NEET Counselling 2026 उन सभी छात्रों के लिए जरूरी है जिन्होंने NEET 2026 परीक्षा पास की है। इसके जरिए देश के बड़े सरकारी और प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों में प्रवेश मिलता है। अगर आप सही तरीके से चॉइस नहीं भरेंगे, तो अच्छी रैंक होने पर भी कॉलेज मिलना मुश्किल हो सकता है। काउंसलिंग में शामिल होने से पहले आपको इसके सभी नियम अच्छे से समझ लेने चाहिए। यहां समझिए कि NEET Counselling 2026 के अलग-अलग राउंड में क्या-क्या होता है और ये क्यों जरूरी है।
NEET UG Counselling 2026 प्रक्रिया का आयोजन छात्रों को उनकी रैंक के अनुसार सही मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में सीटें आवंटित करने के लिए किया जाता है। मेडिकल काउंसलिंग कमिटी (MCC) द्वारा यह पूरी प्रक्रिया कुल चार अलग-अलग चरणों में पारदर्शी तरीके से पूरी की जाती है।
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राउंड का नाम |
राउंड का विवरण |
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राउंड 1 |
काउंसलिंग का पहला चरण, जिसमें फ्री एग्जिट की सुविधा होती है। |
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राउंड 2 |
दूसरा चरण, जिसमें सीट छोड़ने पर सिक्योरिटी फीस जब्त होने का नियम लागू होता है। |
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राउंड 3 ( Mop-Up Round) |
बची हुई खाली सीटों को भरने के लिए आयोजित किया जाने वाला तीसरा चरण। |
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स्ट्रे वैकेंसी राउंड |
काउंसलिंग का अंतिम चरण, जिसमें केवल पहले से रजिस्टर्ड छात्र ही भाग ले सकते हैं। |
NEET Counselling का राउंड 1 छात्रों को उनकी रैंक के अनुसार पसंदीदा मेडिकल सीट चुनने का पहला मौका देता है, इसलिए उम्मीदवारों को इसकी सही जानकारी होना जरूरी है ।
रजिस्ट्रेशन और फीस भुगतान: योग्य उम्मीदवार MCC की आधिकारिक वेबसाइट (mcc.nic.in) पर जाकर अपना रजिस्ट्रेशन करते हैं और काउंसलिंग फीस तथा सिक्योरिटी डिपॉजिट जमा करते हैं।
चॉइस फिलिंग और लॉकिंग: छात्र अपनी पसंद के हिसाब से मेडिकल कॉलेजों और कोर्सों (जैसे MBBS या BDS) की सूची प्राथमिकता के आधार पर चुनकर उसे सबमिट कर देते हैं।
सीट आवंटन): छात्र की NEET रैंक, श्रेणी और भरी गई चॉइस के आधार पर सीट अलॉट की जाती है।
रिपोर्टिंग या फ्री एग्जिट: अलॉट हुए कॉलेज में जाकर डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन और फीस जमा करके एडमिशन लिया जाता है। यदि छात्र को मिली सीट पसंद नहीं है, तो वे Free Exit का विकल्प चुन सकते हैं (इसमें सिक्योरिटी फीस जब्त नहीं होती)।
राउंड 2 उन छात्रों के लिए दूसरा मौका होता है जिन्हें पहले चरण में सीट नहीं मिली या जो पहले भाग नहीं ले पाए थे। इस चरण में नियमों का ध्यान रखना बेहद जरूरी है, क्योंकि सीट छोड़ने पर सिक्योरिटी फीस जब्त हो सकती है।
राउंड 2 की पूरी प्रक्रिया नीचे दिए गए चरणों में पूरी होती है:
नया पंजीकरण : जिन छात्रों ने राउंड 1 में आवेदन नहीं किया था, वे यहाँ नया रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं। जिन्होंने राउंड 1 में पहले ही रजिस्ट्रेशन कर लिया था, उन्हें दोबारा रजिस्ट्रेशन करने की जरूरत नहीं होती।
फ्रेश चॉइस फिलिंग: सभी योग्य छात्रों को कॉलेजों और कोर्सों की नई लिस्ट अपनी पसंद के हिसाब से दोबारा भरनी और लॉक करनी होती है।
अलॉटमेंट और रिपोर्टिंग: सीट अलॉट होने पर छात्र को दिए गए कॉलेज में जाकर अपने दस्तावेज जमा करने और एडमिशन की प्रक्रिया पूरी करनी होती है।
महत्वपूर्ण नियम : यदि राउंड 2 में आपको कोई सीट अलॉट हो जाती है और आप उस पर एडमिशन नहीं लेते हैं, तो आपकी जमा की गई सिक्योरिटी राशि जब्त कर ली जाएगी।
राउंड 3 जिसे मॉप-अप राउंड भी कहा जाता है l यह राउंड विशेष रूप से उन सीटों के लिए आयोजित किया जाता है जो पहले दो राउंड के बाद भी खाली रह जाती हैं। इस चरण में बची हुई खाली सीटों पर दाखिला पाने का यह अंतिम मुख्य अवसर होता है।
राउंड 3 की पूरी प्रक्रिया नीचे दिए गए चरणों में पूरी होती है:
नया रजिस्ट्रेशन : जिन छात्रों को पिछले राउंड्स में सीट नहीं मिली थी या जिन्होंने अब तक आवेदन नहीं किया था, वे यहाँ नया रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं।
नई चॉइस फिलिंग: छात्रों को बची हुई खाली सीटों के आधार पर अपनी पसंद के कॉलेजों की नई लिस्ट भरनी और लॉक करनी होती है।
अलॉटमेंट और जॉइनिंग: सीट अलॉट होने पर छात्र को दिए गए कॉलेज में जाकर एडमिशन प्रक्रिया पूरी करनी होती है।
स्ट्रे वैकेंसी राउंड नीट काउंसलिंग का अंतिम चरण है, जिसका उद्देश्य बची हुई खाली सीटों को भरना होता है। इस राउंड में सख्त नियम लागू होते हैं, इसलिए इसमें भाग लेने से पहले इसकी शर्तों को ध्यान से समझना बेहद जरूरी है। इस राउंड में Choice Filling नहीं होती। उपलब्ध खाली सीटों के आधार पर पात्र उम्मीदवारों को सीट आवंटित की जाती है।
राउंड की मुख्य विशेषताएं और प्रक्रिया:
अंतिम चरण : यह तीनों मुख्य राउंड्स की काउंसलिंग पूरी होने के बाद खाली रह गई सीटों को भरने के लिए आयोजित किया जाता है।
कोई नया रजिस्ट्रेशन नहीं : इस चरण में नया रजिस्ट्रेशन करने का मौका नहीं मिलता। इसमें केवल वही छात्र भाग ले सकते हैं जो पहले से रजिस्टर्ड हैं और जिन्हें AIQ या स्टेट कोटा के किसी भी पिछले राउंड में कोई सीट नहीं मिली है।
अनिवार्य एडमिशन : आगर इस अंतिम राउंड में आपको कोई सीट अलॉट हो जाती है, तो उस पर एडमिशन लेना पूरी तरह अनिवार्य होता है।
15% All India Quota की Counselling MCC कराता है।
AIIMS, JIPMER, Deemed Universities, Central Universities भी MCC Counselling के अंतर्गत आते हैं।
85% State Quota और राज्य के Private Colleges की Counselling संबंधित राज्य प्राधिकरण आयोजित करते हैं।
NEET Counselling 2026 की पूरी प्रक्रिया मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस और बीडीएस सीटों पर पारदर्शिता और सही तरीके से दाखिला देने के लिए डिज़ाइन की गई है। चारों राउंड (राउंड 1, 2, 3 और स्ट्रे वैकेंसी) के नियम एक-दूसरे से काफी अलग हैं। इसलिए, छात्रों को केवल अपनी नीट रैंक पर निर्भर रहने के बजाय चॉइस फिलिंग, सिक्योरिटी फीस और सीट छोड़ने के नियमों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। समय पर सही जानकारी और सतर्कता ही छात्रों को बिना किसी गलती के उनके मनपसंद मेडिकल कॉलेज तक पहुँचा सकती है।
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