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Class 9 Hindi “राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद”: NCERT के महत्वपूर्ण प्रश्न और उत्तर

NCERT Class 9 Hindi राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद Solutions में गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित पाठ के महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर दिए गए हैं। इन समाधानों में पाठ का प्रसंग, पात्रों के व्यवहार, राम की विनम्रता, लक्ष्मण के तर्क और परशुराम के क्रोध से जुड़े प्रश्नों को सरल भाषा में समझाया गया है।
authorImageEkta Rakesh Singh8 Oct, 2026
Class 9 Hindi “राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद”

 

NCERT Class 9 Hindi राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद Solutions छात्रों को पाठ के महत्वपूर्ण प्रश्नों और उनके सरल उत्तरों को समझने में मदद करते हैं। गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित इस पाठ में शिव-धनुष टूटने के बाद राम, लक्ष्मण और परशुराम के बीच हुए संवाद का वर्णन किया गया है। PW छात्रों की मदद के लिए NCERT Solutions उपलब्ध करा रहा है, जिससे वे प्रश्नों के उत्तरों को समझने, अपनी तैयारी को बेहतर करने और परीक्षा से पहले महत्वपूर्ण बिंदुओं का रिवीजन करने में मदद ले सकते हैं।

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Class 9 Hindi “राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद” प्रश्न उत्तर

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद पाठ में सीता स्वयंवर के दौरान शिव-धनुष टूटने के बाद उत्पन्न परिस्थिति और राम, लक्ष्मण तथा परशुराम के बीच हुए संवाद का वर्णन किया गया है। पाठ में राम की विनम्रता और धैर्य तथा लक्ष्मण के तर्कपूर्ण और व्यंग्यपूर्ण व्यवहार के माध्यम से अलग-अलग व्यक्तित्व गुणों को प्रस्तुत किया गया है।

नीचे राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद पाठ के महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर दिए गए हैं। छात्र पहले स्वयं प्रश्न हल करने का प्रयास करें और इसके बाद दिए गए उत्तर से अपने उत्तरों का मिलान कर सकते हैं।

1. सभा में उपस्थित लोगों की मनःस्थिति

प्रश्न: “पितु समेत कहि निज नामा। लगे करन सब दंड प्रनामा॥” यह पंक्ति सभा में उपस्थित लोगों की किस मनःस्थिति को दर्शाती है?

(1) आदर और सम्मान
(2) भक्ति और श्रद्धा
(3) भय और शिष्टाचार
(4) प्रेम और सौहार्द

उत्तर: (3) भय और शिष्टाचार

परशुराम के क्रोधित और भयंकर रूप को देखकर सभा में उपस्थित लोग भयभीत हो जाते हैं। वे अपना नाम बताते हुए दंडवत प्रणाम करते हैं। इससे उनके मन में भय के साथ सम्मान और शिष्टाचार की भावना दिखाई देती है।

2. राजा जनक के व्यवहार की विशेषता

प्रश्न: “जनक कहँ आइ सिख नावा। सीय बोलाइ प्रनाम करावा॥” पंक्ति से राजा जनक के व्यवहार की कौन-सी विशेषता उद्घाटित होती है?

(1) स्वतंत्रशीलता
(2) शिष्टता
(3) सहनशीलता
(4) उदासीनता

उत्तर: (2) शिष्टता

राजा जनक परशुराम के आने पर उनका सम्मान करते हैं और सीता सहित उन्हें प्रणाम करवाते हैं। इससे राजा जनक के व्यवहार में शिष्टता और विनम्रता दिखाई देती है।

3. परशुराम के कठोर वचनों का कारण

प्रश्न: “अति रिस बोले बचन कठोरा।” जनक के प्रति परशुराम के कठोर वचन बोलने का मूल कारण था—

(1) उचित आदर-सत्कार न मिलना
(2) जनक द्वारा समाचार छिपाना
(3) शिव-धनुष का खंडित होना
(4) अन्य राजाओं का सभा में उपस्थित होना

उत्तर: (3) शिव-धनुष का खंडित होना

परशुराम शिव-धनुष के टूटने से अत्यंत क्रोधित थे। इसी कारण उन्होंने राजा जनक के प्रति कठोर वचन कहे।

4. राम के व्यक्तित्व की विशेषता

प्रश्न: राम का कथन “होड़हि केर एक फलु तुम्हारा” उनके व्यक्तित्व की किस विशेषता को दर्शाता है?

(1) कूटनीति और चतुराई
(2) विनम्रता और मर्यादा
(3) त्याग और समर्पण
(4) दृढ़ता और आत्मविश्वास

उत्तर: (2) विनम्रता और मर्यादा

राम परशुराम के क्रोध के सामने भी शांत और विनम्र रहते हैं। उनका कथन उनके मर्यादित और विनम्र स्वभाव को दर्शाता है।

5. लक्ष्मण के मुस्कराने का कारण

प्रश्न: “सुनि मुनि बचन लखन मुसुकाने...” लक्ष्मण के मुस्कराने और उपहास के पीछे उनका क्या कारण था?

(1) वे सभा में अपनी श्रेष्ठता सिद्ध करना चाहते थे
(2) वे राम के प्रति अपना प्रेम प्रदर्शित करना चाहते थे
(3) वे परशुराम की शक्ति से अनभिज्ञ थे
(4) वे परशुराम को चुनौती देना चाहते थे

उत्तर: (2) वे राम के प्रति अपना प्रेम प्रदर्शित करना चाहते थे।

राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद के लघु उत्तरीय प्रश्न

6. “अधर निमेष कलप सम बीता” का भाव स्पष्ट कीजिए।

प्रश्न: “अधर निमेष कलप सम बीता” पंक्ति का भाव स्पष्ट करते हुए बताइए कि कवि ने किस संदर्भ में कहा है और क्यों?

उत्तर:

इस पंक्ति में अर्ध क्षण भी बहुत लंबे समय यानी कल्प के समान लगने की बात कही गई है। जब सीता की विदाई का समय निकट आ गया था और विवाह की रस्में पूरी हो रही थीं, तब परशुराम के क्रोधपूर्ण आगमन के कारण वातावरण में तनाव और चिंता उत्पन्न हो गई।

राम के प्रति सीता के मन में प्रेम था, इसलिए समय बीतना उन्हें कठिन लग रहा था। इस कारण अल्प समय भी बहुत लंबा प्रतीत होने लगा। इससे सीता की व्याकुलता और प्रेमपूर्ण भावना का पता चलता है।

7. परशुराम की चेतावनी का सभा पर क्या प्रभाव पड़ा?

प्रश्न: “सो बिलगाउ बिहाइ समाजा। न तु मारे जइहहिं सब राजा॥” पंक्ति के आधार पर बताइए कि परशुराम द्वारा दी गई इस चेतावनी का सभा में उपस्थित राज-समाज पर क्या प्रभाव पड़ा?

उत्तर:

परशुराम की चेतावनी से सभा में उपस्थित सभी राजा और लोग भयभीत और आतंकित हो गए। परशुराम ने कहा कि यदि धनुष तोड़ने वाले को अलग नहीं किया गया, तो वे सभी राजाओं का वध कर देंगे।

उनके कठोर और क्रोधपूर्ण कथन से सभा का वातावरण तनावपूर्ण और भययुक्त हो गया। सभी लोग परशुराम के क्रोध से डर गए और किसी भी प्रकार के संघर्ष की आशंका उत्पन्न हो गई।

8. परशुराम के क्रोध को शांत करने के लिए राम का विनय या लक्ष्मण का तर्क?

प्रश्न: तुलसीदास ने राम और लक्ष्मण के माध्यम से एक ही परिस्थिति के प्रति अलग-अलग प्रतिक्रियाएँ दिखाई हैं। आपकी दृष्टि में परशुराम के क्रोध को शांत करने के लिए राम का विनय का मार्ग उचित है या लक्ष्मण का तर्क?

उत्तर:

मेरी दृष्टि में परशुराम के क्रोध को शांत करने के लिए राम का विनय का मार्ग अधिक उचित है। क्रोध की स्थिति में सामने वाले व्यक्ति को कठोर उत्तर देने के बजाय शांत और विनम्र व्यवहार करना अधिक प्रभावी होता है।

लक्ष्मण की तर्कपूर्ण प्रतिक्रिया से परशुराम का क्रोध और बढ़ जाता है, जबकि राम विनम्रता और धैर्य के साथ बात करते हैं। इससे धीरे-धीरे परशुराम का क्रोध शांत होने लगता है।

इसलिए कठिन परिस्थितियों में विनम्रता, धैर्य और संयम अधिक प्रभावी उपाय होते हैं।

9. श्री राम के व्यक्तित्व में भावनात्मक संतुलन

प्रश्न: “हृदय न करहु बिषादु कछु बोले श्रीरघुनाथ।” श्री राम के हृदय में भय था या नहीं? यह उनके व्यक्तित्व के किस गुण को दर्शाता है?

उत्तर:

श्री राम के हृदय में भय नहीं था। वे कठिन और तनावपूर्ण परिस्थिति में भी शांत, धैर्यवान और संतुलित बने रहे।

उनका यह व्यवहार उनके संयम, धैर्य, गंभीरता और भावनात्मक संतुलन को दर्शाता है। जहाँ परशुराम क्रोध में थे और लक्ष्मण व्यंग्यपूर्ण तथा तर्कपूर्ण उत्तर दे रहे थे, वहीं राम शांत रहकर परिस्थिति को संभालने का प्रयास करते हैं।

राम का यही संतुलित व्यवहार उन्हें अन्य पात्रों से अलग स्थापित करता है। वे कठिन परिस्थितियों में भी अपनी भावनाओं पर नियंत्रण रखते हैं और उचित समय पर उचित प्रतिक्रिया देते हैं।

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“राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद” NCERT महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर PDF लिंक

Class 9 Hindi राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद प्रश्न उत्तर के और भी महत्वपूर्ण प्रश्नों और उत्तरों की तैयारी के लिए विद्यार्थी नीचे दिए गए PDF को डाउनलोड कर सकते हैं। इस PDF में पाठ से जुड़े अतिरिक्त महत्वपूर्ण प्रश्न और उनके आसान उत्तर दिए गए हैं, जो परीक्षा की तैयारी और रिवीजन में मदद करेंगे।

राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद NCERT महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर PDF

Class 9 Hindi “राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद” NCERT प्रश्न-उत्तर क्यों पढ़ें?

NCERT Class 9 Hindi Solutions by PW छात्रों को राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद पाठ के प्रश्नों को समझने और उनके उत्तरों की तैयारी में मदद कर सकते हैं।

  • पाठ का प्रसंग समझें: शिव-धनुष टूटने के बाद परशुराम के क्रोध और जनक के दरबार में हुए संवाद को समझें।

  • राम का व्यक्तित्व समझें: राम की विनम्रता, धैर्य, मर्यादा और भावनात्मक संतुलन को समझें।

  • लक्ष्मण के व्यवहार को समझें: लक्ष्मण के तर्क, व्यंग्य और राम के प्रति उनके प्रेम को समझें।

  • परशुराम के क्रोध को समझें: शिव-धनुष टूटने पर परशुराम की प्रतिक्रिया और सभा पर उसके प्रभाव को जानें।

  • प्रश्नों की तैयारी करें: पाठ से जुड़े महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय और वर्णनात्मक प्रश्नों के उत्तरों का अभ्यास करें।

  • परीक्षा के लिए रिवीजन करें: समाधानों की मदद से पाठ के प्रमुख भाव और पात्रों के गुणों को दोहराएं।

राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद छात्रों को कठिन परिस्थितियों में धैर्य, संयम और विनम्रता के महत्व को समझने में मदद करता है। Class 9 Hindi Solutions द्वारा छात्र पाठ के प्रश्नों के उत्तरों को समझ सकते हैं, अपनी तैयारी को बेहतर कर सकते हैं और परीक्षा से पहले महत्वपूर्ण बिंदुओं का रिवीजन कर सकते हैं।

यह भी पढ़ें

 

Class 9 Hindi Ram lakshman parshuram samvad FAQs

Ram lakshman parshuram samvad kiski rachna hai?

राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद गोस्वामी तुलसीदास की रचना रामचरितमानस के बालकांड से लिया गया है।

Ram lakshman parshuram samvad mein kis ghatna ka varnan hai?

इस पाठ में शिव-धनुष टूटने के बाद परशुराम के क्रोधित होकर जनक के दरबार में आने और राम-लक्ष्मण तथा परशुराम के बीच हुए संवाद का वर्णन है।

Ram lakshman parshuram samvad me ram ke kaun-se gun dikhai dete hai?

राम के व्यक्तित्व में विनम्रता, धैर्य, संयम, मर्यादा और भावनात्मक संतुलन जैसे गुण दिखाई देते हैं।

Lakshman ke vyavahar ki kya visheshta hai?

लक्ष्मण अपने तर्कपूर्ण और व्यंग्यपूर्ण उत्तरों के माध्यम से परशुराम के क्रोध का सामना करते हैं। उनके व्यवहार में राम के प्रति प्रेम और अपने विचारों को स्पष्ट रूप से व्यक्त करने का भाव दिखाई देता है।
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