Physics Wallah
banner

Class 10 Hindi Kritika Chapter 1 Mata ka Aanchal NCERT Solutions

Class 10 Hindi Mata Ka Aanchal NCERT Question Answer are given here for effective exam preparation. These NCERT-based solutions cover the chapter summary, key themes, and important questions to help you revise thoroughly and perform confidently in the Class 10 board exam.
NCERT Solutions for Class 10 Hindi Kritika Chapter 1 Mata ka Aanchal

NCERT Solutions for Class 10 Hindi Kritika Chapter 1 Mata Ka Aanchal by Shivpujan Sahay help you understand the chapter’s emotional depth and key ideas in a clear and structured way.

PW CBSE Class 10 Hindi A Question Bank includes chapterwise questions, grammar practice, writing skills, and competency-based preparation.

This autobiographical piece beautifully presents childhood memories, a mother’s affection, and values rooted in rural life. These solutions explain important themes, character portrayal, and key questions, helping you improve your understanding and write well-formed answers.

Class 10 Hindi Mata Ka Aanchal NCERT Solutions

Class 10 Hindi Mata Ka Aanchal Question Answer is important for you who are preparing for the upcoming Class 10 board examination, as they will help in thoroughly revising the NCERT Class 10 Hindi Kritika Chapter 1. These questions and answers highlight the central theme of the chapter, the deep emotional bond between mother and child, and the portrayal of childhood memories by Shivpujan Sahay.

PW CBSE Class 10 Hindi B Question Bank offers solved questions, grammar exercises, writing practice, and board exam-focused preparation.

By practising Mata Ka Aanchal Prashn Uttar, you can clearly understand how the mother’s “aanchal” represents love, care, protection, and emotional strength. This understanding enables them to write well-explained answers in the board exam and score higher marks. Below are the questions and answers included in Class 10 syllabus for Hindi:

1. प्रस्तुत पाठ के आधार पर यह कहा जा सकता है कि बच्चे का अपने पिता से अधिक जुड़ाव था, फिर भी विपदा के समय वह पिता के पास न जाकर माँ की शरण लेता है। आपकी समझ से इसकी क्या वजह हो सकती है?

उत्तर:- बच्चे को हृदयस्पर्शी स्नेह की पहचान होती है। बच्चे को विपदा के समय अत्याधिक ममता और स्नेह की आवश्यकता थी। भोलानाथ का अपने पिता से अपार स्नेह था पर जब उस पर विपदा आई तो उसे जो शांति व प्रेम की छाया अपनी माँ की गोद में जाकर मिली वह शायद उसे पिता से प्राप्त नहीं हो पाती। माँ के आँचल में बच्चा स्वयं को सुरक्षित महसूस करताहै।

2. आपके विचार से भोलनाथ अपने साथियों को देखकर सिसकना क्यों भूल जाता है?

उत्तर:- भोलानाथ भी बच्चे की स्वाभाविक आदत के अनुसार अपनी उम्र के बच्चों के साथ खेलने में रूचि लेता है। उसे अपनी मित्र मंडली के साथ तरह-तरह की क्रीड़ा करना अच्छा लगता है। वे उसके हर खेल व हुदगड़ के साथी हैं। अपने मित्रों को मजा करते देख वह स्वयं को रोक नहीं पाता। इसलिए रोना भूलकर वह दुबारा अपनी मित्र मंडली में खेल का मजा उठाने लगता है। उसी मग्नावस्था में वह सिसकना भी भूल जाता है।

3. आपने देखा होगा कि भोलानाथ और उसके साथी जब-तब खेलते-खाते समय किसी न किसी प्रकार की तुकबंदी करते हैं। आपको यदि अपने खेलों आदि से जुड़ी तुकबंदी याद हो तो लिखिए।

उत्तर:- मुझे भी अपने बचपन के कुछ खेल और एक – आध तुकबन्दियाँ याद हैं :-

  1. १ अटकन – बटकन दही चटाके।
  2. बनफूल बंगाले।
  3. २ अक्कड़ – बक्कड़ बम्बे बो,
  4. अस्सी नब्बे पूरे सौ।

4. भोलनाथ और उसके साथियों के खेल और खेलने की सामग्री आपके खेल और खेलने की सामग्री से किस प्रकार भिन्न है?

उत्तर:- भोलानाथ व उसके साथी खेल के लिए आँगन व खेतों पर पड़ी चीजों को ही अपने खेल का आधार बनाते हैं। उनके लिए मिट्टी के बर्तन, पत्थर, पेड़ों के पत्ते, गीली मिट्टी, घर के समान आदि वस्तुएँ होती थी जिनसे वह खेलते व खुश होते। आज जमाना बदल चुका है। आज माता-पिता अपने बच्चों का बहुत ध्यान रखते हैं। वे बच्चों को बेफिक्र खेलने-घूमने की अनुमति नहीं देते। हमारे खेलने के लिए आज क्रिकेट का सामान, भिन्न-भिन्न तरह के वीडियो गेम व कम्प्यूटर गेम आदि बहुत सी चीज़ें हैं जो इनकी तुलना में बहुत अलग हैं। भोलानाथ जैसे बच्चों की वस्तुएँ सुलभता से व बिना मूल्य खर्च किए ही प्राप्त हो जाती हैं परन्तु आज खेल सामग्री स्वनिर्मित न होकर बाज़ार से खरीदनी पड़ती है। आज के युग में खेलने की समय-सीमा भी तय कर ली जाती है। अतः आज खेल में स्वच्छंदता नहीं होती है।

5. पाठ में आए ऐसे प्रसंगों का वर्णन कीजिए जो आपके दिल को छू गए हों?

उत्तर:- पाठ में ऐसे कई प्रसंग आए हैं जिन्होंने मेरे दिल को छू लिए –

  1. रामायण पाठ कर रहे अपने पिता के पास बैठा हुआ भोलानाथ का आईने में अपने को देखकर खुश होना और जब उसके पिताजी उसे देखते हैं तो लजाकर उसका आईना रख देने की अदा बड़ी प्यारी लगती है।
  2. बच्चे का अपने पिता के साथ कुश्ती लड़ना। शिथिल होकर बच्चे के बल को बढ़ावा देना और पछाड़ खाकर गिर जाना। बच्चे का अपने पिता की मूंछ खींचना और पिता का इसमें प्रसन्न होना बड़ा ही आनन्दमयी प्रसंग है।
  3. बच्चों द्वारा बारात का स्वांग रचते हुए समधी का बकरे पर सवार होना। दुल्हन को लिवा लाना व पिता द्वारा दुल्हन का घूँघट उठाने ने पर सब बच्चों का भाग जाना, बच्चों के खेल में समाज के प्रति उनका रूझान झलकता है तो दूसरी और उनकी नाटकीयता, स्वांग उनका बचपना।
  4. कहानी के अन्त में भोलानाथ का माँ के आँचल में छिपना, सिसकना, माँ की चिंता, हल्दी लगाना, बाबू जी के बुलाने पर भी मन की गोद न छोड़ना मर्मस्पर्शी दृश्य उपस्थित करता है; अनायास माँ की याद दिला देता है।

6. इस उपन्यास अंश में तीस के दशक की ग्राम्य संस्कृति का चित्रण है। आज की ग्रामीण संस्कृति में आपको किस तरह के परिवर्तन दिखाई देते हैं।

उत्तर:- १. गाँवों में हरे भरे खेतों के बीच वृक्षों के झुरमुट और ठंडी छांवों से घिरा कच्ची मिट्टी एवं छान का घर हुआ करता था आज ज्यादा तर गाँवों में पक्के मकान ही देखने मिलते है।

२. पहले गाँवों में भरे पूरे परिवार होते थे। आज एकल संस्कृति ने जन्म लिया है। ३. अब गाँव में भी विज्ञान का प्रभाव बढ़ता जा रहा है; जैसे – लालटेन के स्थान पर बिजली, बैल के स्थान पर ट्रैक्टर का प्रयोग, घरेलू खाद के स्थान पर बाज़ार में उपलब्ध कृत्रिम खाद का प्रयोग तथा विदेशी दवाइयों का प्रयोग किया जा रहा है। ४. पहले की तुलना में अब किसानों (खेतिहर मज़दूरों) की संख्या घट रही है। ५. पहले गाँव में लोग बहुत ही सीधा-सादा जीवन व्यतीत करते थे। आज बनावटीपन देखने मिलता है।

7. पाठ पढ़ते-पढ़ते आपको भी अपने माता-पिता का लाड़-प्यार याद आ रहा होगा। अपनी इन भावनाओं को डायरी में अंकित कीजिए।

उत्तर:- मुझे भी मेरे बचपन की एक घटना याद आ रहीं है।

मैं आँगन में खेल रहा था कुछ बच्चें पत्थर से पेड़ पर फँसी पतंग निकालने का प्रयास कर रहे थे। एक पत्थर मुझे आँख पर लगा। मैं जोरों से रोने लगा। मुझे पीड़ा से रोता हुआ देखकर माँ भी रोने लगी फिर माँ और पिता जी मुझे डॉक्टर के पास ले गए। डॉक्टर ने जब कहा डरने की बात नहीं है तब दोनों की जान में जान आई।

8. यहाँ माता-पिता का बच्चे के प्रति जो वात्सल्य व्यक्त हुआ है, उसे अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तर:- माता का अँचल में माता-पिता के वात्सल्य का बहुत सरस और मनमोहक वर्णन हुआ है। इसमें लेखक ने अपने शैशव काल का वर्णन किया है।

भोलानाथ के पिता के दिन का आरम्भ ही भोलानाथ के साथ शुरू होता है। उसे नहलाकर पूजा पाठ कराना, उसको अपने साथ घूमाने ले जाना, उसके साथ खेलना व उसकी बालसुलभ क्रीड़ा से प्रसन्न होना, उनके स्नेह व प्रेम को व्यक्त करता है। भोलानाथ की माता वात्सल्य व ममत्व से भरपूर माता है। भोलानाथ को भोजन कराने के लिए उनका भिन्न-भिन्न तरह से स्वांग रचना एक स्नेही माता की ओर संकेत करता है। जो अपने पुत्र के भोजन को लेकर चिन्तित है। दूसरी ओर उसको लहुलुहान व भय से काँपता देखकर माँ भी स्वयं रोने व चिल्लाने लगती है। अपने पुत्र की ऐसी दशा देखकर माँ काह्रदय भी दुखी हो जाता है। माँ का ममतालु मन इतना भावुक है कि वह बच्चे को डर के मारे काँपता देखकर रोने लगती है। उसकी ममता पाठक को बहुत प्रभावित करती है।

9. माता का अँचल शीर्षक की उपयुक्तता बताते हुए कोई अन्य शीर्षक सुझाइए।

उत्तर:- लेखक ने इस कहानी के आरम्भ में दिखाया है कि भोलानाथ का ज्यादा से ज्यादा समय पिता के साथ बीतता है। कहानी का शीर्षक पहले तो पाठक को कुछ अटपटा-सा लगता है पर जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है बात समझ में आने लगती है। इस कहानी में माँ के आँचल की सार्थकता को समझाने का प्रयास किया गया है। भोलानाथ को माता व पिता दोनों से बहुत प्रेम मिला है। उसका दिन पिता की छत्रछाया में ही शुरू होता है। पिता उसकी हर क्रीड़ा में सदैव साथ रहते हैं, विपदा होने पर उसकी रक्षा करते हैं।

परन्तु जब वह साँप से डरकर माता की गोद में आता है और माता की जो प्रतिक्रिया होती है, वैसी प्रतिक्रिया या उतनी तड़प एक पिता में नहीं हो सकती।माता उसके भय से भयभीत है, उसके दु:ख से दुखी है, उसके आँसू से खिन्न है। वह अपने पुत्र की पीड़ा को देखकर अपनी सुधबुध खो देती है। वह बस इसी प्रयास में है कि वह अपने पुत्र की पीड़ा को समाप्त कर सके। माँ का यही प्रयास उसके बच्चे को आत्मीय सुख व प्रेम का अनुभव कराता है। उसके बाद तो बात शीशे की तरह साफ़ हो जाती है कि पाठ का शीर्षक ‘माता का आँचल’ क्यों उचित है। पूरे पाठ में माँ की ममता ही प्रधान दिखती है, इसलिए कहा जा सकता है कि पाठ का शीर्षक सर्वथा उचित है। इसका अन्य शीर्षक हो सकता है – ‘माँ की ममता’।

10. बच्चे माता-पिता के प्रति अपने प्रेम को कैसे अभिव्यक्त करते हैं?

उत्तर:- बच्चे माता-पिता के प्रति अपने प्रेम की अभिव्यक्ति कई तरह से करते हैं –

१. माता-पिता के साथ विभिन्न प्रकार की बातें करके अपना प्यार व्यक्त करते हैं। २. माता-पिता को कहानी सुनाने या कहीं घुमाने ले जाने की या अपने साथ खेलने को कहकर। ३. वे अपने माता-पिता से रो-धोकर या ज़िद करके कुछ माँगते हैं और मिल जाने पर उनको विभिन्न तरह से प्यार करते हैं। ४. माता-पिता के साथ नाना-प्रकार के खेल खेलकर। ५. माता-पिता की गोद में बैठकर या पीठ पर सवार होकर। ६. माता-पिता के साथ रहकर उनसे अपना प्यार व्यक्त करते हैं।

11. इस पाठ में बच्चों की जो दुनिया रची गई है वह आपके बचपन की दुनिया से किस तरह भिन्न है?

उत्तर:- प्रस्तुत पाठ में बच्चों की जो दुनिया रची गई है उसकी पृष्ठभूमि पूर्णतया ग्रामीण जीवन पर आधारित है। प्रस्तुत कहानी तीस के दशक की है। तत्कालीन समय में बच्चों के पास खेलन-कूदने का अधिक समय हुआ करता था। उनपर पढ़ाई करने का आज जितना दबाव नहीं था। ये अलग बात है कि उस समय उनके पास खेलने के अधिक साधन नहीं थे। वे लोग अपने खेल प्रकृति से ही प्राप्त करते थे और उसी प्रकृति के साथ खेलते थे। उनके लिए मिट्टी, खेत, पानी, पेड़, मिट्टी के बर्तन आदि साधन थे। आज तीन वर्ष की उम्र होते ही बच्चों को नर्सरी में भर्ती करा दिया जाता है। आज के बच्चे विडियो गेम, टी.वी., कम्प्यूटर, शतरंज़ आदि खेलने में लगे रहते हैं या फिर क्रिकेट, फुटबॉल, हॉकी, बेडमिण्टन या कार्टून आदि में ही अपना समय बीता देते हैं।

12. फणीश्वरनाथ रेणु और नागार्जुन की आँचलिक रचनाओं को पढ़िए।

उत्तर:- १ फणीश्वरनाथ रेणु का उपन्यास ‘मैला आँचल’ पठनीय है।

२ नागार्जुन का उपन्यास ‘बलचनमा’ आँचलिक है।

Related Chapters 
NCERT Class for 10 Hindi Kritika chapter 1 माता का अँचल
NCERT Class for 10 Hindi Kritika chapter 2 साना-साना हाथ जोड़ि
NCERT Class for 10 Hindi Kritika chapter 3 मैं क्यों लिखता हूँ?

 

NCERT Solutions for Class 10 Hindi Kritika Chapter 1 FAQs

What is the main theme of Mata Ka Aanchal?

The main theme is maternal love, childhood memories, and the emotional security provided by a mother.

Why is the title Mata Ka Aanchal appropriate?

The mother’s aanchal represents protection, affection, and emotional shelter, making the title highly meaningful.

Why did the author feel closest to his mother?

The author feels closest to his mother because the mother understood his pain, fears, and emotions and always protected him with love and care.

Mata Ka Aanchal Prashn Uttar belongs to which class and book?

Mata Ka Aanchal Prashn Uttar​ belongs to NCERT Class 10 Hindi Kritika Chapter 1.

Why are Mata Ka Aanchal Question Answer important for Class 10 exams?

Mata Ka Aanchal Prashn Uttar​ is frequently asked in board exams due to its emotional depth and descriptive nature.
banner
banner
banner
Popup Close ImagePopup Open Image
Talk to a counsellorHave doubts? Our support team will be happy to assist you!
Popup Image
avatar

Get Free Counselling Today

and Clear up all your Doubts

Talk to Our Counsellor just by filling out the form.
Student Name
Phone Number
IN
+91
OTP
Join 15 Million students on the app today!
Point IconLive & recorded classes available at ease
Point IconDashboard for progress tracking
Point IconLakhs of practice questions
Download ButtonDownload Button
Banner Image
Banner Image
Free Learning Resources
Know about Physics Wallah
Physics Wallah is an Indian edtech platform that provides accessible & comprehensive learning experiences to students from Class 6th to postgraduate level. We also provide extensive NCERT solutions, sample paper, NEET, JEE Mains, BITSAT previous year papers & more such resources to students. Physics Wallah also caters to over 3.5 million registered students and over 78 lakh+ Youtube subscribers with 4.8 rating on its app.
We Stand Out because
We provide students with intensive courses with India’s qualified & experienced faculties & mentors. PW strives to make the learning experience comprehensive and accessible for students of all sections of society. We believe in empowering every single student who couldn't dream of a good career in engineering and medical field earlier.
Our Key Focus Areas
Physics Wallah's main focus is to make the learning experience as economical as possible for all students. With our affordable courses like Lakshya, Udaan and Arjuna and many others, we have been able to provide a platform for lakhs of aspirants. From providing Chemistry, Maths, Physics formula to giving e-books of eminent authors like RD Sharma, RS Aggarwal and Lakhmir Singh, PW focuses on every single student's need for preparation.
What Makes Us Different
Physics Wallah strives to develop a comprehensive pedagogical structure for students, where they get a state-of-the-art learning experience with study material and resources. Apart from catering students preparing for JEE Mains and NEET, PW also provides study material for each state board like Uttar Pradesh, Bihar, and others

Copyright © 2026 Physicswallah Limited All rights reserved.