हर डॉक्टर बनने की कहानी एक जैसी नहीं होती। कुछ कहानियों की शुरुआत बड़े शहरों की महंगी कोचिंग से होती है, तो कुछ की शुरुआत केरोसिन की चिमनी की रोशनी से। मध्य प्रदेश के रीवा के Pravesh Prajapati की कहानी भी ऐसे ही संघर्ष से शुरू हुई। बचपन में उनके घर में बिजली तक नहीं थी और 5वीं कक्षा तक उन्हें ठीक से हिंदी पढ़ना भी नहीं आता था। इसके बावजूद उन्होंने बिना कोचिंग के 10वीं में 75% और 12वीं में 78% अंक हासिल किए। डॉक्टर बनने का सपना पूरा करने के लिए उन्होंने NEET की तैयारी शुरू की, लेकिन 2023, 2024 और 2025 में लगातार असफलताओं का सामना करना पड़ा। परिवार की बीमारी और जिम्मेदारियों के बीच भी उन्होंने अपना लक्ष्य नहीं छोड़ा। PW Hindi Medium के साथ तैयारी जारी रखते हुए Pravesh ने Re-NEET 2026 में 463 अंक हासिल किए।
Pravesh का बचपन बेहद साधारण परिस्थितियों में बीता। उनके परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी थी कि घर में बिजली तक उपलब्ध नहीं थी। पढ़ाई के लिए उन्हें केरोसिन की चिमनी का सहारा लेना पड़ता था।
शुरुआती पढ़ाई में भी उन्हें कई परेशानियों का सामना करना पड़ा। 5वीं कक्षा तक उन्हें ठीक से हिंदी पढ़ना नहीं आता था। लेकिन इन कमियों को उन्होंने अपनी कमजोरी नहीं बनने दिया। उन्होंने लगातार मेहनत की और धीरे-धीरे पढ़ाई में सुधार किया।
Pravesh बताते हैं:
"मैं एक बहुत ही साधारण और गरीब परिवार से हूँ। बचपन में हमारे घर में बिजली तक नहीं थी। मैं केरोसिन की चिमनी जलाकर पढ़ाई करता था। 5वीं तक मुझे ठीक से हिंदी पढ़ना भी नहीं आता था, लेकिन मेहनत कभी नहीं छोड़ी।"
उनकी मेहनत का परिणाम यह रहा कि बिना किसी कोचिंग के उन्होंने 10वीं में 75% और 12वीं में 78% अंक हासिल किए।
12वीं के बाद Pravesh के मन में डॉक्टर बनने का सपना था। लेकिन उस समय उन्हें यह तक नहीं पता था कि डॉक्टर बनने के लिए NEET परीक्षा देनी होती है।
उनकी सोच थी कि किसी स्थानीय डॉक्टर के साथ रहकर वे डॉक्टर बन सकते हैं। बाद में उनके मामा और गाँव के एक शिक्षक ने उन्हें NEET के बारे में बताया। यहीं से उनके डॉक्टर बनने के सपने को सही दिशा मिली।
Pravesh कहते हैं:
"12वीं के बाद मेरा सिर्फ एक सपना था—डॉक्टर बनना। लेकिन मुझे यह भी नहीं पता था कि डॉक्टर बनने के लिए NEET देना पड़ता है। मैं तो सोचता था कि किसी झोलाछाप डॉक्टर के साथ रहकर ही डॉक्टर बन जाऊँगा। तब मेरे मामा और गाँव के एक शिक्षक की मदद से पहली बार NEET के बारे में पता चला।"
NEET के बारे में जानकारी मिलने के बाद Pravesh ने MBBS को अपना लक्ष्य बना लिया।
NEET की तैयारी के लिए ऑफलाइन कोचिंग करना Pravesh के परिवार के लिए संभव नहीं था। ऐसे में उन्हें ऐसी पढ़ाई की जरूरत थी जो उनकी आर्थिक स्थिति के अनुसार हो और जिसमें वे अपनी भाषा में concepts समझ सकें।
इसी दौरान उन्हें Physics Wallah Hindi Medium के बारे में पता चला। शुरुआत में उन्होंने Hinglish बैच लिया, लेकिन भाषा समझने में परेशानी हुई। इसके बाद उन्होंने किसी तरह पैसे जुटाए और Hindi batch लिया।
Pravesh के लिए यही उनकी NEET तैयारी का वास्तविक मोड़ बना।
वे बताते हैं:
"घर की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि मैं ऑफलाइन कोचिंग कर पाता। तभी मुझे Physics Wallah Hindi Medium के बारे में पता चला। पहले Hinglish बैच लिया, समझ नहीं आया, फिर किसी तरह पैसे जुटाकर हिंदी बैच लिया और वहीं से मेरी असली तैयारी शुरू हुई।"
Hindi Medium में पढ़ाई मिलने से उन्हें कठिन topics को अपनी भाषा में समझने और अपनी तैयारी को आगे बढ़ाने में मदद मिली।
Pravesh की NEET journey लगातार प्रयासों और असफलताओं से भरी रही। NEET 2023 में उन्हें 232 अंक मिले। इसके बाद उन्होंने अपनी तैयारी जारी रखी और 2024 में स्कोर बढ़ाकर 338 अंक किया।
2025 में उन्होंने फिर मेहनत की और इस बार 354 अंक हासिल किए। हालांकि स्कोर में लगातार सुधार हो रहा था, लेकिन उनका MBBS में प्रवेश का सपना अभी भी पूरा नहीं हुआ था।
लगातार असफलताओं के बावजूद Pravesh ने अपने लक्ष्य को बदलने के बारे में नहीं सोचा।
वे कहते हैं:
"NEET 2023 में 232 अंक, 2024 में 338 अंक और 2025 में 354 अंक आए। हर साल असफलता मिली, लोग कहते थे कि अब छोड़ दो। लेकिन मैंने अपने परिवार से सिर्फ एक बात कही—'करूँगा तो सिर्फ MBBS, चाहे जितने ड्रॉप लेने पड़ें।'"
यही जिद आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी ताकत बनी।
Pravesh की मुश्किलें केवल NEET तक सीमित नहीं थीं। तैयारी के दौरान उनके परिवार में कई गंभीर परिस्थितियां आईं।
उनकी माँ बीमार हो गईं और करीब एक महीने तक घर की जिम्मेदारियां Pravesh को संभालनी पड़ीं। उन्हें घर का काम करने के साथ बकरियों और भैंसों की देखभाल और खाना बनाने की जिम्मेदारी भी उठानी पड़ी।
इसके बाद उनके भाई की बड़ी सर्जरी हुई, जिसके लिए उन्हें कई दिनों तक KGMU लखनऊ में रहना पड़ा। भाई की देखभाल के बाद उनके पिता का भी ऑपरेशन हुआ। आयुष्मान कार्ड से जुड़ी परेशानियों को संभालने की जिम्मेदारी भी Pravesh पर आ गई।
इन सबके बीच उनकी खुद की तबीयत भी खराब हुई और उन्हें अल्सर हो गया। लेकिन उन्होंने पढ़ाई नहीं छोड़ी।
यह दौर उनके लिए मानसिक और शारीरिक दोनों तरह से कठिन था, फिर भी MBBS का सपना उन्हें आगे बढ़ाता रहा।
इतनी परेशानियों के बावजूद Pravesh ने NEET 2026 की तैयारी जारी रखी। परीक्षा में उन्हें 446 अंक मिले। इसके बाद Re-NEET का अवसर मिला और उन्होंने इसे अपने लिए एक और मौका माना।
उन्होंने दोबारा मेहनत की और Re-NEET 2026 में अपना स्कोर बढ़ाकर 463 अंक कर लिया।
यह सुधार उनके लिए बेहद खास था क्योंकि इसके पीछे केवल पढ़ाई नहीं, बल्कि कई सालों की मेहनत और कठिन परिस्थितियों से लड़ने का अनुभव था।
Pravesh को अब पूरा विश्वास है कि इस बार उनका MBBS में प्रवेश का सपना पूरा होगा।
अपनी यात्रा में Pravesh अपने माता-पिता के त्याग और अपनी मेहनत के साथ Physics Wallah Hindi Medium Team के योगदान को भी महत्वपूर्ण मानते हैं।
उनके लिए PW ने केवल पढ़ाई उपलब्ध नहीं कराई, बल्कि सीमित संसाधनों वाले एक गाँव के छात्र को NEET की तैयारी करने का अवसर भी दिया।
Pravesh कहते हैं:
"आज अगर मैं यहाँ तक पहुँचा हूँ, तो वह मेरे माता-पिता के त्याग, मेरी मेहनत और Physics Wallah Hindi Medium Team की वजह से है। अगर PW का साथ नहीं मिलता, तो शायद मेरे जैसे गाँव के छात्र का डॉक्टर बनने का सपना सिर्फ सपना ही रह जाता।"
अपनी भाषा में पढ़ाई और ऑनलाइन preparation के माध्यम से उन्हें अपनी परिस्थितियों के बीच NEET की तैयारी जारी रखने में मदद मिली।
Pravesh अपनी सफलता के लिए अपने माता-पिता के साथ PW के शिक्षकों और पूरी टीम के प्रति भी आभार व्यक्त करते हैं। उन्होंने खास तौर पर Alakh Sir को धन्यवाद दिया, जिन्होंने Physics Wallah के जरिए Hindi Medium छात्रों के लिए पढ़ाई का अवसर उपलब्ध कराया।
वे कहते हैं:
"दिल से धन्यवाद Alakh Sir, पूरी PW टीम और मेरे सभी शिक्षकों का। आपने सिर्फ मुझे पढ़ाया नहीं, बल्कि मुझे अपने सपने तक पहुँचने का रास्ता दिखाया।"
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