NCERT Solutions for Class 9 Hindi Sanchayan Chapter 2 help students understand the story “स्मृति,” a touching narrative based on memories, emotions, and relationships.
These solutions are useful for Class 9 students for a comprehensive understanding of Class 9 Hindi Sanchayan syllabus.
The chapter highlights how small moments from the past shape our emotions. Through well-explained answers and the Smriti Class 9 Summary, students can revise quickly and understand the text’s message clearly. These NCERT Solutions of Class 9 Hindi also help improve writing skills and ensure full exam preparation for Class 9 Smriti Question Answer.
NCERT Solutions Class 9 Hindi Sanchayan Chapter 2 provides clear and well-structured answers to help students understand the chapter effectively.
The solutions explain each question in simple and easy-to-understand language. This makes it easier for students to understand the central ideas, themes, and literary elements of the lesson.
Below are the NCERT Solutions Smriti Class 9 Question Answers for students to prepare well for Class 9 Hindi exam.
1. भाई के बुलाने पर घर लौटते समय लेखक के मन में किस बात का डर था?
उत्तर:- जब लेखक झरबेरी से बेर तोड़ रहा था तभी एक आदमी ने पुकार कर कहा कि तुम्हारे भाई बुला रहे हैं, शीघ्र चले आओ। यह सुनकर लेखक घर की ओर लौटने लगा। पर लेखक के मन में भाई साहब की मार का डर था। इसलिए वह सहमा-सहमा जा रहा था। उसे समझ में नहीं आ रहा था कि उससे कौन-सा कसूर हो गया। उसे आशंका थी कि कहीं बेर खाने के अपराध में उसकी पेशी न हो रही हो। वह अज्ञात डर से डरते-डरते घर में घुसा।
2. मक्खनपुर पढ़ने जाने वाली बच्चों की टोली रास्ते में पड़ने वाले कुएँ में ढेला क्यों फेंकती थी?
उत्तर:- मक्खनपुर पढ़ने जाने वाले बच्चों की टोली पूरी वानर टोली थी। उन बच्चों को पता था कि कुएँ में साँप रहता है। लेखक ढेला फेंककर साँप से फुसकार करवा लेना बड़ा काम समझता था। बच्चों में ढेला फेंककर फुसकार सुनने की प्रवृत्ति जाग्रत हो गई थी। कुएँ में ढेला फेंककर उसकी आवाज तथा उससे सुनने के बाद अपनी बोली सुनने की प्रतिध्वनि सुनने की लालसा उनके मन में रहती थी।
3. ‘साँप ने फुफकार मारी या नहीं, ढेला उसे लगा या नहीं, यह बात अब तक स्मरण नहीं’ – यह कथन लेखक की किस मनोदशा को स्पष्ट करता है?
उत्तर:- यह घटना १९०८ में घटी थी और लेखक ने इसे अपनी माँ को १९१५ में सात साल बाद बताया था। उन्होंने इसे लिखा तो और भी बाद में होगा। अतः उन्हें पूरी घटना का स्मरण नहीं।लेखक ने जब ढेला उठाकर कुएँ में साँप पर फेंका तब टोपी में रखी चिट्ठियाँ कुएँ में गिर गई। यह देखकर दोनों भाई घबरा गए और रोने लगे। लेखक को भाई की पिटाई का डर था।तब उन्हें माँ की गोद याद आ रही थी। अब वह और भी भयभीत हो गए थे। इस वजह से उन्हें यह बात अब याद नहीं कि ‘साँप ने फुफकार मारी या नहीं, ढेला उसे लगा या नहीं’।
4. किन कारणों से लेखक ने चिट्ठियों को कुएँ से निकालने का निर्णय लिया?
उत्तर:- लेखक को चिट्ठियाँ बड़े भाई ने दी थी। डाकखाने जाते वक्त जैसे ही कुआँ सामने आया और लेखक ने ढेला उठाकर कुएँ में साँप पर फेंका तब टोपी में रखी चिट्ठियाँ कुएँ में गिर गई।यह देखकर दोनों भाई घबरा गए और रोने लगे। लेखक को भाई की पिटाई का डर सताने लगा था। अब वह और भी भयभीत हो गए थे। इसी मनःस्थिति में उसने कुएँ से चिट्ठियों को निकालने का निर्णय लिया।
5. साँप का ध्यान बाँटने के लिए लेखक ने क्या-क्या युक्तियाँ अपनाई?
उत्तर:- साँप का ध्यान बाँटने के लिए लेखक ने निम्नलिखित युक्तियाँ अपनाई –
1. उसने डंडे से साँप को दबाने का ख्याल छोड़ दिया।
2. उसने साँप का फन पीछे होते ही अपना डंडा चिट्ठियों की ओर कर दिया और लिफाफा उठाने की चेष्टा की।
3. डंडा लेखक की ओर खीच आने से साँप का आसन बदल गया और लेखक ने तुरंत लिफाफे और पोस्टकार्ड चुन लिए और उन्हें अपनी धोती के छोर में बाँध लिया।
6. कुएँ में उतरकर चिट्ठियों को निकालने संबंधी साहसिक वर्णन को अपने शब्दों में लिखिए।
उत्तर:- भाई द्वारा दी गई चिट्ठियाँ लेखक से कुएँ में गिर गई थी और उन्हें उठाना भी ज़रुरी था। लेकिन कुएँ में साँप था, जिसके काटने का डर था। परन्तु लेखक ने कुएँ से चिट्ठियाँ निकालने का निर्णय लिया। उसने अपनी और अपने भाई की धोतियाँ कुछ रस्सी मिलाकर बाँधी और धोती की सहायता से वह कुएँ में उतरा। अभी 4-5 गज ऊपर ही था कि साँप फन फैलाए हुए दिखाई दिया। उसने सोचा धोती से लटककर साँप को मारा नहीं जा सकता और डंडा चलाने के लिए पर्याप्त जगह नहीं थी। लेखक ने डंडे से चिट्ठियाँ सरकाने का प्रयत्न किया तो साँप डंडे पर लिपट गया। साँप का पिछला हिस्सा लेखक के हाथ को छू गया तो उसने डंडा पटक दिया। उसका पैर भी दीवार से हट गया और धोती से लटक गया। फिर हिम्मत करके उसने कुएँ की मिट्टी साँप के एक ओर फेंकी। डंडे के गिरने और मिट्टी फेंकने से साँप का आसन बदल गया और लेखक चिट्ठियाँ उठाने में सफल रहा। धीरे से डंडा भी उठा लिया और कुएँ से बाहर आ गया। वास्तव में यह एक साहसिक कार्य था।
7. इस पाठ को पढ़ने के बाद किन-किन बाल-सुलभ शरारतों के विषय में पता चलता है?
उत्तर:- इस पाठ को पढ़ने के बाद निम्नलिखित बाल-सुलभ शरारतों के विषय में पता चलता है –
• बच्चे झरबेरी के बेर तोड़कर खाने का आनंद लेते हैं।
• स्कूल जाते समय रास्ते में शरारतें करते हैं।
• कठिन एंव जोखिम पूर्ण कार्य करते हैं।
• जानवरों एंव जीव-जन्तुओं को तंग करते हैं।
• कुएँ में ढेला फेंककर खुश होते हैं।
• माली से छिपकर फल तोड़ना पसंद करते हैं।
• गलत काम करने के बाद सज़ा मिलने से डरते हैं।
8. ‘मनुष्य का अनुमान और भावी योजनाएँ कभी-कभी कितनी मिथ्या और उलटी निकलती हैं’- का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:- मनुष्य किसी कठिन काम को करने के लिए अपनी बुद्धि से योजनाएँ तो बनाता है, किंतु समस्याओं का वास्तविक सामना होते ही ये योजनाएँ धरी की धरी रह जाती हैं। तब उसे यथार्थ स्थिति को देखकर काम करना पड़ता है। इस पाठ में लेखक ने सोचा था कि कुएँ में उतरकर वह डंडे से साँप को मार देगा और चिट्ठियाँ उठा लेगा, परंतु कुएँ का कम व्यास देखकर उसे लगा कि यहाँ तो डंडा चलाया ही नहीं जा सकता है। उसने जब साँप को फन फैलाए अपनी प्रतीक्षा करते पाया तो साँप को मारने की योजना उसे एकदम मिथ्या और उलटी लगने लगी।
9. ‘फल तो किसी दूसरी शक्ति पर निर्भर है’ – पाठ के संदर्भ में इस पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:- मनुष्य तो कर्म करता है, पर उसे फल देने का काम ईश्वर करता है। मनचाहे फल को पाना मनुष्य के बस की बात नहीं है। यह तो उस शक्ति पर ही निर्भर करता है जो फल देती है। इस पाठ के लेखक ने कुएँ से चिट्ठियाँ निकालने के तरह-तरह के अनुमान लगाए, योजनाएँ बनायीं और उसमे फेर-बदल भी करना पड़ा, अंततः उसे सफलता मिली। गीता में भी कर्म के महत्व को दर्शाया गया है-‘ कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन्’।
1. बड़े भाई द्वारा बुलाए जाने की बात सुनकर लेखक की क्या दशा हुई और क्यों ?
उत्तर:- बड़े भाई द्वारा बुलाई जाने की बात सुनकर लेखक घबरा गया। उसे बड़े भाई द्वारा पिटाई किए जाने का भय सता रहा था। वह कडी सरदी और ठंडी हवा के प्रकोप के बीच अपने छोटे भाई के साथ झरबेरी के बेर तोड़-तोड़कर खा रहा था। कहीं बेर खाने के अपराध में ही तो उसे नहीं बुलाया जा रहा था।
2. लेखक को अपने पिटने का भय कब दूर हुआ?
उत्तर:- लेखक अपने बड़े भाई के बुलाने पर सहमा-सा घर आया तो देखा कि उसके बड़े भाई पत्र लिख रहे हैं। भाई को पत्र लिखते देखकर वह समझ गया कि उसे इन पत्रों को डाकखाने में डालने के लिए ही बुलवाया होगा। यह सोचकर उसे अपने पिटने का भय जाता रहा।
3. डाकखाने में पत्र डालने जाते समय लेखक ने क्या-क्या तैयारियाँ कीं और क्यों?
उत्तर:- डाकखाने में पत्र डालने जाते समय लेखक ने निम्नलिखित तैयारियाँ कीं-
• उसने और उसके छोटे भाई ने अपने-अपने कानों को धोती से बाँधा।
• उसने अपना मजबूत बबूल का डंडा साथ लिया।
• उनकी माँ ने उन्हें भुनाने के लिए चने दिए।
• उन्होंने सिर पर टोपियाँ लगाईं।
उन्होंने ये तैयारियाँ इसलिए की क्योंकि सरदी के मौसम में तेज़ हवा हड्डियों को भी कँपा रही थी।
4. लेखक को अपने डंडे से इतना मोह क्यों था?
उत्तर:- लेखक को अपने डंडे से इतना मोह इसलिए था, क्योंकि-
• उसने इस डंडे से अब तक कई साँप मारे थे।
• वह इस डंडे से आम के पेड़ों से प्रतिवर्ष आम तोड़ता था।
• उसे अपना मूक डंडा सजीव-सा लगता था।
5. कुएँ में साँप होने का पता लेखक एवं अन्य बच्चों को कैसे चला?
उत्तर:- लेखक और उसके साथ अन्य बच्चे मक्खनपुर पढ़ने जाते थे। उसी रास्ते में छत्तीस फुट गहरा सूखा कच्चा कुआँ था। लेखक ने एक स्कूल से लौटते हुए उसमें झाँक कर देखा और एक ढेला इसलिए फेंका ताकि वह ढेले की आवाज़ सुन सके, पर ढेला गिरते ही उसे एक फुसकार सुनाई दी। इस तरह वे जान गए कि कुएँ में साँप है।
6. लेखक पर बिजली-सी कब गिर पड़ी?
उत्तर:- लेखक अपने छोटे भाई के साथ मक्खनपुर डाक में चिट्ठियाँ डालने जा रहा था। उसके साथ उसका छोटा भाई भी था। उस रास्ते में एक कुआँ पड़ता था जिसमें साँप गिर पड़ा था। लेखक के मन में उसकी फुसकार सुनने की इच्छा जाग्रत हुई। उसने एक हाथ से टोपी उतारी और उसी समय दूसरे हाथ से ढेला कुएँ में फेंका। टोपी उतारते ही उसमें रखी चिट्ठियाँ कुएँ में चक्कर काटते हुए गिर रही थी। चिट्ठियों की ऐसी स्थिति देखकर लेखक पर बिजली-सी गिर पड़ी।
1. लेखक को माँ की याद कब और क्यों आई?
उत्तर:- लेखक अपने भाई द्वारा लिखी चिट्ठियाँ डाक में डालने जा रहा था कि उसके मन में कुएँ में गिरे साँप की फुफकार सुनने की इच्छा जाग उठी। उसने ढेला फेंकने के लिए ज्यों ही अपने सिर से टोपी उतारी उसमें रखी टोपियाँ चक्कर काटती हुई कुएँ में गिर पड़ीं। लेखक निराशा, पिटने के भय, और उद्वेग से रोने का उफ़ान नहीं सँभाल पा रहा था। इस समय उसे माँ की गोद की याद आ रही थी। वह चाहता था कि माँ आकर उसे छाती से लगा ले और लाड-प्यार करके कह दे कि कोई बात नहीं, चिट्ठियाँ फिर लिख ली जाएँगी। उसे विश्वास था कि माँ ही उसे इस विपदा में सच्ची सांत्वना दे सकती है।
2.‘ लेखक चिट्ठियों के बारे में घर जाकर झूठ भी बोल सकता था, पर उसने ऐसा नहीं किया’ इसके आलोक में लेखक की चारित्रिक विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए बताइए कि आप लेखक के चरित्र से किन-किन विशेषताओं को अपनाना चाहेंगे?
उत्तर:- लेखक जानता था कि जिस कुएँ में उससे चिट्ठियाँ गिर गई हैं, उसमें जहरीला साँप रहता था। उसके पास से चिट्ठियाँ उठाना अत्यंत जोखिम भरा था। वह चिट्ठियों के बारे में घर आकर झूठ-भी बोल सकता था, पर उसने झूठ बोलने के बजाय कुएँ से चिट्ठियाँ निकालने का जोखिम भरा कार्य किया। लेखक के चरित्र में सत्यनिष्ठा थी, जो उसके झूठ बोलने की सोच पर भारी पड़ रही थी। वह साहसी और बुद्धिमान था, जिसके बल पर वह पहले भी कई साँप मार चुका था। उसका संकल्प और आत्मबल मज़बूत था जिसके सहारे वह असंभव को भी सरल काम समझ रहा था। इसी के बल पर उसने योजनानुसार अपना काम किया। मैं लेखक के चरित्र से सत्यनिष्ठ, प्रत्युत्पन्नमति, साहसी, बुद्धि से काम करने की कला तथा दृढ़ संकल्प जैसे गुण अपनाना चाहता हूँ।
3. कुएँ से चिट्ठियाँ निकालने में उसके भाई का कितना योगदान था? इससे लेखक के चरित्र में किन-किन जीवन मूल्यों की झलक मिलती है?
उत्तर:- लेखक कुएँ से चिट्ठियाँ निकालने का काम संभवतः करने की सोच भी न पाता, यदि उसे अपने भाई का सहयोग न मिलता। लेखक ने दृढ़ संकल्प से अपनी दुविधा पर विजयी पाई। उसने चिट्ठियाँ निकालने के लिए अपनी दो धोतियाँ तथा अपने छोटे भाई की दोनों धोतियों के अलावा वह धोती भी बाँधी जिसमें भुनवाने के लिए चने बँधे थे, को परस्पर बाँधा। अब उसके छोर पर एक डंडा बाँधकर उसने कुएँ में लटका दिया और दूसरे हिस्से को कुएँ की डेंग में बाँधकर इसे अपने भाई को पकड़ा दिया। इसके बाद वह चिट्ठियाँ उठाने के लिए कुएँ में उतर गया। अदम्य साहस और बुद्धि कौशल का परिचय देते हुए चिट्ठियाँ निकालने में वह सफल हो गया। इस कार्य से लेखक के साहसी होने, बुद्धिमान होने, योजनानुसार कार्य करने तथा भाई से असीम लगाव रखने जैसे उच्च जीवन मूल्यों की झलक मिलती है।
4. लेखक ने किस तरह अत्यंत सूझ-बूझ से अपनी जिम्मेदारी का निर्वाह किया? ‘स्मृति’ पाठ के आलोक में स्पष्ट कीजिए। इससे आपको क्या सीख मिलती है?
उत्तर:- ‘स्मृति’ पाठ में लेखक को उसके भाई ने डाक में डालने की चिट्ठियाँ दी थीं। उसकी असावधानी के कारण ये चिट्ठियाँ उस कुएँ में गिर गईं, जिसमें विषधर बैठा था। उसके पास से चिट्ठियाँ उठाना शेर के जबड़े से माँस खींचने जैसा कठिन और जोखिम भरा था, जिसमें जरा-सी चूक जानलेवा साबित हो सकती थी। यद्यपि ऐसा करने के पीछे एक ओर उसमें जिम्मेदारी का भाव था, तो दूसरी ओर भाई से पिटने का भय परंतु उसने अदम्य साहस, दृढ़ संकल्प और आत्मविश्वास, धैर्य, विपरीत परिस्थितियों में बुद्धिमानी से काम करने की कला के कारण वह मौत के मुँह से चिट्ठियाँ उठा लिया और मौत को ठेंगा दिखा दिया। इस घटना से हमें यह सीख भी मिलती है कि ऐसी घटनाओं को हमें प्रोत्साहित नहीं करना चाहिए और ऐसा कार्य करने से पहले अपने से बड़ों की राय-सलाह अवश्य लेनी चाहिए, ताकि हम किसी अनहोनी का शिकार न बनें।
5.‘स्मृति’ कहानी हमें बच्चों की दुनिया से सच्चा परिचय कराती है तथा बाल मनोविज्ञान का सफल चित्रण करती है। इससे आप कितना सहमत हैं? स्पष्ट कीजिए।
उत्तर:- ‘स्मृति’ कहानी का समूचा कथानक बच्चों की दुनिया के आसपास ही घूमता है। इसमें एक ओर बाल मनोविज्ञान का सुंदर चित्रण है तो बाल सुलभ क्रीड़ाओं का संचार भी रचा-बसा है। इसके अलावा बालकों के साहस, बुद्धि, उत्साह के कारण खतरे को अनदेखा करने जैसे क्रियाकलापों का भी उल्लेख है। कहानी की शुरुआत में ही बच्चों को कड़ी ठंड में झरबेरी तोड़कर खाते हुए चित्रित किया गया है, जिसमें उन्हें असीम आनंद मिलता है परंतु भाई द्वारा बुलाए जाने की बात सुनकर यह आनंद तुरंत भय में बदल जाता है परंतु भाई का पत्र लिखता देख उसके मन से भय गायब हो जाता है।
बच्चे स्कूल जाते हुए उछल-कूद और हँसी मजाक ही नहीं वरन् तरह-तरह की शरारतें भी करते हैं। वे कुएँ में पड़े साँप की फुफकार सुनने के लिए उसमें मिट्टी का ढेला फेंककर हर्षित होते हैं। गलती हो जाने पर वे पिटाई से बचने के लिए तरह-तरह के बहाने सोचते हैं तो समय पर जि मेदारी की अनुभूति करते हैं और जान जोखिम में डालने से भी पीछे नहीं हटते हैं। इस तरह यह कहानी बाल मनोविज्ञान का सफल चित्रण करती है।
“स्मृति” is a heartfelt chapter that revolves around memories of childhood, relationships, and emotional connections. The narrator recalls past moments that left a deep impact on their life. These memories are tied to love, affection, and sometimes loss. The chapter teaches that memories stay with us forever and give meaning to life.
The story also shows how certain incidents, people, or experiences become unforgettable. The tone of the chapter is emotional yet thoughtful, helping students understand how memory shapes human behavior and feelings.
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