
UGC NET हिंदी साहित्यशास्त्र परीक्षा में यूनिट 3 से हर वर्ष महत्वपूर्ण प्रश्न पूछे जाते हैं। इस यूनिट में काव्य हेतु, रस सिद्धांत, अलंकार, बिम्ब, ध्वनि, व्यंग्य, प्रमुख आचार्य और पाश्चात्य काव्यशास्त्र जैसे विषयों का विशेष महत्व है।
इस लेख में पिछले वर्षों (PYQs) के महत्वपूर्ण प्रश्न उनके सही उत्तर और आसान भाषा में संक्षिप्त व्याख्या सहित दिए गए हैं, ताकि अभ्यर्थी परीक्षा के पैटर्न को समझ सकें और अपनी तैयारी को अधिक प्रभावी बना सकें।
UGC NET हिंदी साहित्यशास्त्र की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों के लिए यूनिट 3 सबसे महत्वपूर्ण यूनिटों में से एक है। इस लेख में पिछले वर्षों महत्वपूर्ण प्रश्न उनके सही उत्तर और आसान भाषा में संक्षिप्त व्याख्या सहित दिए गए हैं।
इन प्रश्नों में काव्य हेतु, बिम्ब, अलंकार, रस सिद्धांत, गुणीभूत व्यंग्य, पाश्चात्य काव्यशास्त्र तथा प्रमुख आचार्यों और साहित्यिक सिद्धांतों से जुड़े विषय शामिल हैं, जो UGC NET परीक्षा में बार-बार पूछे जाते हैं।
अपनी तैयारी को मजबूत बनाने के लिए इन सभी प्रश्नों का अभ्यास अवश्य करें। ऐसे ही और महत्वपूर्ण PYQs एवं प्रश्नों के लिए वीडियो को पूरा देखें।
UGC NET हिंदी साहित्य की परीक्षा में 'साहित्यशास्त्र' (यूनिट 3) एक ऐसा भाग है, जहाँ से बहुत सारे प्रश्न पूछे जाते हैं और इसमें पूरे अंक पाना काफी आसान है। इस क्लास में भारतीय और पाश्चात्य (Western) काव्यशास्त्र के उन महत्वपूर्ण प्रश्नों को शामिल किया गया है जो पिछले सालों में परीक्षा में पूछे जा चुके हैं।
Q1. 'बिम्ब' के संदर्भ में निम्नलिखित में से कौन से कथन सही हैं?
A. दृश्य बिम्ब आकार वाले होते हैं।
B. श्रव्य बिम्ब का ग्रहण कर्णेन्द्रिय के द्वारा होता है।
C. जटिल बिम्ब में अनुभूति का बिम्ब सरल होता है।
D. सरल अनुभूतियों से प्रेरित बिम्ब मिश्र बिम्ब कहलाते हैं।
E. मिश्र बिम्ब में मिश्र अनुभूति का बिम्ब सरल बिम्ब कहलाता है
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:
(A) केवल C, D
(B) केवल A, B
(C) केवल D, E
(D) केवल E, C
इस प्रश्न का सही उत्तर विकल्प (B) है
Answer (B)
दृश्य बिम्ब आकार वाले होते हैं। श्रव्य बिम्ब का ग्रहण कर्णेन्द्रिय के द्वारा होता है। डॉ. नगेन्द्र- "काव्यबिम्ब शब्दार्थ के माध्यम से कल्पना द्वारा निर्मित एक ऐसा मानस- छवि है, जिसके मूल में भाव की प्रेरणा रहती है।" डॉ. केदारनाथ सिंह- "बिम्ब वह शब्द-चित्र है जो कल्पना के द्वारा ऐन्द्रिय अनुभवों के आधार पर निर्मित होता है।"
आचार्य रामचन्द्र शुक्ल - "कविता में कही गयी बात चित्र-रूप में हमारे सामने आनी चाहिए, कविता में यह विशेषता बिम्ब-योजना द्वारा ही आती है।"
बिम्बों का वर्गीकरण अनेक आधारों पर किया गया है, यथा-
ज्ञानेन्द्रियों पर आधारित संवेद्य बिम्ब- चाक्षुष, श्रौत, स्पर्शिक, घ्राण्य तथा आस्वाद्य
सृजन प्रेरणा पर आधारित बिम्ब- कल्पित बिम्ब, स्मृत बिम्ब।
काव्यार्थ पर आधारित बिम्ब-सरल बिम्ब, संश्लिष्ट बिम्ब।
अनुभूतिपरक बिम्ब- विवृत बिम्ब, संवृत बिम्ब।
काव्य पर आधारित बिम्ब- वस्तुपरक बिम्ब, स्वच्छन्द बिम्ब।
अभिव्यंजना पर आधारित बिम्ब- प्रत्यक्ष बिम्ब, अलंकृत बिम्ब।
अन्य दृष्टि से- घटना-बिम्ब, प्रकरण-बिम्ब।
अतः विकल्प (B) सही है।
Q2. सूची-I से सूची-II का मिलान कीजिए:
| सूची-I (पंक्तियाँ) | सूची-II (रचनाकार) |
| A. गुरुपदेशादध्येतुं शास्त्रं जडधियो डप्यलम् | I. दण्डी |
| B. कवित्व बीजं प्रतिभानम् | II. भामह |
| C. न विद्यते यद्यपि पूर्ववासनागुणानुबन्धि प्रतिभानमद्भुतम् | III. आनन्दवर्धन |
| D. अव्युत्पत्तिकृतो दोषः शक्त्या संव्रियते कवेः। | IV. वामन |
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन कीजिए:
(A) A-II, B-I, C-III, D-IV
(B) A-II, B-IV, C-I, D-III
(C) A-I, B-II, C-III, D-IV
(D) A-IV, B-III, C-I, D-II
सूची-I की आखिरी पंक्ति के आगे छवि में त्रुटिवश पुनः 'C' लिखा गया है, जो वास्तव में 'D' होना चाहिए। इस प्रश्न का सही उत्तर विकल्प (B) है।
Q3. “काव्यशोभाकरान् धर्मानलंकारान् प्रचक्षते” यह लक्षण अलंकार के संदर्भ में किस आचार्य द्वारा दिया गया है?
(A) दण्डी
(B) वामन
(C) मम्मट
(D) कुन्तक
Answer (A) “काव्यशोभाकरान् धर्मानलंकारान् प्रचक्षते” अर्थात अलंकार काव्य को सौंदर्य प्रदान करने वाला धर्म हैं। यह लक्षण अलंकार के संदर्भ में आचार्य दण्डी का है। अलंकार सम्प्रदाय के प्रधान प्रवर्तक ‘भामह’ ने ‘सौंदर्यमलंकारः’ कहकर अलंकार को सौंदर्य का पर्यायवाची माना है। अतः विकल्प (A) सही है।
Q4. निम्नलिखित में से कौन से युग्म सही हैं?
A. विलियम वर्डस्वर्थ - स्वच्छन्दतावाद
B. क्रोंचे - अभिव्यंजनावाद
C. अरस्तू - त्रासदी
D. लोंजाइनस - नयी समीक्षा
E. ऐलन टेट - संरचना और बनावट
नीचे दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का च
(A) केवल A, D
(B) केवल A, B, C
(C) केवल B, E
(D) केवल D, E, A
Answer (B) साहित्य में विलियम वर्डसवर्थ को कवि और स्वच्छंदतावाद के प्रवर्तक के रूप में जाना जाता है। अभिव्यंजनावाद के प्रवर्तक बेनेदेत्तो क्रोचे मूलतः आत्मवादी दार्शनिक हैं। उनका उद्देश्य साहित्य में आत्मा की अन्तः सत्ता स्थापित करना था। इनसे पूर्व काण्ट ने मन तथा बाह्य जगत् के तादात्म्य और समन्वय का प्रतिपादन करते हुए दृश्य जगत् की उपेक्षा की और हीगेल ने काण्ट की मान्यता स्वीकार करते हुए दृश्य जगत् को भी महत्त्व प्रदान किया।
अरस्तू के अनुसार- “त्रासदी गंभीर स्वतःपूर्ण रचना है, जिसका एक निश्चित आयाम होत दुःखपूर्ण कार्य व्यापार है जिसका मूल लक्ष्य दूषित विचारों का शमन है।” अतः विकल्प (B) सही है।
Q5. “पुत्रवती युवती जग सोई।
रामभक्त सुत जाकर होई॥”
उपर्युक्त पंक्तियों में ‘गुणीभूत व्यंग्य’ का कौन सा भेद पाया जाता है?
(A) अगूढ़ व्यंग्य
(B) अपरांग व्यंग्य
(C) संदिग्ध प्राधान्य व्यंग्य
(D) तुल्य प्राधान्य व्यंग्य
Answer (D) तुल्य प्राधान्य गुणीभूत व्यंग्य वहाँ होता है जहाँ पर वाच्यार्थ और व्यंग्यार्थ दोनों समान चमत्कार पूर्ण हो, वहाँ तुल्यप्राधान्य व्यंग्य होता है। “पुत्रवती युवती जग सोई। रामभक्त सुत जाकर होई” पंक्ति में तुल्य प्राधान्य व्यंग्य है। अतः विकल्प (D) सही है।
Q6. रसनिष्पत्ति के व्याख्याकारों में से किसने ‘अनुमान’ को महत्त्व देकर ‘चित्र तुरंग न्याय’ की चर्चा की है?
(A) भट्ट लोल्लट
(B) शंकुक
(C) भट्ट नायक
(D) अभिनवगुप्त
Answer (B) शंकुक रस-प्रक्रिया के लिए एक नए तथ्य को प्रस्तुत करते हैं कि रस की स्थिति अनुकार्य (मूल-पात्र) में होती है, नट अपने कुशल अभिनय द्वारा हाव-भाव के माध्यम से उसे प्रदर्शित करना चाहता है। वस्तुतः नट में रस की स्थिति नहीं है पर उसमें यह अनुमान कर लिया जाता है। जब तक सामाजिक नट को उसके अभिनय-कौशल के बल पर रामादि नहीं समझता तब तक उसे रसास्वाद प्राप्त नहीं हो सकता। नट के अभिनय कौशल को देखकर ही सहृदय भ्रम के कारण नायक का अनुमान करता है। वस्तुतः शंकुक का सिद्धांत भट्ट लोल्लट के सिद्धांत की मूल भित्ति है।
दोनों में थोड़ा सा अंतर यही है कि भट्टलोल्लट के अनुसार सामाजिक नट पर मूल नायकादि का ‘आरोप’ कर लेता है जबकि शंकुक वह ‘अनुमान’ कर लेता है कि नट ही मूल नायक हैं। शंकुक का ‘अनुमान’ अन्य लौकिक अनुमानों से भिन्न और विलक्षण है। जिस प्रकार चित्रतुरंग में भागता हुआ घोड़ा न भागते हुए भी भागता सा प्रतीत होता है।
अतः विकल्प (B) सही है।
Q7. “केवल अतीत ही वर्तमान के रूप को मर्यादित नहीं करता, वर्तमान भी अतीत को प्रभावित करता है।” यह कथन किस पाश्चात्य विचारक का है?
(A) फ्रायड
(B) इलियट
(C) बेनेडिटो क्रोंचे
(D) जॉन क्रो रैन्सम
Answer (B) इलियट ने लिखा है कि “कलाकार की प्रगति एक सतत आत्मदान की, सतत तिरोभाव की प्रक्रिया है।” अहम् का विसर्जन इलियट का महत्त्वपूर्ण काव्य सिद्धान्त है जिसे ‘निर्वैयक्तिकता का सिद्धान्त’ भी कहते हैं।
पाठक और कविता का सम्बन्ध ‘वस्तुपरक सादृश्य’ के द्वारा निरूपित होता है। “केवल अतीत ही वर्तमान के रूप को मर्यादित नहीं करता, वर्तमान भी अतीत को प्रभावित करता है।” यह कथन इलियट का है। अतः विकल्प (B) सही है।