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कक्षा 9 हिंदी गंगा अध्याय 8 ‘रैदास के पद’: NCERT के महत्वपूर्ण प्रश्न और उत्तर

NCERT Class 9 Hindi Ganga Chapter 8 रैदास के पद प्रश्न उत्तर में संत रैदास द्वारा रचित पदों के महत्वपूर्ण प्रश्नों के सरल उत्तर दिए गए हैं। इन प्रश्नों में आराध्य के प्रति अटूट भक्ति, भक्त और भगवान के संबंध, ईश्वर की सर्वव्यापकता तथा सच्चे समर्पण जैसे प्रमुख भावों को समझाया गया है।
authorImageEkta Rakesh Singh10 Oct, 2026
कक्षा 9 हिंदी गंगा अध्याय 8 ‘रैदास के पद’

 

NCERT Class 9 Hindi Ganga Chapter 8 रैदास के पद प्रश्न उत्तर विद्यार्थियों को संत रैदास की भक्ति भावना और उनके पदों के अर्थ को समझने में मदद करते हैं। इन पदों में कवि ने भगवान के प्रति अपने अटूट प्रेम, विश्वास और समर्पण को विभिन्न उपमाओं के माध्यम से व्यक्त किया है। PW छात्रों की मदद के लिए NCERT Solutions उपलब्ध करा रहा है, जिससे वे पाठ के महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर समझ सकें और परीक्षा से पहले प्रमुख भावों का रिवीजन कर सकें।

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Class 9 Hindi Chapter 8 “रैदास के पद” प्रश्न उत्तर

संत रैदास के पदों में भक्त और भगवान के बीच गहरे प्रेम और अटूट संबंध को दर्शाया गया है। कवि ने चंदन और पानी, दीपक और बाती, बादल और मोर तथा मोती और धागे जैसी उपमाओं के माध्यम से अपनी भक्ति भावना व्यक्त की है। इन पदों में बाहरी कर्मकांडों की तुलना में ईश्वर के प्रति सच्चे विश्वास और समर्पण को अधिक महत्व दिया गया है।

नीचे रैदास के पद के महत्वपूर्ण बहुविकल्पीय और वर्णनात्मक प्रश्नों के उत्तर दिए गए हैं। विद्यार्थी पहले स्वयं प्रश्न हल करने का प्रयास करें और फिर दिए गए उत्तरों से अपने उत्तरों का मिलान करें।

रैदास के पद के बहुविकल्पीय प्रश्न

1. आराध्य के नाम का स्मरण

प्रश्न: “अब कैसे छूटै राम रट लागी” पंक्ति का भाव है?

(1) नाम उच्चारण की कठिनाई
(2) नाम रटकर याद करना
(3) आराध्य का नाम जपना
(4) मित्रों का नाम रटना

उत्तर: (3) आराध्य का नाम जपना

इस पंक्ति में संत रैदास के मन में भगवान राम के नाम के प्रति गहरी भक्ति और लगाव का भाव व्यक्त हुआ है। वे बताते हैं कि जब मन आराध्य के नाम में रम जाता है, तो उस स्मरण से अलग होना कठिन हो जाता है।

2. आराध्य और भक्त का संबंध

प्रश्न: “प्रभु जी तुम चंदन हम पानी” पंक्ति में आराध्य और भक्त का संबंध किस रूप में व्यक्त हुआ है?

(1) एकाकार और समरूप
(2) तरल और तीव्र सुगंध
(3) आश्रय और आश्रित
(4) द्रव और ठोस

उत्तर: (1) एकाकार और समरूप

इस पंक्ति में कवि भगवान को चंदन और स्वयं को पानी के समान बताते हैं। जिस प्रकार पानी में चंदन घुलकर अपनी सुगंध फैला देता है, उसी प्रकार भक्त अपने आराध्य के प्रेम और भक्ति में पूरी तरह रम जाना चाहता है। इससे दोनों के गहरे जुड़ाव का भाव प्रकट होता है।

3. दीपक और बाती का प्रतीक

प्रश्न: “तुम दीपक, हम बाती” से रैदास का क्या भाव है?

(1) दीपक और बाती का कोई मेल नहीं होता है।
(2) दीपक बिना बाती भी जल सकता है।
(3) भक्त आराध्य से अधिक महत्वपूर्ण है।
(4) भक्त का आराध्य से मेल जीवन को आलोकित करता है।

उत्तर: (4) भक्त का आराध्य से मेल जीवन को आलोकित करता है।

इस पंक्ति में संत रैदास भगवान को दीपक और स्वयं को बाती के रूप में प्रस्तुत करते हैं। दीपक और बाती के मिलन से प्रकाश उत्पन्न होता है। इसी प्रकार भक्त का जीवन आराध्य से जुड़कर सार्थक और प्रकाशमय बनता है।

4. आराध्य के प्रति अटूट निष्ठा

प्रश्न: “जो तुम तोरी राम मैं नहिं तोरी” पंक्ति में रैदास का क्या आशय है?

(1) परोपकारी भक्ति भाव
(2) आराध्य से अटूट संबंध
(3) सांसारिक मोह
(4) कर्मकांड पर बल

उत्तर: (2) आराध्य से अटूट संबंध

इस पंक्ति में कवि भगवान के प्रति अपनी अटूट निष्ठा व्यक्त करते हैं। उनका कहना है कि यदि भगवान उनसे अपना संबंध तोड़ भी दें, तब भी वे अपने आराध्य से संबंध नहीं तोड़ेंगे। यह उनकी सच्ची भक्ति, विश्वास और पूर्ण समर्पण को दर्शाता है।

5. तीर्थ और व्रत के स्थान पर सच्ची भक्ति

प्रश्न: “तीरथ बरत न करूँ अंदेसा” पंक्ति से आप क्या समझते हैं?

(1) तीर्थ और व्रत आवश्यक नहीं हैं।
(2) तीर्थ और व्रत सब आवश्यक हैं।
(3) तीर्थ जाने से मुक्ति निश्चित है।
(4) आराध्य के चरणों में सच्चा आश्रय है।

उत्तर: (4) आराध्य के चरणों में सच्चा आश्रय है।

इस पंक्ति में संत रैदास भगवान के चरणों में अपने विश्वास को सबसे महत्वपूर्ण बताते हैं। उनके लिए सच्ची भक्ति का आधार बाहरी कर्मकांडों से अधिक आराध्य के प्रति प्रेम, श्रद्धा और समर्पण है।

6. ईश्वर की सर्वव्यापकता

प्रश्न: सर्वव्यापक ईश्वर की अवधारणा किस पंक्ति में व्यक्त होती है?

(1) “जहँ जहँ जाओ तुम्हारी पूजा”
(2) “जाकी जोति बरै दिन राती”
(3) “तुम दीपक, हम बाती”
(4) “तीरथ बरत न करूँ अंदेसा”

उत्तर: (2) “जाकी जोति बरै दिन राती”

इस पंक्ति में ईश्वर की दिव्य ज्योति और उसकी निरंतर उपस्थिति का भाव व्यक्त होता है। संत रैदास की भक्ति में ईश्वर को प्रकाश और चेतना के स्रोत के रूप में देखा गया है, जिसकी महिमा निरंतर बनी रहती है।

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Class 9 Hindi Chapter 8 रैदास के पद के लघु उत्तरीय प्रश्न

7. “प्रभु जी तुम घन बन, हम मोरा” पंक्ति का भावार्थ स्पष्ट कीजिए।

प्रश्न: “प्रभु जी तुम घन बन, हम मोरा, जैसे चितवत चंद चकोरा” पंक्ति का भावार्थ और इसमें व्यक्त भक्ति भावना समझाइए।

उत्तर:

इस पंक्ति में संत रैदास भगवान को बादल और स्वयं को मोर के समान बताते हैं। जिस प्रकार बादलों को देखकर मोर प्रसन्न हो जाता है, उसी प्रकार भक्त अपने आराध्य को देखकर आनंदित होता है। आगे कवि चकोर और चंद्रमा की उपमा के माध्यम से भगवान के प्रति अपने प्रेम और आकर्षण को व्यक्त करते हैं।

इस पंक्ति का मुख्य भाव यह है कि भक्त का मन अपने आराध्य के प्रति गहरे प्रेम से जुड़ा रहता है। भगवान का स्मरण और उनका सान्निध्य भक्त को आनंद और संतोष प्रदान करता है।

8. “तीरथ बरत न करूँ अंदेसा, तुम्हारे चरण कमल एक भरोसा” का आशय लिखिए।

उत्तर:

इस पंक्ति में संत रैदास भगवान के चरणों में अपनी अटूट श्रद्धा और विश्वास व्यक्त करते हैं। वे कहते हैं कि उन्हें तीर्थ और व्रत की चिंता नहीं है, क्योंकि उनके लिए भगवान के चरण ही सबसे बड़ा सहारा हैं।

कवि के अनुसार सच्ची भक्ति केवल बाहरी धार्मिक क्रियाओं तक सीमित नहीं होती। ईश्वर के प्रति सच्चा प्रेम, विश्वास और समर्पण भी भक्ति के महत्वपूर्ण आधार हैं। इस प्रकार यह पंक्ति भक्त की पूर्ण निष्ठा और आराध्य पर निर्भरता को दर्शाती है।

Class 9 Hindi Chapter 8 रैदास के पद के दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

9. “जो तुम तोरौ राम मैं नहिं तोरी” पंक्ति में रैदास की अपने आराध्य में अटूट निष्ठा का भाव है। इससे आप क्या समझते हैं?

उत्तर:

इस पंक्ति से संत रैदास की भगवान के प्रति गहरी और अटूट भक्ति का पता चलता है। वे कहते हैं कि यदि भगवान उनसे अपना संबंध तोड़ भी दें, तब भी वे अपने आराध्य से संबंध नहीं तोड़ेंगे। इससे उनकी निष्ठा, समर्पण और प्रेम की भावना प्रकट होती है।

रैदास भगवान को अपने जीवन का महत्वपूर्ण आधार मानते हैं। उनके लिए आराध्य के प्रति विश्वास किसी परिस्थिति या कठिनाई से प्रभावित नहीं होता। यह पंक्ति हमें सिखाती है कि सच्ची भक्ति में स्थिरता, विश्वास और पूर्ण समर्पण होना चाहिए।

10. रैदास ने तीर्थ और व्रत के स्थान पर किस साधन को भक्ति का प्रमुख आधार माना है? आपके विचार से भक्ति के क्या आधार हो सकते हैं?

उत्तर:

संत रैदास ने तीर्थ और व्रत की अपेक्षा भगवान के चरणों में सच्चे विश्वास और समर्पण को भक्ति का प्रमुख आधार माना है। उनके अनुसार केवल बाहरी धार्मिक क्रियाओं से अधिक महत्वपूर्ण मन की पवित्रता और आराध्य के प्रति सच्चा प्रेम है।

मेरे विचार से भक्ति के प्रमुख आधार ईश्वर में अटूट विश्वास, प्रेम, मन की पवित्रता, निस्वार्थ भावना और अच्छे कर्म हैं। जब व्यक्ति मन, वचन और कर्म से सच्चाई तथा सद्भाव का पालन करता है, तो उसकी भक्ति अधिक सार्थक बनती है।

11. दोनों पदों में भक्त और आराध्य के संबंध को किन-किन प्रतीकों और उपमाओं से व्यक्त किया गया है?

उत्तर:

संत रैदास ने दोनों पदों में भक्त और भगवान के संबंध को अनेक सुंदर प्रतीकों और उपमाओं के माध्यम से व्यक्त किया है।

  • चंदन और पानी: भगवान को चंदन तथा भक्त को पानी बताकर दोनों के गहरे जुड़ाव को दर्शाया गया है।

  • दीपक और बाती: इस उपमा से भक्त और भगवान के मिलन से जीवन में प्रकाश आने का भाव व्यक्त होता है।

  • बादल और मोर: बादल को देखकर प्रसन्न होने वाले मोर के माध्यम से भगवान के प्रति भक्त का आनंद और आकर्षण दिखाया गया है।

  • चकोर और चंद्रमा: इस उपमा से आराध्य के प्रति प्रेम, लगाव और एकाग्रता का भाव प्रकट होता है।

  • मोती और धागा: इस प्रतीक के माध्यम से भक्त और भगवान के अटूट संबंध को व्यक्त किया गया है।

इन सभी उपमाओं से स्पष्ट होता है कि संत रैदास के लिए भक्त और भगवान का संबंध प्रेम, विश्वास, समर्पण और आत्मीयता पर आधारित है।

रैदास के पद के महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर PDF लिंक 

विद्यार्थी Class 9 Hindi रैदास के पद प्रश्न उत्तर की तैयारी करते समय अपनी पाठ्यपुस्तक में दिए गए अभ्यास प्रश्नों को भी हल करें। अतिरिक्त प्रश्नों और उत्तरों की PDF उपलब्ध होने पर उसे डाउनलोड करके परीक्षा से पहले रिवीजन के लिए उपयोग किया जा सकता है। PDF का सत्यापित लिंक उपलब्ध न होने के कारण यहाँ कोई अपुष्ट डाउनलोड लिंक नहीं दिया गया है।

रैदास के पद के महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर PDF लिंक 

Class 9 Hindi “रैदास के पद” NCERT प्रश्न-उत्तर क्यों पढ़ें?

NCERT Class 9 Hindi Solutions by PW विद्यार्थियों को पाठ के प्रमुख भावों और प्रश्नों के उत्तर समझने में मदद कर सकते हैं।

  • भक्ति भावना समझें: भगवान के प्रति संत रैदास के प्रेम, विश्वास और समर्पण को जानें।

  • प्रतीकों का अर्थ समझें: चंदन-पानी, दीपक-बाती और बादल-मोर जैसी उपमाओं का भाव समझें।

  • महत्वपूर्ण पंक्तियों का अर्थ जानें: पदों में व्यक्त भाव और उनके संदेश को सरल भाषा में समझें।

  • वर्णनात्मक प्रश्नों का अभ्यास करें: लघु और दीर्घ उत्तरीय प्रश्नों के उत्तर लिखने का अभ्यास करें।

  • परीक्षा से पहले रिवीजन करें: पाठ के मुख्य विचारों और महत्वपूर्ण बिंदुओं को दोहराएं।

रैदास के पद हमें सच्ची भक्ति, अटूट विश्वास और समर्पण का महत्व समझाते हैं। इन प्रश्न-उत्तर की मदद से विद्यार्थी पाठ की बेहतर समझ विकसित कर सकते हैं और परीक्षा की तैयारी को अधिक प्रभावी बना सकते हैं।

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Class 9 Hindi Rraidas ke pad FAQs

Raidas ke pad ke rachyita kaun han?

रैदास के पद संत रैदास द्वारा रचित हैं। इन पदों में भगवान के प्रति उनकी गहरी भक्ति और समर्पण की भावना व्यक्त हुई है।

Prabhu ji tum chandan hum pani pankti ka kya arth hai?

इस पंक्ति में संत रैदास भगवान को चंदन और स्वयं को पानी के समान बताते हैं। इसका भाव भक्त और भगवान के गहरे जुड़ाव तथा एकाकार होने की भावना से है।

Tum dipak hum baati pankti mein kya bhav vyakt hua hai?

इस पंक्ति में भक्त और भगवान के मिलन से जीवन में प्रकाश आने का भाव व्यक्त हुआ है। दीपक और बाती की उपमा दोनों के परस्पर संबंध को दर्शाती है।

Raidas ne sacchi bhakti ka aadhar kise mana hai?

संत रैदास ने भगवान के प्रति सच्चे प्रेम, विश्वास और समर्पण को भक्ति का प्रमुख आधार माना है।
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