JEE Main 2026 की तैयारी कर रहे छात्रों को फिजिक्स का पाठ्यक्रम बोझिल नहीं लगेगा। राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) ने JEE Main के फिजिक्स पाठ्यक्रम में बड़े बदलाव साल 2024 में किए थे। उसी समय नया और कम किया गया सिलेबस जारी किया गया था, जिसमें से कई विषय हटा दिए गए थे। इसके बाद JEE Main 2025 और JEE Main 2026 में वही संशोधित सिलेबस जारी रखा गया, यानी अभी तक कोई अलग बदलाव नहीं किया गया है। छात्र यहां से हटाए गए विषयों के बारे में जानकारी ले सकते हैं।
JEE Main 2026 के लिए फिजिक्स पाठ्यक्रम में कोई बड़ा बदलाव नहीं है, यह 2024-25 के समान ही रहने की उम्मीद है। मुख्य रूप से कम्युनिकेशन सिस्टम , ट्रांजिस्टर, डॉप्लर प्रभाव, और कुछ पोटेंशियोमीटर हटाए गए हैं। कुल मिलाकर, सिलेबस में से लगभग 15 फीसदी विषय कम किए गए हैं। जिससे पढ़ाई का दायरा थोड़ा कम हो गया है।
छात्र अब महत्वपूर्ण अध्यायों पर अधिक ध्यान दे सकेंगे और अपनी तैयारी को बेहतर तरीके से व्यवस्थित कर पाएंगे। इसलिए छात्रों को चाहिए कि वे अपडेटेड सिलेबस के अनुसार पढ़ाई की योजना बनाएं और उसी आधार पर अपनी तैयारी आगे बढ़ाएं।
राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी द्वारा फिजिक्स से हटाए गए कुछ पाठ्यक्रम की वजह से छात्रों को कई तरह के लाभ मिले हैं। उन्हें अब 40 से 60 घंटे अनावश्यक पढ़ाई करने से राहत मिलेगी और वे अपना ध्यान मैकेनिक्स, इलेक्ट्रोडायनामिक्स और आधुनिक भौतिकी जैसे मुख्य विषयों पर अच्छे से लगा सकेंगे। इससे उनकी अवधारणाएं अधिक स्पष्ट होंगी और तैयारी पहले से बेहतर हो पाएगी।
तनाव कम होगा और पढ़ाई भी अधिक व्यवस्थित तरीके से हो सकेगी। साथ ही छात्रों को रिवीजन और मॉक टेस्ट के लिए अधिक समय मिल सकेगा, जो परीक्षा में अच्छे अंक लाने में मदद करेगा।
JEE Main की परीक्षा देने वाले छात्रों के लिए यह जानना जरूरी है कि फिजिक्स के सिलेबस में कुछ बदलाव किए गए हैं। NTA द्वारा पाठ्यक्रम को थोड़ा सरल बनाने के लिए कुछ चैप्टर्स और टॉपिक्स को सिलेबस से हटा दिया गया है। इन बदलावों का उद्देश्य छात्रों पर पढ़ाई का अनावश्यक बोझ कम करना है ताकि वे महत्वपूर्ण विषयों पर अधिक ध्यान दे सकें। नीचे दी गई सूची से आप जान सकते हैं कि परीक्षा में कौन से विषय नहीं आएंगे।
फिजिक्स एंड मेजरमेंट्स : इस अध्याय से ऐसे टॉपिक्स हटा दिए गए हैं जिनमें समाज में फिजिक्स और तकनीक का उपयोग और मापने वाले उपकरणों की शुद्धता व सटीकता के बारे में पढ़ाया जाता था।
ग्रेविटेशन : इस यूनिट में जियोस्टेशनरी सैटेलाइट (भूस्थिर उपग्रह) से जुड़ा टॉपिक अब सिलेबस से हटा दिया गया है। पहले इसमें यह पढ़ाया जाता था कि कुछ उपग्रह पृथ्वी के साथ-साथ एक ही स्थान पर स्थिर दिखाई देते हैं। अब छात्रों को इस कॉन्सेप्ट की तैयारी करने की आवश्यकता नहीं है।
प्रॉपर्टीज ऑफ सॉलिड्स एंड लिक्विड्स: इस अध्याय से न्यूटन का शीतलन नियम और रेनॉल्ड्स नंबर से जुड़े टॉपिक्स को सिलेबस से हटा दिया गया है। पहले इन विषयों में वस्तुओं के ठंडा होने की प्रक्रिया और तरल पदार्थों के प्रवाह से जुड़े सिद्धांत पढ़ाए जाते थे।
थर्मोडायनामिक्स : इस यूनिट से कार्नोट इंजन और उसकी दक्षता (Efficiency) से जुड़ा टॉपिक सिलेबस से हटा दिया गया है। पहले इसमें यह पढ़ाया जाता था कि इंजन गर्मी को किस तरह ऊर्जा में बदलता है और उसकी कार्यक्षमता कितनी होती है। अब छात्रों को इस विषय की तैयारी नहीं करनी होगी ।
ऑस्सिलेशन एंड वेव्स : इस अध्याय से फ्री, फोर्स्ड और डैम्प्ड ऑस्सिलेशन, रेज़ोनेंस, बीट्स और ध्वनि में डॉप्लर इफेक्ट जैसे टॉपिक्स को सिलेबस से हटा दिया गया है। पहले इन विषयों में कंपन और ध्वनि तरंगों से जुड़े अलग-अलग प्रभावों के बारे में पढ़ाया जाता था।
करंट इलेक्ट्रिसिटी : इस यूनिट से पोटेंशियोमीटर के विस्तृत सिद्धांत और रेजिस्टर्स के कलर कोड से जुड़े टॉपिक्स को सिलेबस से हटा दिया गया है। पहले इन विषयों में विद्युत मापने के उपकरणों के काम करने के तरीके और रेजिस्टर्स की पहचान के नियम पढ़ाए जाते थे।
मैग्नेटिक इफेक्ट्स ऑफ करंट : इस अध्याय से साइक्लोट्रॉन और मैग्नेटिक हिस्टेरेसिस से जुड़े टॉपिक्स को सिलेबस से हटा दिया गया है। पहले इन विषयों में चुंबकीय क्षेत्र के प्रभाव और उससे जुड़े उपकरणों के बारे में पढ़ाया जाता था।
ऑप्टिक्स : इस यूनिट में लेंस फॉर्मूला और माइक्रोस्कोप तथा टेलीस्कोप की रिजॉल्विंग पावर से जुड़े विषय सिलेबस से बाहर कर दिए गए हैं। पहले इन टॉपिक्स में लेंस और ऑप्टिकल उपकरणों के काम करने के सिद्धांत पढ़ाए जाते थे।
एटम्स एंड न्यूक्लिआई : इस अध्याय से रेडियोएक्टिविटी और आइसोटोप्स से जुड़े टॉपिक्स को हटा दिया गया है। पहले इसमें परमाणु के नाभिक और उसके परिवर्तन से जुड़े विषयों की पढ़ाई कराई जाती थी।
ड्यूल नेचर ऑफ मैटर : इस यूनिट में डेविसन-जर्मर प्रयोग अब सिलेबस में शामिल नहीं है। पहले इस प्रयोग के माध्यम से इलेक्ट्रॉन के तरंग स्वरूप को समझाया जाता था।
कम्युनिकेशन सिस्टम्स : इस पूरे अध्याय को सिलेबस से हटा दिया गया है। पहले इसमें मॉड्यूलेशन तकनीक और संचार प्रणाली से जुड़े सिद्धांत पढ़ाए जाते थे, लेकिन अब छात्रों को इसकी तैयारी नहीं करनी होगी।
महत्वपूर्ण चैप्टर्स पर ज्यादा ध्यान दें : सिलेबस कम होने के बाद छात्र मैकेनिक्स, इलेक्ट्रोडायनामिक्स और मॉडर्न फिजिक्स जैसे मुख्य अध्यायों पर अधिक समय दे सकते हैं। इससे कॉन्सेप्ट मजबूत होंगे।
अपडेटेड सिलेबस के अनुसार पढ़ाई करें : पढ़ाई शुरू करने से पहले नया सिलेबस जरूर देखें। इससे हटाए गए टॉपिक्स पर समय बर्बाद नहीं होगा।
नियमित रूप से प्रश्नों का अभ्यास करें : पिछले वर्षों के प्रश्नपत्र और मॉक टेस्ट हल करने से परीक्षा पैटर्न समझने में मदद मिलेगी और गति भी बढ़ेगी।
कॉन्सेप्ट को अच्छे से समझें : केवल रटने के बजाय हर टॉपिक के बेसिक कॉन्सेप्ट को समझने की कोशिश करें, इससे कठिन प्रश्न भी आसानी से हल हो जाएंगे।
रिवीजन के लिए समय तय करें : सिलेबस कम होने से अब रिवीजन के लिए ज्यादा समय मिलेगा। नियमित दोहराव से परीक्षा में आत्मविश्वास बढ़ेगा।
