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NCERT Solutions for Class 9 Reedh ki Haddhi Question Answers

NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kritika Chapter 3 Reedh Ki Haddi provides clear answers and short explanations for all questions. Students can use these solutions and the summary to revise key points and prepare for exams effectively.
NCERT Solutions for Class-9 Hindi chapter-3

Reedh Ki Haddi Class 9 is an important chapter in the Hindi Kritika textbook. It explores themes of discipline, courage, and moral responsibility through engaging stories and characters.

Students can gain better understanding using Reedh Ki Haddi Class 9 Question Answer in Short, which helps them revise the chapter efficiently before exams. The solutions are written to be easy to follow. This helps students understand the story, extract important points, and answer questions concisely. 

NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kritika Chapter 3

NCERT Solutions for Class 9 Hindi Chapter 3 Reedh ki Haddi are given here. All questions of this chapter are explained as per the CBSE guideline. This chapter is included in Class 9 Hindi syllabus. You should understand the meaning and then start writing the questions given in class-9 NCERT textbook for chapter 3. 

NCERT Solutions Reedh Ki Haddi Class 9 Question Answers

Below are the Reedh Ki Haddi In Hindi Question Answers for exam preparation. Students should prepare the NCERT Solutions for better understanding of the chapter. 

Q1. रामस्वरूप और रामगोपाल प्रसाद बात-बात पर “एक हमारा जमाना था …. ” कह्कर अपने समय की तुलना वर्तमान समय से करते हैं । इस प्रकार की तुलना कहाँ तक तर्क संगत है ?

उत्तर:- यह मनुष्य का स्वाभाविक गुण है कि वह अपने बीते हुए समय को याद करता है, तथा उसे ही सही ठहराता है परन्तु बीते हुए समय की तुलना वर्तमान समय से करना तर्क संगत नहीं है क्योंकि हर एक समय अपनी उस समय की परिस्तिथियों के अनुसार सही होता है। यों भी हर ज़माने की अपनी स्तिथियाँ होती हैं जमाना बदलता है तो कुछ कमियों के साथ सुधार भी आते हैं।

Q2. रामस्वरूप का अपनी बेटी को उच्च शिक्षा दिलवाना और विवाह के लिए छिपाना, यह विरोधाभास उनकी किस विवशता को उजागर करता है?
उत्तर:- आधुनिक समाज में सभ्य नागरिक होने के बावजूद उन्हें अपनी बेटी के भविष्य की खातिर रूढिवादी लोगों के दवाब में झुकाना पड़ रहा था। उपर्युक्त बात उनकी इसी विवशता को उजागर करता है।

Q3. अपनी बेटी का रिश्ता तय करने के लिए रामस्वरूप उमा से जिस प्रकार के व्यवहार की अपेक्षा कर रहे हैं, उचित क्यों नहीं है ?

उत्तर:- अपनी बेटी का रिश्ता तय करने के लिए रामस्वरूप उमा से जिस प्रकार के व्यवहार की अपेक्षा कर रहे हैं, सरासर गलत है। एक तो वे अपनी पढ़ी-लिखी लड़की को कम पढ़ा- लिखा साबित कर रहे हैं और उसे सुन्दरता को और बढाने के लिए नकली प्रसाधन सामग्री का उपयोग करने के लिए कहते हैं जो अनुचित है। साथ ही वे यह भी चाहते हैं कि उमा वैसा ही आचरण करे जैसा लड़के वाले चाहते हैं। परन्तु वे यह क्यों भूल रहे हैं कि जिस प्रकार लड़के की अपेक्षाएँ होती ठीक उसी प्रकार लड़की की पसंद-नापसंद का भी ख्याल रखना चाहिए। क्योंकि आज समाज में लड़का तथा लड़की को समान दर्जा प्राप्त है।

Q4. गोपाल प्रसाद विवाह को ‘बिजनेस’ मानते हैं और रामस्वरूप अपनी बेटी की उच्च शिक्षा छिपाते हैं क्या आप मानते हैं कि दोनों ही समान रूप से अपराधी हैं? अपने विचार लिखिए।

उत्तर:- दोनों ही समान रुप से अपराधी हैं। गोपाल प्रसाद जी के लिए विवाह बिज़नेस (व्यापार-धंधे) कि तरह है। विवाह की पवित्रता और उसका मूल्य उनके लिए सौदे से कम नहीं था। वह अपने बेटे का विवाह करवा कर एक ऐसी पुत्रवधू लाना चाहते थे जो उनके इशारों पर चले। वे सौदा करने से पहले उसकी जाँच पड़ताल कर तसल्ली कर लेना चाहते थे कि सौदा सही भी है या नहीं। उनके लिए वस्तु और लड़की में कोई अंतर नहीं था।

दूसरी तरफ़ रामस्वरूप जी अपनी पुत्री को उच्च शिक्षा प्राप्त करवाते हैं। उन्हें इस बात से गर्व भी है, परन्तु उसके विवाह के लिए उसकी शिक्षा को छुपाने की कोशिश करते हैं। माना इन सब में उनकी मजबूरी है परन्तु ये तर्कसंगत नहीं लगता कि ऐसे घर में अपनी शिक्षित लड़की का हाथ सौंपने को तैयार हो गए जहाँ उनकी पुत्री व उसकी शिक्षा का मोल ही न हो। इस तरह से स्वयं समाज को बदलना और बाद में अपने स्वार्थ हित या मजबूरी से उसकी संकीर्णता में शामिल होना पूर्णरुप से गलत है और उस पर झूठ बोलना बिल्कुल तर्कसंगत नहीं लगता।

Q5. “….आपके लाड़ले बेटे के की रीढ़ की हड्डी भी है या नहीं ….” उमा इस कथन के माध्यम से शंकर की किन कमियों की ओर संकेत करना चाहती है ?

उत्तर:- उपर्युक्त कथन के माध्यम से उमा शंकर की निम्न कमियों की ओर ध्यान दिलाना चाहती है –

  1. शंकर का चरित्र अच्छा नहीं है । लड़कियों के हॉस्टल के चक्कर काटते हुए वह पकड़ा जा चूका है ।
  2. उसका अपना निजी कोई व्यक्तित्व नहीं है । वह अपने पिता के पीछे चलने वाला बेचारा जीव है, जैसा कहा जाता है वैसा ही करता है ।
  3. वह शारीरिक रूप से भी समर्थ नहीं है। वह शरीर से कमजोर, झुककर तथा उससे तन कर भी बैठा भी नहीं जाता ।

Q6. शंकर जैसे लड़के या उमा जैसी लड़की – समाज को कैसे व्यक्तित्व की जरूरत है ? तर्क सहित उत्तर दीजिए ।

उत्तर:- समाज में आज उमा जैसे व्यक्तित्व, स्पष्टवादिनी तथा उच्च चरित्र वाली लड़की की ही आवश्यकता है । ऐसी लड़कियाँ ही गोपाल प्रसाद जैसे दोहरी मानसिकता रखने वाले, लालची और ढोंगी लोगों को सबक सिखा सकती है। ऐसी लड़कियों से ही समाज और देश प्रगति कर पाएगा जो आत्मविश्वास से भरी तथा निडर हो।
इसके विपरीत शंकर जैसे लड़के समाज के लिए निरुपयोगी है। शंकर जैसे व्यक्ति समाज को कोई दिशा नहीं प्रदान कर सकते हैं ।

Q7. ‘रीढ़ की हड्डी’ शीर्षक की सार्थकता स्पष्ट कीजिए ।

उत्तर:- यह शीर्षक एकांकी की भावना को व्यक्त करने के लिए बिल्कुल सही है। इस शीर्षक में समाज की सड़ी-गली मानसिकता को व्यक्त किया गया है तथा उसपर प्रहार किया है। क्योंकि रीढ़ शरीर का मुख्य हिस्सा होता है, वही उसको सीधा रखने में मदद करता है। उसमें लचीलापन होता है, जो शरीर को मुड़ने, बैठने, झुकने कूदने में मदद करता है। इस लचीलेपन के कारण ही शरीर हर कार्य करने में सक्षम है। व्यायाम के माध्यम से रीढ़ की हड्डी के लचीलेपन को बनाए रखते हैं। उसी तरह समय के अनुसार पुरानी रीतियों और परंपराओं का बदलना आवश्यक है। यह समय की माँग होती है। जब यह रीतियाँ या परंपराएँ मनुष्य के हित के स्थान पर उसका अहित करने लगे, तो वे विकार बन जाती हैं। यह एंकाकी समाज में व्याप्त इन विकारों पर कटाक्ष करता है। हमारा समाज इन मानसिकताओं का गुलाम बनकर बिना रीढ़ वाला शरीर हो जाता है। दूसरी तरफ़ यहाँ शंकर जैसे लड़कों से भी यही तात्पर्य है बिना रीढ़ का। इस प्रकार के लड़कों का अपना कोई व्यक्तित्व नहीं होता और न ही इनका कोई चरित्र होता है। ये सारी उम्र दूसरों के इशारों पर ही चलते हैं। ये लोग समाज के ऊपर सिवाए बोझ के कुछ नहीं होते। इसलिए उमा ने इसे बिना रीढ़ की हड्डी वाला कहा है।

Q8. कथा वस्तु के आधार पर आप किसे एकांकी का मुख्य पात्र मानते हैं और क्यों ?

उत्तर:- इस कहानी में कई पात्र है परन्तु सबसे सशक्त पात्र बनकर जो उभरता है वह उमा ही है। उमा की उपस्थिति भले थोड़े समय के लिए थी परन्तु उसके विचारों से प्रभावित हुए बिना हम नहीं रह पाते हैं । वह हमें बहुत कुछ सोचने के लिए मजबूर करती है । उसकी उपस्थिति नारी-समाज को एक नई सोच और दिशा प्रदान करती है।

Q9. एकांकी के आधार पर रामस्वरूप और गोपाल प्रसाद की चारित्रिक विशेषताएँ बताइए ।

उत्तर:- रामस्वरूप जी और गोपाल प्रसाद जी की चारित्रिक विशेषताएँ इस प्रकार हैं –

रामस्वरूप :- रामस्वरुप एक स्वतंत्रता प्रिय व्यक्ति हैं। वे औरतों की शिक्षा के पक्षपाती हैं। इसलिए अपनी पुत्री को भी पुत्र के समान ही उच्च शिक्षा दिलवाते हैं। वे एक स्नेही पिता हैं। रामस्वरुप जी अपनी पुत्री से बड़ा स्नेह करते हैं इसलिए उसके भविष्य की चिंता उन्हें सताती रहती है और इसी कारणवश वह अपनी पुत्री की शिक्षा भी लड़के वालों के आगे छिपा जाते हैं। रामस्वरुप जी समझदार व्यक्ति हैं। वे कई जगह गोपाल प्रसाद जी की गलत बातों का जवाब भी समझदारी पूर्वक देते हैं।

गोपाल प्रसाद :- गोपाल प्रसाद एक रोबदार व्यक्तित्व के स्वामी हैं। वकालत में होने के कारण अभिमान उनके व्यक्तित्व से टपकता है। गोपाल जी एक हँसमुख प्रवृति के इंसान हैं। बात-बात पर मज़ाक करना उनका स्वभाव है। गोपाल प्रसाद जी एक चतुर व्यक्ति हैं इसलिए अपने बीमार व चरित्रहीन बेटे के लिए एक कम पढ़ी-लिखी लड़की चाहते हैं ताकि वो कभी उसके सम्मुख आवाज़ न उठा सके।

Q10. इस एकांकी का क्या उद्देश्य है ? लिखिए।

उत्तर:- रीढ़ की हड्डी एक उदेद्श्यपूर्ण एकांकी है ।इस एकांकी के उदेद्श्य निम्नलिखित हैं –

  1. यह एकांकी स्त्री-पुरुष समानता की पक्षधर है।
  2. लड़कियों के विवाह में आने वाली समस्या को समाज के सामने लाना।
  3. बेटियों के विवाह के समय माता-पिता की परेशानियों को उजागर करना।
  4. & स्त्री -शिक्षा के प्रति दोहरी मानसिकता रखने वालों को बेनकाब करना।
  5. स्त्री को भी अपने विचार व्यक्त करने की आज़ादी देना।

Q11. समाज में महिलाओं को उचित गरिमा दिलाने हेतु आप कौन-कौन से प्रयास कर सकते हैं ?

उत्तर:- समाज में महिलाओं को उचित गरिमा दिलाने हेतु हम निम्नलिखित प्रयास कर सकते हैं –

  1. स्त्री शिक्षा में हमें योगदान देना चाहिए।
  2. अपने समय की महान एवं विदुषी स्त्रियों का उदाहरण समाज में प्रस्तुत करना चाहिए।
  3. & उसके मान-सम्मान का ध्यान रखना चाहिए।
  4. मिडिया आदि द्वारा उसके अस्तित्व की गरिमा बनी रहे यह देखना चाहिए, अश्लील चित्र आदि पर प्रतिबंध लगाना चाहिए।
  5. लड़के और लड़की को समान अधिकार मिलने चाहिए।
  6. & हमें महिलाओं को हीन दृष्टि से नहीं देखना चाहिए।
  7. & महिलाओं को उचित सम्मान देना चाहिए।
  8. महिलाओं को अपनी इच्छा अनुसार हर क्षेत्र में आगे बढ़ने का प्रोत्साहन देना चाहिए।

Reedh Ki Haddi Class 9 Summary

Reedh Ki Haddi is a story about a man named Babulal, who is known for being gentle and submissive. People around him consider him weak because he rarely stands up for himself. However, the chapter shows how he eventually discovers his inner strength, his “reedh ki haddi” (backbone) when faced with unfair behavior.

As the story progresses, Babulal finally gathers the courage to speak up, surprising everyone who underestimated him. The story teaches that every person has dignity, and even the quietest individuals can show great courage when needed. It highlights that true strength lies not in aggression but in self-respect and moral conviction.

NCERT Solutions for Class 9 Hindi Kritika Chapter 3 FAQs

What is the main theme of Reedh Ki Haddi Class 9?

The chapter highlights courage, discipline, and moral integrity in everyday life.

How can I prepare for Reedh Ki Haddi Class 9 questions?

Read the summary, understand key events, and practice the Reedh Ki Haddi Class 9 Question Answer in Short for effective revision.

How to answer Reedh Ki Haddi Class 9 questions in exams?

To answer the Reedh Ki Haddi In Hindi Question Answers, focus on important events, character traits, and moral lessons; use concise sentences from the NCERT solutions.

Can Reedh Ki Haddi Class 9 Question Answer in Short help in last-minute preparation?

Yes, short answers cover the main ideas and are ideal for quick revision before exams.

Are there any moral lessons in Reedh Ki Haddi for class 9 students?

Yes, it teaches honesty, responsibility, courage, and making ethical choices in real-life situations.
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