NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षा में केवल कॉन्सेप्ट मजबूत होना ही सफलता की गारंटी नहीं होता। कई बार छात्र पूरे साल पढ़ाई तो अच्छी करते हैं, लेकिन परीक्षा के दौरान समय प्रबंधन, टेस्ट देने की रणनीति और घबराहट उनके प्रदर्शन को प्रभावित कर देती है। दुष्यंत खुराना के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ था। पिछले प्रयास में उन्हें महसूस हुआ कि जानकारी होने के बावजूद वे परीक्षा में अपने ज्ञान का सही उपयोग नहीं कर पाए।
उन्होंने अपनी सबसे बड़ी कमजोरी को पहचाना और इस बार तैयारी का पूरा फोकस टेस्ट प्रैक्टिस पर रखा। Physics Wallah के ऑनलाइन और ऑफलाइन मार्गदर्शन, 250 से अधिक मॉक टेस्ट और लगातार अभ्यास की मदद से उन्होंने NEET 2026 में 629 अंक और AIR 3600 हासिल कर यह साबित किया कि सही रणनीति सफलता की दिशा बदल सकती है।
दुष्यंत ने पिछले वर्ष Yakeen 2.0 batch से अपनी तैयारी पूरी की थी। पढ़ाई के दौरान उनके कॉन्सेप्ट काफी मजबूत हो चुके थे और Physics के लिए वे विशेष रूप से की क्लासेज को अपनी सफलता का आधार मानते हैं।
इसके बावजूद परीक्षा में उन्हें महसूस हुआ कि उनकी सबसे बड़ी कमी टेस्ट देने की स्किल थी। परीक्षा के दौरान घबराहट के कारण वे अपनी तैयारी के अनुसार प्रदर्शन नहीं कर पाए।
"पिछले साल पेपर में टेस्ट देने की स्किल नहीं थी। थोड़ा पैनिक हो गया था। क्वेश्चन आते थे, लेकिन एग्जाम में वैसा प्रदर्शन नहीं कर पाया।"
इस बार दुष्यंत ने शुरुआत से ही तय कर लिया कि उनकी तैयारी का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा मॉक टेस्ट होंगे।
उन्होंने पूरे साल में 250 से अधिक टेस्ट दिए। ऑनलाइन बैच के टेस्ट, Sir द्वारा दिए गए टेस्ट और ऑफलाइन सेंटर पर आयोजित सभी टेस्ट को नियमित रूप से हल किया।
उनका मानना है कि लगातार टेस्ट देने से केवल स्कोर ही नहीं बढ़ता, बल्कि परीक्षा के दौरान आत्मविश्वास भी मजबूत होता है।
"मैंने इस बार 250 से ज्यादा टेस्ट लगाए। धीरे-धीरे जब मार्क्स बढ़ने लगे, तो कॉन्फिडेंस भी अपने आप बनने लगा।"
"शुरुआत में टेस्ट में अच्छे नंबर नहीं आते थे, लेकिन धीरे-धीरे मार्क्स बढ़ने लगे। इससे कॉन्फिडेंस भी बढ़ा और प्रश्नों को समझने की क्षमता भी बेहतर हुई।"
अज़हर का मानना है कि केवल विषयों की तैयारी करना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि परीक्षा के माहौल में सही प्रदर्शन करना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। पहले प्रयास में उन्हें महसूस हुआ कि उनकी टेस्ट देने की रणनीति कमजोर थी। इसलिए ड्रॉप ईयर में उन्होंने सबसे ज्यादा ध्यान टेस्ट प्रैक्टिस पर दिया, जिससे उनका आत्मविश्वास और प्रदर्शन दोनों बेहतर हुए।
"पिछली बार मेरी Test Giving Skill अच्छी नहीं थी, इसलिए पेपर में पैनिक हो गया था। इस बार मैंने टेस्ट पर सबसे ज्यादा फोकस किया और PW के ऑनलाइन व ऑफलाइन टीचर्स ने इसमें बहुत मदद की।"
दुष्यंत को अच्छे अंकों के आधार पर Physics Wallah का ऑफलाइन बैच मिला। वहां के शिक्षकों ने नियमित टेस्ट और व्यक्तिगत मार्गदर्शन के माध्यम से उनकी तैयारी को और बेहतर बनाया।
साथ ही उन्होंने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध सभी टेस्ट और अभ्यास सामग्री का भी पूरा लाभ उठाया।
उनके अनुसार ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों टीमों का संयुक्त सहयोग उनकी सफलता में महत्वपूर्ण रहा।
"ऑनलाइन तो पिछले साल भी पढ़ा था, लेकिन इस बार ऑफलाइन टीचर्स ने टेस्ट और सपोर्ट के जरिए बहुत मदद की। दोनों का कॉम्बिनेशन सबसे ज्यादा काम आया।"
दुष्यंत बताते हैं कि पिछले साल उन्होंने पूरे लेक्चर विस्तार से देखे थे। इस बार उन्होंने केवल अपने Weak Topics पर दोबारा लेक्चर देखे और बाकी समय सेल्फ स्टडी एवं टेस्ट प्रैक्टिस को दिया।
वे रोजाना क्लास के अलावा लगभग 8 घंटे सेल्फ स्टडी करते थे और हर टेस्ट के बाद अपनी गलतियों का विश्लेषण करते थे।
इस रणनीति ने उनकी तैयारी को अधिक प्रभावी बना दिया।
दुष्यंत के अनुसार केवल टेस्ट देना काफी नहीं होता, बल्कि हर टेस्ट के बाद अपनी गलतियों को समझना और उन्हें सुधारना सबसे ज्यादा जरूरी होता है।
लगातार टेस्ट देने की वजह से उन्हें अपनी कमजोरियां समझ में आने लगीं और धीरे-धीरे उनका प्रदर्शन बेहतर होता गया।
जैसे-जैसे टेस्ट स्कोर बढ़ते गए, उनका आत्मविश्वास भी मजबूत होता गया।
दुष्यंत Physics Wallah की पूरी टीम को अपनी सफलता का महत्वपूर्ण हिस्सा मानते हैं।
"आप सभी टीचर्स ढाई-ढाई घंटे पूरी मेहनत से पढ़ाते थे। दिन की शुरुआत ही Sir की क्लास से होती थी।"
उनके अनुसार ऑफलाइन सेंटर पर शिक्षकों का व्यक्तिगत सहयोग और ऑनलाइन फैकल्टी द्वारा उपलब्ध कराए गए टेस्ट व गाइडेंस ने उन्हें हमेशा सही दिशा में बनाए रखा।
"पूरी PW टीम को धन्यवाद। ऑनलाइन भी बहुत कुछ सीखने को मिला और ऑफलाइन टीचर्स का सपोर्ट भी शानदार रहा। जब जरूरत पड़ी, उन्होंने हर समय मदद की।"
दुष्यंत का मानना है कि केवल लेक्चर देखकर सफलता नहीं मिलती। यदि छात्र अपनी तैयारी को अगले स्तर पर ले जाना चाहते हैं, तो उन्हें अधिक से अधिक मॉक टेस्ट देने चाहिए।
उनके अनुसार टेस्ट से ही यह समझ आता है कि परीक्षा के दौरान समय कैसे संभालना है, घबराहट पर कैसे नियंत्रण रखना है और किन टॉपिक्स पर अधिक मेहनत करनी है।
"जितने ज्यादा टेस्ट दोगे, उतना ज्यादा सीखोगे। टेस्ट ही सबसे ज्यादा कॉन्फिडेंस बनाते हैं।"
दुष्यंत खुराना की कहानी यह साबित करती है कि सफलता केवल ज्यादा पढ़ने से नहीं, बल्कि सही तरीके से अभ्यास करने से मिलती है। पिछले प्रयास की गलतियों को पहचानकर उन्होंने इस बार टेस्ट प्रैक्टिस को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया। Physics Wallah के ऑनलाइन और ऑफलाइन मार्गदर्शन, 250+ मॉक टेस्ट, नियमित विश्लेषण और मजबूत आत्मविश्वास की बदौलत उन्होंने NEET 2026 में 629 अंक और AIR 3600 हासिल की।
उनकी यह यात्रा हर NEET अभ्यर्थी को यह संदेश देती है कि यदि आपकी बुनियाद मजबूत है और आप अपनी कमजोरियों पर ईमानदारी से काम करते हैं, तो सही रणनीति और निरंतर अभ्यास के साथ शानदार सफलता हासिल की जा सकती है।