अरिजीत चक्रवर्ती वेस्ट बंगाल के कोलकाता से हैं। पिछले साल उनका चयन नहीं हो पाया था। लेकिन हार न मानते हुए उन्होंने फिर PW Yakeen 2.0 ज्वाइन किया और अपनी तैयारी को आगे बढाया । अपनी जर्नी के बारे में बताते हुए अरिजीत ने पढ़ाई के घंटे, PW में पढ़ाए गए कंटेंट, अलग-अलग टेस्ट सीरीज और कम स्कोर आने के दौरान अपने अनुभव को साझा किया है।
अरिजीत चक्रवर्ती वेस्ट बंगाल के कोलकाता से हैं। उन्होंने बताया कि पिछले साल उनका सिलेक्शन नहीं हुआ था। इसके बाद उन्होंने PW Yakeen 2.0 ज्वाइन किया और अपनी तैयारी को नई दिशा दी। इस दौरान उन्होंने क्लास में पढ़ाए गए कंटेंट को फॉलो किया, कई टेस्ट दिए और आखिरकार NEET में सफलता हासिल की।
PW में पढ़ाए गए कंटेंट को लेकर अरिजीत कहते हैं,
“मैंने काफी टेस्ट दिए। उसके बाद जो भी कंटेंट पढ़ाया गया, मैंने वो सारा ब्लाइंडली फॉलो किया। उससे हुआ।”
साथ ही अपनी पढ़ाई के समय के बारे में वे बताते हैं,
“मैं 12 से 13 घंटे पढ़ने की कोशिश करता था। कभी थोड़ा कम भी हो जाता था। एवरेज तो हो ही जाता था। जब क्लास नहीं रहती थी, तब 12 आवर्स पढ़ने की कोशिश करता था।”
अपनी टेस्ट प्रैक्टिस के अनुभव को साझा करते हुए अरिजीत ने Mission 30 और Rankers Test Series में दिए गए टेस्ट का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि इन टेस्ट के दौरान खासतौर पर बायोलॉजी में उनका अच्छा प्रदर्शन रहा और उन्हें टेस्ट का लेवल भी अच्छा लगा। वे बताते हैं,
“मैंने Mission 30 का भी टेस्ट दिया था। उसके बाद Rankers Test Series का भी दिया था। उसमें बायोलॉजी काफी अच्छा आता था। बायोलॉजी का भी उसमें मजा आता था। टेस्ट का लेवल अच्छा था।”
उन्होंने AITS भी दिया। अपने अनुभव को बताते हुए अरिजीत कहते हैं,
“मैंने AITS वगैरह भी दिया है, तो उसमें मतलब मार्क्स कम भी होते थे और मतलब सीखने को भी बहुत कुछ मिला।”
टेस्ट सीरीज के लेवल और सवालों की कठिनाई को लेकर अरिजीत ने अपने अनुभव साझा किए। उनके अनुसार, टेस्ट में सवालों का स्तर रियल एग्जाम के काफी करीब था और इसमें आसान के साथ-साथ सोचने वाले सवाल भी शामिल होते थे। वे कहते हैं,
“हां सर, एकदम बहुत अच्छा था। मतलब उसमें जैसे रियल एग्जाम का होता था, वैसा एकदम था।”
वे टेस्ट के कठिनाई स्तर के बारे में आगे बताते हैं,
“मतलब बायोलॉजी एकदम हार्ड कर देते थे तो कभी फिजिक्स हार्ड कर देते थे। मतलब बिल्कुल 2025 का जैसा पेपर था, उससे भी ऊपर हो रहा था कुछ-कुछ टेस्ट का और 2026 का जो पेपर हुआ, एकदम उसके लेवल का ही था।”
टेस्ट में पूछे जाने वाले सवालों को लेकर अरिजीत कहते हैं,
“मतलब ऐसे सवाल नहीं कि मतलब देखते ही हो जाएं, थोड़ा सोचने वाले सवाल आते थे। ईजी भी आते थे। एकदम बैलेंस रहता था सर, पूरा बैलेंस था टेस्ट।”
तैयारी के दौरान अरिजीत को ऐसे समय का भी सामना करना पड़ा, जब टेस्ट में कम नंबर आने के कारण वे डिमोटिवेट हुए। अपने इस अनुभव को उन्होंने बताते हुए कहा ,
“हां सर, ऐसा तो हुआ था। जब टेस्ट में कम नंबर आ गए थे, तब ऐसा हुआ था। जो थोड़े हार्ड टेस्ट होते थे हमारे, वो Rank Booster Tests होते थे। उसमें पहले-पहले तो बहुत कम नंबर आ गए थे।”
वे आगे बताते हैं,
“पहले टेस्ट में 400 में आ गए थे, तो मैं बहुत डिमोटिवेट हो गया था। पहले तो 650 प्लस ऐसे नंबर आ रहे थे, तो काफी मोटिवेटेड था। उसके बाद जब नंबर गिर गए एकदम से आठ टेस्ट के चलते, तो मैं काफी डिमोटिवेट हो गया था। लेकिन फिर धीरे-धीरे उनमें भी अच्छे नंबर आना स्टार्ट हो गए।”
Rank Booster Tests के कठिन स्तर को लेकर अरिजीत बताते हैं कि इन टेस्ट के सवालों का लेवल जानबूझकर ऐसा रखा जाता था, ताकि आगे होने वाले पेपर में कठिन सवालों का सामना करने में परेशानी न हो। उनके अनुसार, इन टेस्ट में कम नंबर आने के बाद आगे के टेस्ट में बेहतर नंबर लाने का मौका मिलता था।
“रैंक प्लस कैसे मतलब बनाए जाते हैं, वो जानबूझ के ना, उसके लेवल ही इस तरह के सेट किए जाते हैं ताकि बच्चे को आगे दिक्कत ना हो।”
वे आगे कहते हैं,
“जहां पे कम नंबर आएंगे, वहां नंबर ज्यादा आएंगे।”
अपनी तैयारी के दौरान परिवार से मिले सपोर्ट के बारे में अरिजीत बताते हैं कि जब कभी टेस्ट में उनके कम नंबर आते थे, तब परिवार ने उन्हें निराश होने के बजाय आगे बेहतर करने के लिए मोटिवेट किया। वे बताते हैं कि परिवार ने उन्हें टेस्ट को एनालाइज करने और अगले टेस्ट में अच्छा करने के लिए प्रोत्साहित किया।
“सबका ही पूरा सपोर्ट था। सबने ही मतलब बहुत एनकरेज किया। कभी मतलब टेस्ट में कम नंबर आ जाता था तो मोटिवेट भी करते थे कि अगले टेस्ट में अच्छा हो जाएगा। एनालाइज करो उसको।”
इस तरह अरिजीत की तैयारी में पढ़ाई के साथ टेस्ट प्रैक्टिस भी शामिल रही। उन्होंने PW Yakeen 2.0 से पढ़ाई की, दिए गए कंटेंट को फॉलो किया और Mission 30, Rankers Test Series, AITS व Rank Booster Tests में टेस्ट दिए। कम नंबर आने पर डिमोटिवेशन का अनुभव भी हुआ, लेकिन बाद में टेस्ट में अच्छे नंबर आने लगे।
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