हर बच्चे के सपने के पीछे एक कहानी होती है, लेकिन कुछ सपनों को पूरा करने में परिवार का संघर्ष भी उतना ही बड़ा होता है। मेरठ, उत्तर प्रदेश के Anshuman ने NEET 2026 में 489 अंक हासिल कर डॉक्टर बनने के अपने बचपन के सपने को पूरा करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। उन्होंने दूसरी कक्षा में ही डॉक्टर बनने का सपना देख लिया था, लेकिन 10वीं और 11वीं तक उन्हें यह पता नहीं था कि इस सपने के लिए तैयारी कैसे करनी है।
12वीं में अप्रैल 2025 में PW के Lakshya NEET Hindi 2026 से जुड़ने के बाद उन्हें पहली बार NEET की तैयारी का सही तरीका समझ आया। उनके पिता कपड़े धोने का काम करते हैं और माँ कपड़ों पर प्रेस करती हैं। सीमित आमदनी के बावजूद माता-पिता ने Anshuman की पढ़ाई में उनका साथ नहीं छोड़ा और उनकी माँ ने हर मुश्किल समय में उनका हौसला बढ़ाया।
Anshuman ने डॉक्टर बनने का सपना बहुत छोटी उम्र में देख लिया था। दूसरी कक्षा में ही उन्होंने तय कर लिया था कि उन्हें डॉक्टर बनना है। हालांकि उस उम्र में उन्हें यह समझ नहीं थी कि डॉक्टर बनने के लिए NEET जैसी परीक्षा की तैयारी करनी होती है और इसके लिए किस तरह पढ़ाई करनी चाहिए।
समय बीतता गया और उनकी 10वीं और 11वीं की पढ़ाई पूरी हो गई। सपना अब भी वही था, लेकिन उसे पूरा करने का रास्ता उनके सामने स्पष्ट नहीं था।
12वीं में पहुंचने के बाद Anshuman ने पहली बार NEET की तैयारी को गंभीरता से समझना शुरू किया। अप्रैल 2025 में उन्होंने PW का Lakshya NEET Hindi 2026 बैच लिया। यहीं से उन्हें यह समझ आया कि NEET की तैयारी किस तरह करनी है, किन विषयों पर मेहनत करनी है और अपनी पढ़ाई को किस दिशा में आगे बढ़ाना है।
इसके बाद उन्होंने पूरी मेहनत के साथ अपनी तैयारी शुरू कर दी।
Anshuman के परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि NEET की तैयारी पर आसानी से खर्च किया जा सके। उनके पिता कपड़े धोने का काम करते हैं और उनकी माँ कपड़ों पर प्रेस करती हैं। परिवार की आमदनी से घर का खर्च, स्कूल की फीस, राशन और बिजली का बिल ही मुश्किल से पूरा हो पाता था।
ऐसे में NEET की तैयारी के लिए जरूरी मॉड्यूल, किताबें और दूसरे स्टडी मटेरियल खरीदना एक अलग चुनौती थी। लेकिन Anshuman के माता-पिता ने उनकी जरूरतों को समझा और अपनी सीमित आय के बावजूद उनकी पढ़ाई को आगे बढ़ाने की कोशिश की।
Anshuman के लिए यह सिर्फ आर्थिक सहयोग नहीं था। माता-पिता का भरोसा उन्हें यह महसूस कराता था कि परिस्थितियां चाहे जैसी हों, उन्हें अपने लक्ष्य से पीछे नहीं हटना है।
Anshuman की कहानी में उनकी माँ का योगदान सबसे भावुक हिस्सा है। पढ़ाई के दौरान जब उन्हें मॉड्यूल, किताबों और पेपर बैंक जैसी चीजों की जरूरत थी, तब उन्होंने अपनी माँ से अपनी परेशानी साझा की।
2 फरवरी 2025 का वह दिन Anshuman आज भी नहीं भूलते। उस दिन उनकी माँ ने उन्हें सिर्फ आर्थिक मदद का भरोसा नहीं दिया, बल्कि यह विश्वास दिलाया कि उनका सपना अकेले उनका नहीं है।
माँ ने उनसे कहा:
"2 फरवरी 2025 का वह दिन मैं कभी नहीं भूल सकता। मम्मी ने कहा, मैं हर हाल में तेरे साथ हूँ। उसके बाद उन्होंने मेरे लिए मॉड्यूल, बुक्स और पेपर बैंक तक मंगवाए। बीच-बीच में पैसों की बहुत दिक्कत आई, लेकिन मम्मी ने कभी मुझे उसकी कमी महसूस नहीं होने दी।"
इसके बाद उनकी माँ ने Anshuman के लिए मॉड्यूल, किताबें और पेपर बैंक तक मंगवाए। घर में कई बार पैसों की दिक्कत आई, लेकिन उनकी माँ ने कोशिश की कि उसका असर Anshuman की पढ़ाई पर न पड़े।
माँ के इस विश्वास ने Anshuman को अपने लक्ष्य के लिए और मेहनत करने की ताकत दी।
NEET की तैयारी के दौरान Anshuman को सिर्फ आर्थिक चुनौतियों का सामना नहीं करना पड़ा। कई लोग उनकी पढ़ाई को देखकर कहते थे कि इतनी पढ़ाई करने से वे खुद पर बहुत ज्यादा दबाव डाल रहे हैं।
ऐसे समय में उनकी माँ उनके साथ खड़ी रहीं। वे Anshuman को समझातीं, उनका हौसला बढ़ातीं और उन्हें अपने लक्ष्य पर ध्यान बनाए रखने के लिए प्रेरित करतीं।
उनके पिता भी हर कदम पर उनका उत्साह बढ़ाते रहे। माता-पिता का यह भावनात्मक सहयोग Anshuman के लिए उतना ही महत्वपूर्ण था जितना किताबें और स्टडी मटेरियल।
इस पूरे सफर में उन्हें यह भरोसा रहा कि अगर वे मेहनत करते रहेंगे, तो उनके माता-पिता भी हर संभव तरीके से उनका साथ देंगे।
Anshuman के लिए PW का Lakshya NEET Hindi 2026 उनकी तैयारी में एक महत्वपूर्ण मोड़ बना। बचपन से डॉक्टर बनने का सपना था, लेकिन NEET की तैयारी कैसे करनी है, इसकी स्पष्ट समझ उन्हें 12वीं में PW से जुड़ने के बाद मिली।
Anshuman कहते हैं:
“12वीं में, अप्रैल 2025 में मैंने Lakshya NEET Hindi 2026 बैच लिया। तभी पहली बार समझ आया कि NEET की तैयारी कैसे की जाती है, और मैंने पूरी मेहनत के साथ पढ़ाई शुरू कर दी।”
बैच से जुड़ने के बाद उन्होंने अपनी पढ़ाई को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाया और पूरी मेहनत के साथ तैयारी की। सही दिशा मिलने के बाद उनका फोकस केवल सपना देखने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उसे पूरा करने के लिए लगातार मेहनत करने पर हो गया।
आर्थिक परिस्थितियों के बीच परिवार का सहयोग और PW से मिला मार्गदर्शन उनके NEET सफर का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा।
लगातार मेहनत के बाद Anshuman ने NEET में 489 अंक हासिल किए। यह उपलब्धि उनके लिए सिर्फ परीक्षा में मिले अंकों से कहीं ज्यादा है।
उनके लिए यह उनके माता-पिता की मेहनत, त्याग और विश्वास का परिणाम है। जिस परिवार की आमदनी से घर की बुनियादी जरूरतें पूरी करना ही चुनौती थी, उसी परिवार ने बेटे की NEET तैयारी के लिए किताबों और स्टडी मटेरियल का इंतजाम किया।
अपनी सफलता को माता-पिता से जोड़ते हुए Anshuman कहते हैं:
"आज अगर मैं इस मुकाम तक पहुँचा हूँ, तो यह सिर्फ मेरी नहीं, बल्कि मेरे माता-पिता की मेहनत, त्याग और विश्वास की जीत है।"
Anshuman अपनी माँ को अपनी सफलता का सबसे बड़ा सहारा मानते हैं। उनके लिए माँ का साथ उस ताकत की तरह रहा, जिसके बिना वे इस सफर को पूरा नहीं कर सकते थे।
वे अपनी माँ के लिए कहते हैं:
"मेरे लिए मेरी मम्मी वैसी ही हैं, जैसे गन्ने के बिना चीनी नहीं बन सकती—वैसे ही मैं उनके बिना कुछ भी नहीं हूँ।"
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