कभी-कभी किसी सपने की राह में सिर्फ एक नहीं, बल्कि कई बार असफलता सामने आती है। ऐसे समय में खुद पर भरोसा बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती होती है। उत्तर प्रदेश के कौशांबी के Nikhil Kumar की NEET journey भी लगातार कोशिश और धैर्य की कहानी है। उनके परिवार में किसी को NEET के बारे में जानकारी नहीं थी और आर्थिक परिस्थितियों के कारण उनके लिए ऑफलाइन कोचिंग करना भी संभव नहीं था। 9वीं कक्षा में YouTube के जरिए NEET के बारे में जानने के बाद उन्होंने इस परीक्षा की तैयारी का फैसला किया। 2024 में उनका पहला प्रयास सफल नहीं हुआ। इसके बाद Physics Wallah से जुड़कर उन्होंने NEET 2025 के लिए मेहनत की, लेकिन दूसरी बार भी सफलता नहीं मिली। BAMS काउंसलिंग में सीट न मिलने के बाद भी उन्होंने हार नहीं मानी और आखिरकार NEET 2026 में 478 अंक हासिल किए।
Nikhil के परिवार में किसी को भी NEET के बारे में जानकारी नहीं थी। ऐसे में इस परीक्षा के बारे में जानना और उसके लिए तैयारी करना उनके लिए बिल्कुल नई शुरुआत थी। उन्होंने 9वीं कक्षा में YouTube के माध्यम से पहली बार NEET के बारे में जाना।
NEET के बारे में जानने के बाद उन्होंने उसी समय अपने भविष्य को लेकर एक सोच बना ली। उनका मानना था कि वे जिस भी क्षेत्र में जाएं, वहां पूरी मेहनत और ईमानदारी के साथ आगे बढ़ने की कोशिश करेंगे।
Nikhil बताते हैं:
"मेरे परिवार में किसी को भी NEET के बारे में जानकारी नहीं थी। मैंने पहली बार 9वीं कक्षा में YouTube के माध्यम से NEET के बारे में जाना। उसी दिन मैंने तय कर लिया कि मैं जिस भी क्षेत्र में जाऊँगा, अपनी पूरी मेहनत और ईमानदारी के साथ सबसे ऊँचा मुकाम हासिल करने की कोशिश करूँगा।"
यही सोच आगे चलकर उनकी NEET तैयारी की शुरुआत बनी।
12वीं के बाद Nikhil ने NEET की तैयारी शुरू की। लेकिन उनके सामने पढ़ाई के साथ परिवार की आर्थिक परिस्थितियों की भी चुनौती थी। उनके पिता लंबे समय से बीमार थे और उनका नियमित इलाज चल रहा था।
परिवार की आय भी सीमित थी। उनके बाबा सेवानिवृत्त पोस्टमैन हैं और परिवार की आय मुख्य रूप से उनकी पेंशन और थोड़ी-सी खेती पर निर्भर थी। ऐसे में ऑफलाइन कोचिंग का खर्च उठाना Nikhil के परिवार के लिए आसान नहीं था।
उन्होंने अपनी परिस्थिति को समझते हुए घर से ही ऑनलाइन तैयारी करने का फैसला किया। इस तरह उन्होंने सीमित संसाधनों में NEET की तैयारी जारी रखने का रास्ता चुना।
Nikhil कहते हैं:
"मेरे पिताजी लंबे समय से बीमार थे और नियमित इलाज चल रहा था। मेरे बाबा सेवानिवृत्त पोस्टमैन हैं, और परिवार की आय केवल उनकी पेंशन और थोड़ी-सी खेती पर निर्भर थी। आर्थिक परिस्थितियों के कारण मैं ऑफलाइन कोचिंग नहीं कर सकता था, इसलिए मैंने घर से ही ऑनलाइन तैयारी करने का निर्णय लिया।"
Nikhil ने 2024 में पहली बार NEET की परीक्षा दी। लेकिन उस समय उनका बेस मजबूत नहीं था और तैयारी में कई कमियां रह गई थीं। इसका असर उनके परिणाम पर पड़ा और वे पहली कोशिश में सफल नहीं हो सके।
पहली असफलता के बाद उन्होंने अपनी तैयारी को बेहतर करने का फैसला किया। इसी दौरान वे Physics Wallah से जुड़े और NEET 2025 के लिए दोबारा पूरी मेहनत शुरू की।
इस बार उन्होंने पहले से बेहतर तैयारी करने की कोशिश की, लेकिन दूसरी कोशिश में भी सफलता उनके हाथ नहीं लगी। लगातार दो बार असफल होने के बावजूद उन्होंने अपनी तैयारी को पूरी तरह खत्म नहीं किया।
Nikhil अपनी शुरुआती कोशिशों के बारे में कहते हैं:
"2024 में मैंने पहली बार NEET दिया, लेकिन मेरा बेस मजबूत नहीं था और मैं सफल नहीं हो सका। इसके बाद मैंने Physics Wallah को जॉइन किया और NEET 2025 के लिए पूरी मेहनत की, लेकिन इस बार भी सफलता नहीं मिली।"
दो प्रयासों में सफलता न मिलने के बाद उनके लिए यह सफर और मुश्किल हो गया, लेकिन आगे की कहानी में उन्होंने अपनी असफलताओं से सीखने का फैसला किया।
लगातार दो बार NEET में सफलता न मिलने का असर Nikhil के आत्मविश्वास पर पड़ा। उन्होंने BAMS की काउंसलिंग में भी हिस्सा लिया, लेकिन वहां भी उन्हें सीट नहीं मिल सकी।
यह समय उनके लिए काफी कठिन था। एक तरफ NEET में दो असफलताएं थीं और दूसरी तरफ वैकल्पिक रास्ते में भी सफलता नहीं मिली। उन्हें लगने लगा था कि शायद किस्मत उनका साथ नहीं दे रही।
लेकिन इसी मुश्किल दौर में Nikhil ने खुद को संभालने का फैसला किया। उन्होंने अपनी पिछली गलतियों को समझा और यह तय किया कि वे एक आखिरी बार पूरी ताकत के साथ तैयारी करेंगे।
वे कहते हैं:
"दो बार असफल होने के बाद मेरा आत्मविश्वास टूट चुका था। मैंने BAMS की काउंसलिंग में भी भाग लिया, लेकिन वहाँ भी सीट नहीं मिली। यही वह समय था जब लगा कि शायद किस्मत मेरा साथ नहीं दे रही। लेकिन मैंने हार नहीं मानी। मैंने अपनी गलतियों को पहचाना, खुद पर फिर से भरोसा किया और एक आखिरी बार पूरी ताकत के साथ तैयारी शुरू की।"
यही फैसला उनकी journey का सबसे बड़ा मोड़ बना।
तीसरी कोशिश में Nikhil का नजरिया पहले से अलग था। अब वे अपनी पिछली असफलताओं की वजहों को समझ चुके थे। उन्होंने कमजोरियों को पहचानकर अपनी तैयारी को बेहतर किया और एक बार फिर लक्ष्य पर ध्यान लगाया।
दो बार असफल होने के बाद दोबारा शुरुआत करना मानसिक रूप से आसान नहीं था। लेकिन Nikhil ने यह तय किया कि पिछली असफलताएं उनके भविष्य का फैसला नहीं करेंगी।
उन्होंने लगातार मेहनत की और NEET की तैयारी को जारी रखा। आखिरकार उनकी मेहनत रंग लाई और उन्होंने NEET में 478 अंक हासिल किए।
यह उपलब्धि उनके लिए सिर्फ एक परीक्षा का परिणाम नहीं थी। यह उन सभी मुश्किल परिस्थितियों और असफलताओं पर जीत थी, जिनका उन्होंने अपनी journey में सामना किया।
Nikhil ने अपनी सफलता में Hindi Medium में उपलब्ध गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई को भी महत्वपूर्ण माना। उनके लिए कठिन विषयों को अपनी भाषा में समझना तैयारी का एक अहम हिस्सा रहा।
वे Physics Wallah को विशेष रूप से धन्यवाद देते हैं कि Hindi Medium छात्रों के लिए भी पढ़ाई को आसान तरीके से उपलब्ध कराया गया।
Nikhil कहते हैं:
"मैं Physics Wallah का विशेष रूप से धन्यवाद करना चाहता हूँ कि उसने Hindi Medium छात्रों के लिए भी उतनी ही गुणवत्ता के साथ पढ़ाई उपलब्ध कराई। अपनी भाषा में कठिन विषयों को समझ पाना मेरी सफलता की सबसे बड़ी वजहों में से एक रहा।"
अपनी भाषा में concepts को समझने से Nikhil को तैयारी को आगे बढ़ाने में मदद मिली और उन्होंने अपने लक्ष्य पर ध्यान बनाए रखा।
अपनी आगे की मंजिल के बारे में Nikhil कहते हैं:
"यह सफलता मेरी मंज़िल नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत है। अब मेरा सपना सिर्फ डॉक्टर बनना नहीं, बल्कि एक ऐसा डॉक्टर बनना है जो अपने ज्ञान और सेवा से समाज के लिए कुछ अच्छा कर सके।"
Nikhil Kumar की कहानी बताती है कि दो बार की असफलता किसी सपने का अंत नहीं होती। 2024 में असफलता, NEET 2025 में दोबारा न मिल सकी सफलता और BAMS काउंसलिंग में सीट न मिलने के बाद भी उन्होंने खुद पर भरोसा बनाए रखा। आखिरकार 478 अंक के साथ उन्होंने अपनी मेहनत को परिणाम में बदला और साबित किया कि सही सोच, लगातार प्रयास और अपनी गलतियों से सीखने की क्षमता आपको फिर से खड़ा कर सकती है।
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