मीदवारों ने पेपर को Difficult बताया। पेपर में प्रश्नों को समझने और सही उत्तर तक पहुंचने में अपेक्षाकृत अधिक समय लगा।
पिछले वर्ष की तुलना में इस बार पेपर का पैटर्न भी काफी बदला हुआ नजर आया। जहां पहले Direct Questions अधिक पूछे जाते थे, वहीं इस बार अधिकांश प्रश्न Conceptual और Application-based रहे।
इस बार परीक्षा में Case Law-based Questions का महत्वपूर्ण हिस्सा देखने को मिला। उम्मीदवारों के फीडबैक के अनुसार लगभग 10 या उससे अधिक प्रश्न Case Laws पर आधारित थे।
इन प्रश्नों में केवल यह नहीं पूछा गया कि किसी Case में क्या फैसला दिया गया था, बल्कि यह भी पूछा गया कि:
किस Judge ने संबंधित Judgment दिया था?
किसी Case में क्या Decide नहीं किया गया था?
किसी Judgment में कौन-सा Statement Incorrect है?
किसी Case में किसी विशेष Section या Clause की क्या Interpretation की गई थी?
इस तरह के प्रश्नों के कारण उम्मीदवारों के लिए Case Laws को केवल सामान्य रूप से पढ़ना पर्याप्त नहीं रहा। उन्हें Case के Facts, Judgment और उसमें दिए गए महत्वपूर्ण Points की गहराई से जानकारी होना जरूरी था।
RPSC APO Prelims 2026 में अधिकांश प्रश्न Conceptual Nature के बताए जा रहे हैं। उम्मीदवारों के अनुसार Direct Section-based Questions बहुत कम देखने को मिले।
विशेष रूप से SC/ST Act और Minor Criminal Laws से जुड़े प्रश्नों में Sections और Clauses की गहराई से जानकारी को परखा गया। इससे उन उम्मीदवारों को कठिनाई हुई, जिन्होंने केवल महत्वपूर्ण Sections को याद करके तैयारी की थी।
पेपर में यह Approach देखने को मिली कि किसी Case में क्या घोषित किया गया, इसके बजाय कई बार यह पूछा गया कि उस Case में क्या घोषित नहीं किया गया था।
उम्मीदवारों के अनुसार Hindi Section इस बार काफी कठिन रहा। कुल 15 Questions Hindi से पूछे गए और इनका Level कई उम्मीदवारों को काफी High लगा।
फीडबैक के मुताबिक Hindi के प्रश्नों को समझने में भी समय लगा। इस वजह से उम्मीदवारों के लिए पूरे पेपर को निर्धारित समय में Attempt करना चुनौतीपूर्ण रहा।
Hindi की तरह English Section भी आसान नहीं बताया गया। इसका Difficulty Level Moderate to Difficult रहा।
English में भी सामान्य और सीधे प्रश्नों के बजाय अच्छे स्तर के प्रश्न पूछे गए, जिसके लिए उम्मीदवारों को Language की बेहतर समझ और Conceptual Preparation की आवश्यकता थी।
उम्मीदवारों के अनुसार Major Laws से पूछे गए कुछ प्रश्न अपेक्षाकृत आसान थे। उदाहरण के तौर पर BNSS आदि से जुड़े कुछ प्रश्न बहुत अधिक कठिन नहीं बताए गए।
वहीं, Minor Criminal Laws से पूछे गए प्रश्नों का Level काफी अच्छा और कठिन रहा। इनमें विशेष Sections, Clauses और Case Laws पर आधारित प्रश्न पूछे गए।
इस बार परीक्षा में कई प्रश्न ऐसे थे जिन्हें हल करने से पहले उन्हें ध्यान से पढ़ना जरूरी था। इसलिए पेपर केवल Knowledge-based नहीं था, बल्कि Time Management भी एक महत्वपूर्ण Factor रहा।
उम्मीदवारों के फीडबैक के अनुसार कई अभ्यर्थी 100 Questions Attempt नहीं कर पाए। कुछ उम्मीदवारों ने लगभग 70 से 80 Questions ही Attempt करने की बात कही, क्योंकि कई Questions को समझने और Analyze करने में अधिक समय लगा।
परीक्षा में कई Specific Case Laws से संबंधित प्रश्न पूछे गए। उदाहरण के तौर पर State of Karnataka vs. Dr. Praveen Bhai Thogadia, AIR 2004 SC 2081 जैसे Case से संबंधित प्रश्न शामिल होने की बात सामने आई है।
इसके अलावा Section 175(3) और Section 156(3) के बीच अंतर से संबंधित Case Law-based Question भी पूछा गया। इसी तरह FIR Registration और अन्य Criminal Law provisions से जुड़े महत्वपूर्ण Judgments पर भी प्रश्न देखने को मिले।
एक अन्य प्रश्न में यह पूछा गया कि किसी Cognizable Offence की जानकारी मिलने पर FIR Registration के संबंध में Supreme Court ने किस Case में क्या Observation दिया था।
इसके अलावा Neeraj Kumar alias Neeraj Yadav vs. State of U.P. जैसे Latest Case Law से संबंधित प्रश्न भी पूछे जाने की जानकारी सामने आई है।
उम्मीदवारों के अनुसार SC/ST Act से भी Case Law-based Questions पूछे गए। इनमें विशेष रूप से Sections और Clauses से जुड़े Points पर ध्यान दिया गया।
इसी तरह Juvenile Justice (JJ) Act से संबंधित Case Law से भी प्रश्न पूछे गए, जिसमें उम्मीदवारों से यह पहचानने के लिए कहा गया कि संबंधित Case के बारे में कौन-सा Statement Incorrect है।
इससे स्पष्ट है कि इस बार परीक्षा में केवल Bare Acts पढ़ना पर्याप्त नहीं था। उम्मीदवारों को संबंधित Acts के महत्वपूर्ण Case Laws की भी Detailed Preparation करनी जरूरी थी।
RPSC APO Prelims 2026 के पेपर में इस बार Overall Pattern में बदलाव दिखाई दिया। परीक्षा में:
Direct Questions कम पूछे गए।
Conceptual Questions अधिक रहे।
Case Law-based Questions की संख्या बढ़ी।
Sections और Clauses पर विशेष फोकस रहा।
Minor Criminal Laws से कठिन प्रश्न पूछे गए।
Latest Case Laws को भी शामिल किया गया।
कई Questions Time-Consuming रहे।
इसलिए इस बार केवल Facts और Sections को याद करने के बजाय Conceptual और In-depth Preparation की आवश्यकता महसूस हुई।